दुरई मुरुगन की पोती की शादी में वैदिक रीति-रिवाज, द्रविड़ विचारधारा पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के महासचिव दुरई मुरुगन की पोती सेंथामराई का विवाह समारोह चेन्नई में संपन्न हुआ, जो अब द्रविड़ राजनीतिक हलकों में तीखी बहस का केंद्र बन गया है। विवाद की जड़ यह है कि यह समारोह पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों और संस्कृत वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ संपन्न कराया गया — एक ऐसी शैली जो DMK की दीर्घकालीन वैचारिक प्रतिबद्धता यानी 'आत्मसम्मान विवाह' की परंपरा से स्पष्ट रूप से अलग मानी जा रही है।
समारोह का ब्यौरा
वेल्लोर से DMK सांसद कथिर आनंद की बेटी और दुरई मुरुगन की पोती सेंथामराई का विवाह दीपक रवि से हुआ। इस भव्य समारोह में कई राजनीतिक, फ़िल्मी और सामाजिक हस्तियाँ उपस्थित रहीं।
DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन, उप मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन, और पार्टी की उप महासचिव कनिमोझी सहित अनेक वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पीएमके संस्थापक एस. रामदास, पीएमके नेता अंबुमणि रामदास, और तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्व अध्यक्ष तमिलिसाई सौंदरराजन भी उपस्थित रहे।
फ़िल्म जगत से अभिनेता धनुष और शिवकार्तिकेयन समारोह में पहुँचे। प्रसिद्ध संगीतकार युवान शंकर राजा ने संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जबकि सेलिब्रिटी शेफ मधमपट्टी रंगराज भोज का हिस्सा रहे।
विवाद क्यों उठा
समारोह में संस्कृत वैदिक मंत्रों के जाप और पारंपरिक हिंदू अनुष्ठानों के पालन को द्रविड़ आंदोलन के एक वर्ग ने आपत्तिजनक पाया। ऐतिहासिक रूप से द्रविड़ आंदोलन ने ब्राह्मणवादी धार्मिक प्रथाओं का विरोध करते हुए तर्कवाद, सामाजिक समानता और 'आत्मसम्मान विवाह' को अपनी वैचारिक पहचान का केंद्र बनाया है।
पूर्व DMK सांसद सेंथिल कुमार और द्रविड़ इयक्का तमिलर पेरवई के अध्यक्ष सुबा वीरपांडियन ने इस समारोह पर खुलकर निराशा जताई है। आलोचकों ने उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर पहले दिए गए विवादित बयानों का भी हवाला दिया, और तर्क दिया कि एक वरिष्ठ DMK नेता के परिवार में वैदिक अनुष्ठानों का होना पार्टी की सार्वजनिक वैचारिक स्थिति और उसके नेताओं की निजी धार्मिक आस्था के बीच की खाई को उजागर करता है।
आत्मसम्मान विवाह की पृष्ठभूमि
दशकों से DMK ने 'आत्मसम्मान विवाह' को प्रोत्साहित किया है। यह अवधारणा समाज सुधारक ईवी रामासामी पेरियार ने लोकप्रिय बनाई थी। ऐसे विवाहों में पुजारी, संस्कृत मंत्र और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों की जगह वर-वधू के बीच समानता पर आधारित सरल प्रतिज्ञाओं को प्राथमिकता दी जाती है। द्रविड़ आंदोलन इन समारोहों को जाति-आधारित धार्मिक प्रथाओं के विरोध की वैचारिक अभिव्यक्ति मानता है।
गौरतलब है कि दुरई मुरुगन DMK के सबसे लंबे समय तक सेवारत नेताओं में गिने जाते हैं और महासचिव के प्रभावशाली पद पर हैं, जो संगठनात्मक पदानुक्रम में पार्टी अध्यक्ष के बाद दूसरे स्थान पर है। ऐसे में यह विवाद महज एक पारिवारिक समारोह से आगे जाकर दल की वैचारिक विश्वसनीयता पर सवाल बन गया है।
व्यापक सवाल और आगे की स्थिति
इस घटना ने एक बड़ी बहस फिर से जीवित कर दी है — कि किसी राजनीतिक दल की वैचारिक प्रतिबद्धताएँ उसके वरिष्ठ पदाधिकारियों के निजी और पारिवारिक जीवन को किस हद तक दिशा देती हैं, और व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता की सीमाएँ कहाँ तय होती हैं। फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि यह विवाह आत्मसम्मान विवाह पर DMK की आधिकारिक नीति में किसी बदलाव का संकेत देता हो। आने वाले दिनों में पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया और द्रविड़ आंदोलन के भीतर इस बहस की दिशा पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।