दुर्गापुर पूरब सीट पर भाजपा की बड़ी जीत: चंद्रशेखर बनर्जी ने टीएमसी को 30,000 से अधिक वोटों से हराया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले की दुर्गापुर पूरब विधानसभा सीट पर 2026 विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार चंद्रशेखर बनर्जी ने 30,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है। इस सीट पर लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का वर्चस्व रहा था, लेकिन इस बार भाजपा ने यहाँ सेंध लगाने में कामयाबी हासिल की।
मतगणना के आँकड़े
चंद्रशेखर बनर्जी को कुल 1,08,888 वोट मिले, जबकि तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा विधायक प्रदीप मजूमदार को 77,954 वोट ही मिल सके। इस प्रकार जीत का अंतर 30,934 वोट रहा। तीसरे स्थान पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई (एम) — के उम्मीदवार सीमांत चटर्जी रहे, जबकि चौथे स्थान पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के देबेश चक्रवर्ती रहे।
चुनावी मैदान में कौन-कौन थे
तृणमूल कांग्रेस ने 2021 में इस सीट से जीत चुके अपने विधायक प्रदीप मजूमदार को एक बार फिर मैदान में उतारा था। भाजपा ने चंद्रशेखर बनर्जी पर दाँव लगाया, जबकि वाम मोर्चे की ओर से सीपीआई (एम) ने सीमांत चटर्जी को और कांग्रेस ने देबेश चक्रवर्ती को प्रत्याशी बनाया था।
मतदान और चुनावी प्रक्रिया
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों में सम्पन्न हुए। दुर्गापुर पूरब सीट पर मतदान पहले चरण में 23 अप्रैल 2026 को हुआ, जबकि दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल 2026 को कराई गई। इस सीट पर 2026 में लगभग 90 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो 2021 के लगभग 79 प्रतिशत मतदान से काफी अधिक है। यह उच्च मतदान प्रतिशत मतदाताओं की बढ़ी हुई भागीदारी और सीट पर कड़े मुकाबले का संकेत माना जा रहा है।
सीट का राजनीतिक इतिहास
दुर्गापुर पूरब विधानसभा सीट का गठन 1962 में हुआ था और वर्तमान स्वरूप 2006 की परिसीमन प्रक्रिया के बाद तय हुआ। यह सीट बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जहाँ से फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के कीर्ति आजाद सांसद हैं। ऐतिहासिक रूप से यह सीट वाम दलों — विशेषकर सीपीआई (एम) — का गढ़ रही है। दुर्गापुर औद्योगिक बेल्ट दशकों तक वामपंथ का केंद्र रहा। 2011 में तृणमूल कांग्रेस ने यहाँ बढ़त बनाई, 2016 में सीपीआई (एम) के संतोष देबराय ने जीत दर्ज की और 2021 में तृणमूल कांग्रेस के प्रदीप मजूमदार ने सीट वापस अपने नाम की। अब 2026 में भाजपा ने यहाँ जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।
आगे क्या
यह जीत पश्चिम बंगाल के शहरी-औद्योगिक क्षेत्रों में भाजपा की पैठ का संकेत देती है। पश्चिम बर्दवान जैसे औद्योगिक जिलों में मतदाताओं का रुझान बदलना राज्य की समग्र राजनीतिक तस्वीर को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस जीत को राज्य स्तर पर किस रूप में भुनाती है।