21 सितंबर 2026
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डूसू उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन बोले — जीत छात्रों की, एनएसयूआई और कन्हैया कुमार पर उठाए सवाल

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डूसू उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन बोले — जीत छात्रों की, एनएसयूआई और कन्हैया कुमार पर उठाए सवाल

सारांश

डूसू उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन की निर्दलीय जीत सिर्फ एक चुनावी नतीजा नहीं — यह संगठित छात्र राजनीति पर ज़मीनी जुड़ाव की जीत है। उन्होंने एनएसयूआई और कन्हैया कुमार पर सवाल उठाकर यह संकेत दिया कि पार्टी समर्थन भी बिना जमीनी पकड़ के बेकार है।

मुख्य बातें

दीपांशु शौकीन ने 21 सितंबर 2026 को डूसू उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय जीत दर्ज की।
उन्होंने जीत का पूरा श्रेय दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों को दिया।
सत्य निकेतन हादसे में पाँच छात्रों की मौत पर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया।
एनएसयूआई की हार के लिए आंतरिक प्रबंधन की कमी को जिम्मेदार ठहराया।
कन्हैया कुमार से जमीनी स्तर पर आकर निर्णय लेने की उम्मीद जताई।
राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' पहल की सराहना, लेकिन जमीनी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपाध्यक्ष पद जीतने वाले दीपांशु शौकीन ने 21 सितंबर 2026 को अपनी जीत का संपूर्ण श्रेय विश्वविद्यालय के छात्रों को दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जीत किसी पार्टी की नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों की है जिन्होंने उन पर भरोसा जताकर मजबूती से चुनाव लड़वाया। साथ ही उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) की चुनावी रणनीति और आंतरिक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए।

जीत का श्रेय और सत्य निकेतन हादसे पर चिंता

दीपांशु शौकीन ने कहा, 'दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने मेरी मदद की, मजबूती से चुनाव लड़वाया और मुझ पर भरोसा जताया — इसलिए इस जीत का श्रेय छात्रों को जाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि सत्य निकेतन की बड़ी घटना में प्रशासन की लापरवाही के चलते पाँच छात्रों की जान चली गई। उनका कहना था कि प्रशासन में जिम्मेदारी और पारदर्शिता होना अनिवार्य है।

एनएसयूआई की हार पर विश्लेषण

एनएसयूआई की पराजय पर शौकीन ने कहा, 'जमीनी हकीकत को देखते हुए निर्णय लिए जाते तो शायद परिणाम अलग होते।' उनके अनुसार, विद्यार्थी उन्हीं को समर्थन देते हैं जो उनके बीच रहकर उनकी बात रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों के हाथ में संगठन की पूरी मैनेजमेंट थी — चाहे वे पार्टी प्रभारी हों या अन्य जिम्मेदार लोग — उन्हें आंतरिक राजनीति को बेहतर ढंग से संभालना चाहिए था।

अध्यक्ष पद की चर्चा पर सफाई

एनएसयूआई की ओर से उन्हें अध्यक्ष पद पर लड़वाए जाने की अटकलों पर दीपांशु ने कहा कि यह कभी पुष्ट नहीं हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया, 'निर्दलीय तीन उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे और एनएसयूआई का नाम पहले ही तय हो चुका था।' उनका तर्क था कि यदि योग्यता के आधार पर निर्णय होता तो वे एक मजबूत दावेदार थे, लेकिन जिन लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई वे शायद सक्षम नहीं थे।

कन्हैया कुमार पर सीधा सवाल

कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार पर टिप्पणी करते हुए शौकीन ने कहा कि उन्हें जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी, क्योंकि वे पार्टी में इंचार्ज हैं। उन्होंने कहा, 'उनको क्लियर स्टैंड लेना चाहिए था और जमीन पर आकर देखना चाहिए था कि कौन मजबूत है, किसकी तैयारी अच्छी है। अगर वे ग्राउंड पर आकर चीजों को देखते तो शायद नतीजे अलग होते।'

राहुल गांधी और जेन-ज़ी कनेक्शन

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' पहल को लेकर शौकीन ने कहा कि विद्यार्थी राहुल गांधी से जुड़ाव महसूस करते हैं और वे छात्रों की आवाज बन गए हैं। उन्होंने जोड़ा कि इस मुहिम को जमीनी स्तर तक ले जाना जरूरी है और निचले स्तर के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी उठानी होगी। शौकीन ने यह भी कहा कि 'जेन-जी' यानी नई पीढ़ी तभी कनेक्शन महसूस करती है जब उनके साथ वास्तविक बॉन्डिंग हो और उनके बीच रहकर काम किया जाए। उन्होंने इस चुनाव से सीखे सबक को रेखांकित करते हुए कहा कि जिसके साथ छात्र हों, जीत उसी की होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह कांग्रेस की उस पुरानी बीमारी को उजागर करते हैं जहाँ केंद्रीय नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ता के बीच की खाई पार्टी को चुनाव दर चुनाव महंगी पड़ती है। कन्हैया कुमार का नाम लेकर जिम्मेदारी तय करने की कोशिश यह भी बताती है कि छात्र राजनीति अब केवल 'सहानुभूति' के भरोसे नहीं चलती — जवाबदेही की माँग तेज हो रही है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपांशु शौकीन कौन हैं और उन्होंने डूसू का कौन-सा पद जीता?
दीपांशु शौकीन ने 2026 के दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपाध्यक्ष पद जीता। उन्होंने अपनी जीत का श्रेय छात्रों को दिया और किसी पार्टी के समर्थन के बिना यह जीत हासिल की।
एनएसयूआई की हार के लिए दीपांशु शौकीन ने क्या कारण बताए?
दीपांशु शौकीन के अनुसार एनएसयूआई की हार के पीछे जमीनी हकीकत से कटे होने और कमजोर आंतरिक प्रबंधन की बड़ी भूमिका रही। उनका कहना था कि जिन लोगों को संगठन की जिम्मेदारी दी गई थी वे शायद उसके लिए पर्याप्त सक्षम नहीं थे।
दीपांशु शौकीन ने कन्हैया कुमार के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि कन्हैया कुमार को पार्टी इंचार्ज के रूप में जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी और जमीन पर आकर यह देखना चाहिए था कि कौन-सा उम्मीदवार वास्तव में मजबूत है। उनके अनुसार, यदि ऐसा होता तो चुनावी नतीजे शायद अलग होते।
सत्य निकेतन हादसे में कितने छात्रों की जान गई और शौकीन ने क्या कहा?
सत्य निकेतन की घटना में पाँच छात्रों की मौत हुई। दीपांशु शौकीन ने इसके लिए प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया और माँग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन में जिम्मेदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' पहल पर दीपांशु का क्या मत है?
दीपांशु शौकीन ने कहा कि छात्र राहुल गांधी से जुड़ाव महसूस करते हैं, लेकिन इस पहल को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से ले जाना जरूरी है। उनके अनुसार, निचले स्तर के कार्यकर्ता अक्सर 'बैरियर' बन जाते हैं और छात्रों की आवाज ऊपर तक नहीं पहुँच पाती।
राष्ट्र प्रेस
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