धामी कैबिनेट के बड़े फैसले: गौ पालन, मजदूरी संहिता, गंगा एक्सप्रेसवे और खेल विश्वविद्यालय को मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड की धामी कैबिनेट ने 7 अगस्त 2026 को देहरादून में हुई बैठक में जनकल्याण, श्रमिक अधिकार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, न्यायिक अवसंरचना और औद्योगिक विकास से जुड़े एक दर्जन से अधिक अहम निर्णय लिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के फैसलों की जानकारी महानिदेशक सूचना एवं अपर सचिव बंशीधर तिवारी ने प्रेस ब्रीफिंग में दी।
न्यायिक और खेल अवसंरचना को विस्तार
कैबिनेट ने हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में उपलब्ध 73 हेक्टेयर वन भूमि में से लगभग 30 हेक्टेयर भूमि उच्च न्यायालय परिसर के निर्माण हेतु हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। इसके साथ ही उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय, गौलापार (हल्द्वानी) के सुचारू संचालन के लिए 122 नियमित पदों के साथ आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से आवश्यक तकनीकी एवं सहायक पदों की स्वीकृति दी गई, जिससे खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सकेगा।
गौ पालन योजना का विस्तार और पशुपालकों को राहत
राज्य सेक्टर की गौ पालन योजना का दायरा बढ़ाते हुए अब सामान्य वर्ग के पशुपालकों को भी इससे जोड़ा जाएगा। लाभार्थी अब गाय के साथ-साथ भैंस खरीदने का विकल्प भी चुन सकेंगे। पशु की यूनिट कॉस्ट ₹40,000 से बढ़ाकर ₹60,000 कर दी गई है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग को 60 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी। अनुमान है कि प्रथम वर्ष में लगभग 2,128 पशुपालकों को इसका लाभ मिलेगा, जिससे ग्रामीण स्वरोजगार और पलायन रोकने में मदद मिलेगी।
श्रमिक अधिकार और औद्योगिक संबंध
कैबिनेट ने मजदूरी संहिता, 2019 के तहत उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली, 2026 लागू करने का निर्णय लिया। इसमें न्यूनतम मजदूरी, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, प्रत्येक माह की सातवीं तारीख तक वेतन, डिजिटल भुगतान और समान कार्य के लिए महिला-पुरुष को समान वेतन सुनिश्चित करने के प्रावधान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत उत्तराखंड औद्योगिक संबंध नियमावली, 2026 भी लागू की जाएगी, जिसमें औद्योगिक विवादों के समयबद्ध समाधान, ट्रेड यूनियनों की मान्यता, शिकायत निवारण समितियों का गठन और श्रमिक री-स्किलिंग फंड जैसे प्रावधान हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार और अन्य प्रमुख निर्णय
उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड सरकार के बीच गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से हरिद्वार तक विस्तारित करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) किए जाने का निर्णय लिया गया। यह कदम धार्मिक पर्यटन, औद्योगिक निवेश, व्यापार और रोजगार को नई गति देगा। इसके साथ ही ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) की संरचना में संशोधन कर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों का बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा।
शिक्षा, समाज कल्याण और विधिक सुधार
समाज कल्याण विभाग के अधीन संचालित छात्रावासों के लिए संचालन नियमावली, 2026 लागू की जाएगी, जिससे अनुसूचित जाति एवं जनजाति के मेधावी छात्र-छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आवास, भोजन और सर्वांगीण विकास की सुविधाएं मिलेंगी। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में उत्तराखंड सहकारी समिति नियमावली, 2004 में संशोधन कर कुष्ठ रोग से संबंधित भेदभावपूर्ण प्रावधान हटाए जाएंगे। केंद्र सरकार के संशोधनों के अनुरूप उत्तराखंड माल एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने का भी निर्णय लिया गया। उत्तराखंड वन विकास निगम सेवा (संशोधन) विनियमावली, 2026 के तहत स्केलर पदों के लिए 100 अंकों की लिखित परीक्षा का प्रावधान किया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। ग्रामीण पेयजल योजनाओं की कमीशनिंग एवं ग्राम पंचायतों को हस्तांतरण के लिए भारत सरकार के निर्धारित प्रोटोकॉल को राज्य में लागू किया जाएगा। दिनेशपुर एवं शक्तिफार्म क्षेत्र के बंगाली मूल के अनुसूचित जाति समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए सहायता कोष संचालन समिति में उपाध्यक्ष एवं सदस्य पदों पर उसी समुदाय से नामांकन का निर्णय भी लिया गया।
इन व्यापक निर्णयों से राज्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती, श्रमिकों के अधिकारों का संरक्षण, विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं और औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। आगामी हफ्तों में इन नियमावलियों की अधिसूचना जारी होने के बाद इनका क्रियान्वयन शुरू होगा।