देवगौड़ा ने की PM मोदी की तारीफ: 'नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रमाण'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने एक विशेष लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सबसे लंबे समय तक सेवारत लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत मील का पत्थर नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की निरंतर मज़बूती का प्रमाण है। 'मोदी इसलिए इतने सफल हैं क्योंकि वे सोच-समझकर फैसले लेते हैं' शीर्षक वाले इस लेख में देवेगौड़ा ने जवाहरलाल नेहरू और मोदी के कार्यकालों की तुलनात्मक समीक्षा भी प्रस्तुत की है।
नेहरू का रिकॉर्ड और बदला हुआ भारत
देवेगौड़ा ने लिखा कि 1952 के पहले आम चुनाव में नेहरू महात्मा गांधी का नैतिक आशीर्वाद और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रतिष्ठा लेकर उतरे थे। उस समय कांग्रेस के सामने कोई वास्तविक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं थी — 53 पार्टियों ने चुनाव लड़ा, लेकिन उनका प्रभाव नगण्य था। मतदाताओं की संख्या महज़ 17 करोड़ थी और देश की आबादी 34 करोड़।
इसके विपरीत, 2024 में मोदी का मुकाबला 2,593 पार्टियों से था, मतदाताओं की संख्या 83 करोड़ तक पहुँच चुकी थी और देश की जनसंख्या 146 करोड़ से अधिक हो गई है। देवेगौड़ा के अनुसार, यह भारत एक बहुत अलग और कहीं अधिक जटिल लोकशाही है।
सामाजिक पूंजी का सवाल और व्यक्तिगत अनुभव
देवेगौड़ा ने अपने स्वयं के अनुभव का हवाला देते हुए कहा, 'नेहरू-गांधी परिवार के बाहर के प्रधानमंत्रियों के लिए कोई विशेष चमक-दमक या रुतबा नहीं था। नरेंद्र मोदी और मेरे मामले में हमारे पास वह सामाजिक और सांस्कृतिक पूंजी भी नहीं थी, जिसका कई अन्य प्रधानमंत्रियों ने लाभ उठाया था।'
उन्होंने स्वीकार किया कि वे स्वयं केवल 11 महीने ही प्रधानमंत्री रह सके। उन्होंने लिखा, 'मैं सोचता हूं कि पीएम मोदी किस आशीर्वाद से बिना किसी थकान के शीर्ष पर बने हुए हैं। न तो उनमें कोई थकान दिखाई देती है और न ही उन्हें चुनने वाले लोगों में।'
कैबिनेट विविधता और सामाजिक प्रतिनिधित्व
देवेगौड़ा ने नेहरू की कैबिनेट की आलोचना करते हुए कहा कि उनके तीसरे और अंतिम कार्यकाल तक भी उनकी कैबिनेट में अधिकांश उच्च जाति के पुरुष ही थे। नेहरू ने काका केलकर कमीशन की रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया था, जिसमें पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने की सिफारिश की गई थी।
इसके विपरीत, उन्होंने मोदी की मौजूदा कैबिनेट को अधिक विविधतापूर्ण बताया — जिसमें 27 ओबीसी, 10 एससी और 5 एसटी सदस्य हैं और महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही पारित हो चुका है और अप्रैल 2026 में संसद की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
मीडिया दबाव और आधुनिक जवाबदेही
देवेगौड़ा ने इस बात को भी रेखांकित किया कि नेहरू के समय में अधिकतम आधा दर्जन अखबारों से ही सामना करना पड़ता था, जबकि आज मोदी को सोशल मीडिया पर लाखों लोगों की निगाहों और चौबीसों घंटे चलने वाली मुख्यधारा की मीडिया की आलोचना का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि नेहरू के समय टेलीविजन न्यूज़ का अस्तित्व ही नहीं था।
देवेगौड़ा का समग्र मूल्यांकन
देवेगौड़ा ने मोदी को बधाई देते हुए कहा, 'भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाए रखने की उनकी कोशिशें, उनकी कल्याणकारी नीतियां और सैन्य टकराव के समय निर्णय लेने की क्षमता विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। देशहित के मामलों में उन्होंने कभी समझौता नहीं किया।'
उन्होंने यह भी कहा कि मोदी ने तकनीक का उपयोग किसी अन्य प्रधानमंत्री से बेहतर तरीके से किया है और उनका 'मन की बात' कार्यक्रम समाज के हर वर्ग तक पहुँचने का एक अनूठा प्रयास है। देवेगौड़ा के अनुसार, 'अंततः मोदी इसलिए सफल हैं क्योंकि वे लगातार आत्ममंथन करते रहे हैं और स्वयं को निरंतर जांच-परख के लिए खुला रखते हैं।' यह लेख उस समय आया है जब देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और नेतृत्व की विरासत पर व्यापक बहस जारी है।