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डूसू उपाध्यक्ष बने निर्दलीय दीपांशु शौकीन, 30,615 वोटों से जीत; सत्य निकेतन पीड़ितों को इंसाफ का वादा

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डूसू उपाध्यक्ष बने निर्दलीय दीपांशु शौकीन, 30,615 वोटों से जीत; सत्य निकेतन पीड़ितों को इंसाफ का वादा

सारांश

डूसू चुनाव में इस बार सबसे बड़ा उलटफेर हुआ — एक निर्दलीय उम्मीदवार ने उपाध्यक्ष पद पर 30,615 वोटों से जीत दर्ज की। दीपांशु शौकीन ने सत्य निकेतन हादसे को मुद्दा बनाया और छात्रों ने उनपर भरोसा जताया, जबकि एबीवीपी ने बाकी तीन पद जीते।

मुख्य बातें

निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने डूसू उपाध्यक्ष पद पर 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।
उपाध्यक्ष पद के लिए कुल 60,854 वोट पड़े; दूसरे स्थान पर रहे इशू मौर्या को 16,910 वोट मिले।
एबीवीपी के यश डबास (अध्यक्ष), रिया छाबड़ी (सचिव) और लक्ष्यराज सिंह (संयुक्त सचिव) ने शेष तीन पद जीते।
शौकीन ने सत्य निकेतन हादसे के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने, हॉस्टल सुविधा और भ्रष्टाचार उन्मूलन को प्राथमिकता घोषित किया।
अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले, जो डबास के 24,576 से पीछे रहे।

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2026 में 19 सितंबर को उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बड़े दलों के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए शौकीन ने अपनी जीत के बाद स्पष्ट किया कि वह सत्य निकेतन हादसे में जान गँवाने वाले छात्रों के लिए न्याय की लड़ाई अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखेंगे।

मुख्य घटनाक्रम

उपाध्यक्ष पद के लिए कुल 60,854 वोट पड़े। दीपांशु शौकीन को 30,615, इशू मौर्या को 16,910, वीर चतरथ को 4,313 और अरण्य सिंह राठौड़ को 2,274 मत मिले। शौकीन की यह जीत महत्त्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि डूसू के शेष तीन प्रमुख पद — अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव — अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जीते।

दीपांशु शौकीन की प्रतिक्रिया

जीत के बाद शौकीन ने कहा, "बहुत अच्छा लग रहा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने मुझपर भरोसा जताया और उन भरोसे पर मैं खरा उतरूंगा। उनकी हकों की लड़ाई लड़ूंगा। सत्य निकेतन हादसे में जिन छात्रों की जान गई है, उनके लिए इंसाफ की मांग रखूंगा। दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए हॉस्टल की मांग रखूंगा और जो भ्रष्टाचार यहां डीयू के सिस्टम में हो रहा है, उसे ठीक करने की कोशिश करूंगा।" उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरा संघर्ष छात्रों के हित में लड़ा गया था।

एबीवीपी का तीन पदों पर कब्जा

डूसू के अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के यश डबास ने जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद के लिए कुल 60,845 वोट पड़े; डबास को 24,576, एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 22,523, अनन्या रतूड़ी को 5,377 और नोटा को 4,310 वोट मिले।

सचिव पद पर एबीवीपी की रिया छाबड़ी ने जीत हासिल की। कुल 60,776 वोट में छाबड़ी को 21,650, एनएसयूआई की नम्रता चौधरी को 14,869, पंकज कुमार को 7,639 और नोटा को 7,884 मत मिले।

संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के लक्ष्यराज सिंह विजयी रहे। इस पद के लिए कुल 60,825 वोट पड़े; लक्ष्यराज को 16,615, विशेष यादव को 15,778, एनएसयूआई के गोपाल चौधरी को 15,206 और नोटा को 7,389 वोट मिले।

चुनाव परिणामों का महत्त्व

गौरतलब है कि डूसू चुनाव सामान्यतः एबीवीपी और राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) के बीच सीधे मुकाबले के रूप में जाने जाते हैं। ऐसे में एक निर्दलीय उम्मीदवार का उपाध्यक्ष पद पर 30 हजार से अधिक वोटों से जीतना असाधारण माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब सत्य निकेतन हादसा परिसर में चर्चा का विषय बना हुआ है और छात्रों में आक्रोश बना हुआ था। शौकीन ने इसी मुद्दे को अपने चुनाव अभियान की धुरी बनाया, जो स्पष्ट रूप से मतदाताओं को प्रभावित करने में सफल रहा।

आगे क्या होगा

नवनिर्वाचित डूसू की नई टीम जल्द ही कार्यभार संभालेगी। दीपांशु शौकीन के अनुसार उनकी प्राथमिकताओं में सत्य निकेतन पीड़ितों के लिए न्याय, छात्रावास की माँग और विश्वविद्यालय प्रशासन में पारदर्शिता शामिल हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि एबीवीपी के बहुमत वाली डूसू में एक निर्दलीय उपाध्यक्ष अपना एजेंडा कितना आगे ले जा पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो छात्र विकल्प तलाश लेते हैं। असली सवाल यह है कि एबीवीपी बहुल डूसू कार्यकारिणी में एक अकेला निर्दलीय उपाध्यक्ष सत्य निकेतन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर व्यवस्था से कितना टकरा पाएगा — और क्या यह जीत एक प्रवृत्ति की शुरुआत है या केवल एक अपवाद।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डूसू चुनाव 2026 में उपाध्यक्ष पद किसने जीता?
निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने डूसू उपाध्यक्ष पद जीता। उन्हें कुल 60,854 में से 30,615 वोट मिले, जो दूसरे स्थान पर रहे इशू मौर्या के 16,910 वोटों से काफी अधिक थे।
दीपांशु शौकीन ने जीत के बाद क्या वादे किए?
शौकीन ने सत्य निकेतन हादसे में जान गँवाने वाले छात्रों के लिए न्याय की माँग करने, दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रावास सुविधाएँ दिलाने और डीयू प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार दूर करने का वादा किया।
सत्य निकेतन हादसा क्या है जिसका ज़िक्र शौकीन ने किया?
सत्य निकेतन हादसा दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर क्षेत्र में घटित वह घटना है जिसमें छात्रों की जान गई। यह मुद्दा छात्रों में आक्रोश का कारण बना और शौकीन ने इसे अपने चुनाव अभियान का केंद्रीय मुद्दा बनाया।
डूसू 2026 के बाकी तीन पद किसने जीते?
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने तीनों पद जीते — अध्यक्ष पद पर यश डबास (24,576 वोट), सचिव पद पर रिया छाबड़ी (21,650 वोट) और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह (16,615 वोट)।
एनएसयूआई का डूसू 2026 में कैसा प्रदर्शन रहा?
एनएसयूआई कोई भी पद जीतने में सफल नहीं रही। अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले, जो एबीवीपी के यश डबास के 24,576 वोटों से कम रहे। सचिव और संयुक्त सचिव पद पर भी एनएसयूआई के उम्मीदवार पीछे रहे।
राष्ट्र प्रेस
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