डूसू उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन बोले — जीत छात्रों की, एनएसयूआई और कन्हैया कुमार पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपाध्यक्ष पद जीतने वाले दीपांशु शौकीन ने 21 सितंबर 2026 को अपनी जीत का संपूर्ण श्रेय विश्वविद्यालय के छात्रों को दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जीत किसी पार्टी की नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों की है जिन्होंने उन पर भरोसा जताकर मजबूती से चुनाव लड़वाया। साथ ही उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) की चुनावी रणनीति और आंतरिक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए।
जीत का श्रेय और सत्य निकेतन हादसे पर चिंता
दीपांशु शौकीन ने कहा, 'दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने मेरी मदद की, मजबूती से चुनाव लड़वाया और मुझ पर भरोसा जताया — इसलिए इस जीत का श्रेय छात्रों को जाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि सत्य निकेतन की बड़ी घटना में प्रशासन की लापरवाही के चलते पाँच छात्रों की जान चली गई। उनका कहना था कि प्रशासन में जिम्मेदारी और पारदर्शिता होना अनिवार्य है।
एनएसयूआई की हार पर विश्लेषण
एनएसयूआई की पराजय पर शौकीन ने कहा, 'जमीनी हकीकत को देखते हुए निर्णय लिए जाते तो शायद परिणाम अलग होते।' उनके अनुसार, विद्यार्थी उन्हीं को समर्थन देते हैं जो उनके बीच रहकर उनकी बात रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों के हाथ में संगठन की पूरी मैनेजमेंट थी — चाहे वे पार्टी प्रभारी हों या अन्य जिम्मेदार लोग — उन्हें आंतरिक राजनीति को बेहतर ढंग से संभालना चाहिए था।
अध्यक्ष पद की चर्चा पर सफाई
एनएसयूआई की ओर से उन्हें अध्यक्ष पद पर लड़वाए जाने की अटकलों पर दीपांशु ने कहा कि यह कभी पुष्ट नहीं हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया, 'निर्दलीय तीन उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे और एनएसयूआई का नाम पहले ही तय हो चुका था।' उनका तर्क था कि यदि योग्यता के आधार पर निर्णय होता तो वे एक मजबूत दावेदार थे, लेकिन जिन लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई वे शायद सक्षम नहीं थे।
कन्हैया कुमार पर सीधा सवाल
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार पर टिप्पणी करते हुए शौकीन ने कहा कि उन्हें जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी, क्योंकि वे पार्टी में इंचार्ज हैं। उन्होंने कहा, 'उनको क्लियर स्टैंड लेना चाहिए था और जमीन पर आकर देखना चाहिए था कि कौन मजबूत है, किसकी तैयारी अच्छी है। अगर वे ग्राउंड पर आकर चीजों को देखते तो शायद नतीजे अलग होते।'
राहुल गांधी और जेन-ज़ी कनेक्शन
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' पहल को लेकर शौकीन ने कहा कि विद्यार्थी राहुल गांधी से जुड़ाव महसूस करते हैं और वे छात्रों की आवाज बन गए हैं। उन्होंने जोड़ा कि इस मुहिम को जमीनी स्तर तक ले जाना जरूरी है और निचले स्तर के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी उठानी होगी। शौकीन ने यह भी कहा कि 'जेन-जी' यानी नई पीढ़ी तभी कनेक्शन महसूस करती है जब उनके साथ वास्तविक बॉन्डिंग हो और उनके बीच रहकर काम किया जाए। उन्होंने इस चुनाव से सीखे सबक को रेखांकित करते हुए कहा कि जिसके साथ छात्र हों, जीत उसी की होती है।