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धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वालों पर होगी कठोर कार्रवाई: उत्तराखंड मंत्री भरत चौधरी

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धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वालों पर होगी कठोर कार्रवाई: उत्तराखंड मंत्री भरत चौधरी

सारांश

उत्तराखंड के मंत्री भरत चौधरी ने एक साथ कई मोर्चों पर बोला — धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वालों के लिए 'कोई माफी नहीं', जंतर-मंतर नारेबाजी पर संवैधानिक सीमा की याद, और कांग्रेस पर तुष्टिकरण का सीधा आरोप। मानसून सत्र में 6-7 विधेयक पारित कराने का भी दावा।

मुख्य बातें

उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी ने 20 जुलाई 2026 को देहरादून में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वालों के खिलाफ 'अधिकतम कानूनी कार्रवाई' का ऐलान किया।
जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन पर कहा — अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की संवैधानिक और नैतिक सीमा होती है।
संसद के मानसून सत्र में सरकार 6 से 7 विधेयक पारित कराने का प्रयास करेगी; महिला आरक्षण विधेयक पर सहमति बनाने की कोशिश जारी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में बढ़ती बिजली माँग को लेकर केंद्र से अतिरिक्त आपूर्ति का अनुरोध किया; सकारात्मक आश्वासन मिला।
एसडीआरएफ और संबंधित एजेंसियाँ मानसून आपदाओं के लिए पूर्ण अलर्ट मोड पर।
चौधरी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी के पास जनहित के ठोस मुद्दे नहीं और वह तुष्टिकरण की राजनीति पर निर्भर है।

उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी ने 20 जुलाई 2026 को देहरादून में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामलों, जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन, संसद के मानसून सत्र और उत्तराखंड में बिजली संकट सहित कई अहम मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य और केंद्र सरकार जनहित के मुद्दों पर पूरी गंभीरता से काम कर रही है, जबकि उनके अनुसार विपक्ष के पास जनता से जुड़े ठोस मुद्दों का सर्वथा अभाव है।

धार्मिक भावनाओं पर कड़ा रुख

मंत्री भरत चौधरी ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे किसी भी मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उनके शब्दों में, सनातन धर्म के अनुयायियों की आस्था को ठेस पहुँचाना 'केवल अपराध ही नहीं, बल्कि एक जघन्य पाप भी है।' उन्होंने आश्वस्त किया कि ऐसे लोगों के विरुद्ध कानून के तहत अधिकतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और दोषियों को कठोर सजा दिलाने का हर संभव प्रयास होगा।

जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन और वहाँ लगाए गए नारों पर चौधरी ने कहा कि भारत एक स्वतंत्र और विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहाँ सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है। हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस स्वतंत्रता का अर्थ देश-विरोधी या गैर-जिम्मेदाराना नारेबाजी करना नहीं है। उनके अनुसार, 'कुछ सौ लोगों की भीड़ इकट्ठा कर इस प्रकार की नारेबाजी करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं' और लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की एक संवैधानिक व नैतिक सीमा होती है।

मानसून सत्र और महिला आरक्षण विधेयक

संसद के मानसून सत्र को लेकर मंत्री चौधरी ने कहा कि यह सत्र कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों के लिहाज से अहम साबित होगा। सरकार इस सत्र में छह से सात महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने का प्रयास करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार व्यापक सहमति बनाने की दिशा में सकारात्मक माहौल तैयार करने में जुटी है।

उत्तराखंड में बिजली संकट और मानसून तैयारी

राज्य में बढ़ती बिजली खपत पर चौधरी ने कहा कि उत्तराखंड में तेज़ औद्योगिक विकास के कारण बिजली की माँग बढ़ी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, जिस पर सकारात्मक आश्वासन मिला है। मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं के संदर्भ में मंत्री ने बताया कि एसडीआरएफ, नागरिक प्रशासन, पुलिस और संबंधित एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि न्यूनतम समय में राहत कार्य शुरू हो सके।

विपक्ष पर तीखा हमला

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए भरत चौधरी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास अब जनहित से जुड़े ठोस मुद्दे नहीं बचे हैं और वह दशकों से तुष्टिकरण की राजनीति पर निर्भर है। उनके अनुसार, जनता पहले भी इस रणनीति को नकार चुकी है और भविष्य में भी ऐसे प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगी। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जंतर-मंतर प्रदर्शन को अप्रत्यक्ष रूप से कठघरे में खड़ा करना, और कांग्रेस पर तुष्टिकरण का पुराना आरोप दोहराना। लेकिन 'अधिकतम कार्रवाई' की बात करते हुए यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन विशेष मामलों में और किस कानूनी प्रावधान के तहत यह होगी — जो इस बयान को ठोस नीति से अधिक राजनीतिक संकेत बनाता है। महिला आरक्षण विधेयक पर 'सकारात्मक माहौल' बनाने की बात भी उल्लेखनीय है, क्योंकि यह विधेयक पहले से ही पारित हो चुका है और परिसीमन की शर्त पर अटका है — ऐसे में 'सहमति' की बात भ्रामक हो सकती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत चौधरी ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने पर क्या कहा?
उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत अधिकतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सनातन धर्म की आस्था को ठेस पहुँचाने को 'जघन्य पाप' बताया।
जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन पर उत्तराखंड मंत्री का क्या रुख है?
मंत्री चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन देश-विरोधी या गैर-जिम्मेदाराना नारेबाजी की संवैधानिक और नैतिक सीमा होती है। उनके अनुसार कुछ सौ लोगों की भीड़ जुटाकर इस प्रकार की नारेबाजी उचित नहीं।
संसद के मानसून सत्र में कितने विधेयक पारित होंगे?
मंत्री भरत चौधरी के अनुसार सरकार इस मानसून सत्र में 6 से 7 महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने का प्रयास करेगी। महिला आरक्षण विधेयक पर भी व्यापक सहमति बनाने की दिशा में काम हो रहा है।
उत्तराखंड में बिजली संकट को लेकर सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त बिजली आपूर्ति का अनुरोध किया है, जिस पर सकारात्मक आश्वासन मिला है। राज्य में औद्योगिक विकास के कारण बिजली की माँग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उत्तराखंड में मानसून आपदाओं से निपटने की क्या तैयारी है?
मंत्री चौधरी ने बताया कि एसडीआरएफ, नागरिक प्रशासन, पुलिस और सभी संबंधित एजेंसियों को पूर्ण अलर्ट मोड पर रखा गया है। बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जनजीवन शीघ्र सामान्य हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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