ग्रामीण भारत को डॉक्टरों की ज़रूरत: कर्नाटक CM डीके शिवकुमार की नए मेडिकल स्नातकों से अपील
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार, 16 जून को बेंगलुरु के जीकेवीके कैंपस में आयोजित राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के 28वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में नव-स्नातक चिकित्सा पेशेवरों से आग्रह किया कि वे अपनी सेवाएं केवल शहरी केंद्रों तक सीमित न रखें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना आज के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य दायित्वों में से एक है।
मुख्यमंत्री का संबोधन: मुख्य बातें
शिवकुमार ने कहा, 'भारत सामाजिक और तकनीकी बदलाव के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुंचनी चाहिए। गांवों और छोटे कस्बों में सेवा देकर आप लोगों को इलाज के लिए शहरों की ओर पलायन करने से रोक सकते हैं।' उन्होंने डॉक्टरों को समाज का 'भगवान' बताते हुए कहा कि लोग अपने सबसे कठिन क्षणों में उन पर अटूट भरोसा करते हैं — और इस विश्वास को बनाए रखना प्रत्येक चिकित्सक की नैतिक जिम्मेदारी है।
कर्नाटक: देश का स्वास्थ्य प्रतिभा केंद्र
मुख्यमंत्री ने कर्नाटक की चिकित्सा शिक्षा की ताकत को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि राज्य में 72 मेडिकल कॉलेज हैं — भारत के किसी भी अन्य राज्य से अधिक — और हर वर्ष लगभग 72,000 स्वास्थ्य स्नातक तैयार होते हैं, जिनमें 13,940 डॉक्टर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के डॉक्टर दुनिया के प्रतिष्ठित अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं और राज्य न केवल आईटी, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भी वैश्विक प्रतिभा का केंद्र बन चुका है।
राजीव गांधी विश्वविद्यालय की विरासत
राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज को देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालयों में से एक बताते हुए शिवकुमार ने कहा कि इससे 1,044 संबद्ध कॉलेज जुड़े हैं और पिछले तीन दशकों में इसने लगभग आठ लाख स्नातक तैयार किए हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के विजन को याद करते हुए कहा कि उनका मानना था कि शिक्षा सामाजिक समानता का सबसे मजबूत साधन है।
शिक्षा, नशा-मुक्ति और व्यक्तिगत अनुभव
मुख्यमंत्री ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरण प्रकाश पाटिल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने विभाग में अनुशासन और प्रतिबद्धता का नया स्तर स्थापित किया है। उन्होंने नशा-मुक्त भारत, कर्नाटक और शैक्षणिक परिसरों के अभियान का समर्थन किया। अपनी व्यक्तिगत यात्रा साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वे किसान परिवार से आते हैं, छात्र जीवन में ही राजनीति में आ गए और 2008 में 47 वर्ष की आयु में मैसूर विश्वविद्यालय से अपनी डिग्री पूरी की। उन्होंने युवा डॉक्टरों को प्रेरित करते हुए कहा कि दुनिया भारत की ओर देख रही है और उनके सामने उज्ज्वल भविष्य है।
आगे की राह
कर्नाटक सरकार ने राजीव गांधी विश्वविद्यालय को हर संभव सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है। शिवकुमार ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की असली ताकत छात्रों या डिग्रियों की संख्या नहीं, बल्कि शिक्षकों की गुणवत्ता होती है — और शिक्षकों को शोध व नवाचार को प्रेरित करने वाले मार्गदर्शक बनना चाहिए। यह संबोधन मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका इस विश्वविद्यालय में पहला था, जो राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।