नीट विवाद: इंडी गठबंधन सांसदों का प्रह्लाद जोशी पर हमला, माफी और इस्तीफे की माँग
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 29 जुलाई — केरल सरकार द्वारा लगभग 5,000 नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के बाद राजनीतिक तापमान तेज़ी से बढ़ा है। इंडी गठबंधन के सांसदों ने एकजुट होकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की कथित टिप्पणियों पर कड़ा एतराज़ जताया और उनसे सार्वजनिक माफी की माँग की। विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों की आवाज़ दबाने और विपक्षी सांसदों को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस सांसदों की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा कि जहाँ भी कांग्रेस की सरकारें हैं, वहाँ यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्रों पर किसी तरह का अत्याचार न हो। उन्होंने कहा, 'छात्रों की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को समझने और समाधान निकालने की ज़रूरत है।' उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपनी कथित टिप्पणी के लिए माफी माँगनी चाहिए और स्वीकार करना चाहिए कि उनसे गलती हुई।
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने नीट से जुड़े पुराने विवादों का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हुए हैं। उनके अनुसार, 20 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की और छात्रों को लंबे समय तक अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करना पड़ा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 2024 में लाए गए विधेयक — जिसमें जुर्माने और सज़ा के प्रावधान थे — के तहत वास्तव में कितने लोगों पर कार्रवाई हुई।
शिक्षा मंत्री की टिप्पणी पर विवाद
औजला ने शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की कथित टिप्पणी को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में प्रियंका गांधी की टिप्पणी का भी समर्थन किया। औजला ने कहा कि इस मामले से जुड़ी बातें सार्वजनिक हैं और इन्हें छिपाया नहीं जा सकता — 'यदि किसी मुद्दे पर सवाल उठ रहे हैं तो सत्ताधारी दल को उनका जवाब देना चाहिए।'
वामपंथी और क्षेत्रीय दलों की आवाज़
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद शिवदासन ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्षी सांसदों के खिलाफ लगातार शिकायतें और आरोप लगा रही है। उन्होंने पुलिस बल के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 'सरकार का यह रवैया लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।' उन्होंने विपक्षी दलों के एकजुट होकर आवाज़ उठाने की बात कही।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की सांसद महुआ माजी ने कहा कि अगर प्रियंका गांधी ने कोई बयान दिया है तो वह तथ्यों के आधार पर ही दिया होगा। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए हर कदम उठाया जाना चाहिए।
युवाओं की भावनाओं पर ज़ोर
महुआ माजी ने नीट प्रदर्शन को लेकर कहा कि कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन युवाओं की भावनाओं को भी समझना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि जेन-ज़ी युवाओं ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन कर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की क्योंकि उन्हें अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता थी — वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कोई भी उनके करियर और अवसरों को खतरे में न डाल सके।
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब नीट परीक्षा प्रणाली पहले से ही पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवालों के घेरे में है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज़ होने के संकेत हैं।