डूसू चुनाव हार के बाद समर्थ बेनीवाल बोले — एनएसयूआई हर कमज़ोरी दूर करेगी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में अध्यक्ष पद के निर्दलीय प्रत्याशी समर्थ बेनीवाल ने 21 सितंबर 2026 को चुनाव परिणामों, एनएसयूआई के प्रदर्शन और कन्हैया कुमार पर लगाए गए आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी। बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि संगठन की हर कमज़ोरी की पहचान कर उसे दूर किया जाएगा और छात्र हितों की लड़ाई जारी रहेगी।
चुनाव परिणाम और एनएसयूआई का आत्ममंथन
समर्थ बेनीवाल ने एनएसयूआई के खराब प्रदर्शन पर कहा, 'जैसे कि एनएसयूआई ने कहा है, कई वजहें थीं जिन पर हम चर्चा करेंगे, सोच-विचार करेंगे और समाधान खोजने के लिए उनका विश्लेषण करेंगे।' उन्होंने यह भी जोड़ा, 'चुनाव में हार-जीत तो होती रहती है, लेकिन एनएसयूआई यह पक्का करेगी कि आगे बढ़ते हुए हर कमज़ोरी और कमी को दूर किया जाए।'
गौरतलब है कि इस बार डूसू अध्यक्ष पद के लिए एनएसयूआई ने पहली बार किसी आदिवासी समाज के युवा को टिकट देने का ऐतिहासिक कदम उठाया, जिसे संगठन अपनी वैचारिक मज़बूती का प्रमाण मानता है।
छात्र मुद्दे और प्रशासन से जवाबदेही की माँग
बेनीवाल ने बताया कि उनके चुनावी अभियान के केंद्र में दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाबदेही की माँग थी। उन्होंने कहा, 'चाहे सत्य निकेतन हो या कोई और जगह, हमने हर जगह दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन से जवाबदेही की माँग की। हालाँकि, उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।'
हॉस्टल की अनुपलब्धता और छात्रों के लिए स्वच्छ पेयजल की कमी को बेनीवाल ने प्रमुख जन-मुद्दों के रूप में रेखांकित किया, जिन्हें वे सीधे छात्रों तक लेकर गए।
कन्हैया कुमार पर आरोपों को बेनीवाल ने नकारा
एनएसयूआई की पराजय के लिए कन्हैया कुमार को ज़िम्मेदार ठहराने वाले आरोपों पर बेनीवाल ने सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'अगर किसी भी आरोप के साथ सबूत नहीं हैं तो वे झूठे आरोप हैं। हमको हवा में बातें नहीं करनी चाहिए।' उनका यह बयान उन राजनीतिक टिप्पणियों की सीधी प्रतिक्रिया है जिनमें कुमार को संगठन की गिरावट के लिए दोषी ठहराया जा रहा था।
राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर बेनीवाल का समर्थन
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की सराहना करते हुए बेनीवाल ने कहा कि इसका ज़मीनी असर साफ दिख रहा है। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी सुनने लायक मुद्दा उठा रहे हैं और इसको लेकर भाजपा और उनके संगठन भी चुप हो चुके हैं।' बेनीवाल के अनुसार कार्यक्रम में जनसमूह की व्यापक भागीदारी इसकी प्रासंगिकता को स्वयं सिद्ध करती है।
आगे की राह
बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि एनएसयूआई की विचारधारा 'दिन-ब-दिन मज़बूत हो रही है' और संगठन छात्र हितों के लिए अपनी लड़ाई भविष्य में भी जारी रखेगा। चुनावी हार के बावजूद संगठन के भीतर आत्मनिरीक्षण और सुधार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो डूसू की अगली चुनावी तैयारी की नींव रखेगी।