डूसू उपाध्यक्ष बने निर्दलीय दीपांशु शौकीन, 30,615 वोटों से जीत; सत्य निकेतन पीड़ितों को इंसाफ का वादा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2026 में 19 सितंबर को उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बड़े दलों के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए शौकीन ने अपनी जीत के बाद स्पष्ट किया कि वह सत्य निकेतन हादसे में जान गँवाने वाले छात्रों के लिए न्याय की लड़ाई अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखेंगे।
मुख्य घटनाक्रम
उपाध्यक्ष पद के लिए कुल 60,854 वोट पड़े। दीपांशु शौकीन को 30,615, इशू मौर्या को 16,910, वीर चतरथ को 4,313 और अरण्य सिंह राठौड़ को 2,274 मत मिले। शौकीन की यह जीत महत्त्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि डूसू के शेष तीन प्रमुख पद — अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव — अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जीते।
दीपांशु शौकीन की प्रतिक्रिया
जीत के बाद शौकीन ने कहा, "बहुत अच्छा लग रहा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने मुझपर भरोसा जताया और उन भरोसे पर मैं खरा उतरूंगा। उनकी हकों की लड़ाई लड़ूंगा। सत्य निकेतन हादसे में जिन छात्रों की जान गई है, उनके लिए इंसाफ की मांग रखूंगा। दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए हॉस्टल की मांग रखूंगा और जो भ्रष्टाचार यहां डीयू के सिस्टम में हो रहा है, उसे ठीक करने की कोशिश करूंगा।" उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरा संघर्ष छात्रों के हित में लड़ा गया था।
एबीवीपी का तीन पदों पर कब्जा
डूसू के अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के यश डबास ने जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद के लिए कुल 60,845 वोट पड़े; डबास को 24,576, एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 22,523, अनन्या रतूड़ी को 5,377 और नोटा को 4,310 वोट मिले।
सचिव पद पर एबीवीपी की रिया छाबड़ी ने जीत हासिल की। कुल 60,776 वोट में छाबड़ी को 21,650, एनएसयूआई की नम्रता चौधरी को 14,869, पंकज कुमार को 7,639 और नोटा को 7,884 मत मिले।
संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के लक्ष्यराज सिंह विजयी रहे। इस पद के लिए कुल 60,825 वोट पड़े; लक्ष्यराज को 16,615, विशेष यादव को 15,778, एनएसयूआई के गोपाल चौधरी को 15,206 और नोटा को 7,389 वोट मिले।
चुनाव परिणामों का महत्त्व
गौरतलब है कि डूसू चुनाव सामान्यतः एबीवीपी और राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) के बीच सीधे मुकाबले के रूप में जाने जाते हैं। ऐसे में एक निर्दलीय उम्मीदवार का उपाध्यक्ष पद पर 30 हजार से अधिक वोटों से जीतना असाधारण माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब सत्य निकेतन हादसा परिसर में चर्चा का विषय बना हुआ है और छात्रों में आक्रोश बना हुआ था। शौकीन ने इसी मुद्दे को अपने चुनाव अभियान की धुरी बनाया, जो स्पष्ट रूप से मतदाताओं को प्रभावित करने में सफल रहा।
आगे क्या होगा
नवनिर्वाचित डूसू की नई टीम जल्द ही कार्यभार संभालेगी। दीपांशु शौकीन के अनुसार उनकी प्राथमिकताओं में सत्य निकेतन पीड़ितों के लिए न्याय, छात्रावास की माँग और विश्वविद्यालय प्रशासन में पारदर्शिता शामिल हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि एबीवीपी के बहुमत वाली डूसू में एक निर्दलीय उपाध्यक्ष अपना एजेंडा कितना आगे ले जा पाते हैं।