24 जुलाई 2026
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ईडी ने कॉलोनाइजर अजय सहगल के खिलाफ मोहाली कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की

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ईडी ने कॉलोनाइजर अजय सहगल के खिलाफ मोहाली कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की

सारांश

ईडी ने पंजाब के कॉलोनाइजर अजय सहगल पर शिकंजा कसा — 'सनटेक सिटी' परियोजना में 108.58 एकड़ कृषि भूमि के लिए फर्जी सहमति पत्रों से सीएलयू हासिल कर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप। मोहाली स्पेशल कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर, भाइयों का पारिवारिक नेटवर्क भी जांच के दायरे में।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 22 जुलाई को मोहाली की स्पेशल कोर्ट में कॉलोनाइजर अजय सहगल के खिलाफ पीएमएलए के तहत प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की।
'सनटेक सिटी' परियोजना में 108.58 एकड़ कृषि भूमि के लिए फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर सीएलयू और रेरा पंजीकरण हासिल करने का आरोप।
जीएमएडीए ने इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर परियोजना का लाइसेंस जारी किया था।
ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित भूमि हस्तांतरित नहीं की गई; रेरा पंजीकरण और कंप्लीशन सर्टिफिकेट से पहले ही इकाइयाँ बेची गईं।
परियोजना के विकास अधिकार सहगल के भाइयों — संजय सहगल और अनिल सहगल — की कंपनी एबीएस टाउनशिप्स को सौंपे गए।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 22 जुलाई को मोहाली की स्पेशल कोर्ट में पंजाब के कॉलोनाइजर अजय सहगल के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की। आरोप है कि सहगल ने फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की मंजूरी हासिल कर अपराध से अर्जित धन को वैध बनाया — यानी मनी लॉन्ड्रिंग की।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच पंजाब पुलिस द्वारा सहगल और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई।

जांच में सामने आया कि इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड के सेक्रेटरी के रूप में सहगल ने 'सनटेक सिटी' परियोजना के तहत 108.58 एकड़ कृषि भूमि को रिहायशी और कमर्शियल प्लॉट में बदलने के लिए पंजाब के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को फर्जी सहमति पत्र सौंपे।

फर्जी दस्तावेजों से मिली मंजूरियाँ

इन्हीं फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर प्राप्त सीएलयू पर ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमएडीए) ने परियोजना के विकास के लिए लाइसेंस जारी किया। इतना ही नहीं, ईडी के अनुसार, सहगल ने इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट (रेरा) के तहत परियोजना का पंजीकरण भी करा लिया।

गौरतलब है कि बिल्डिंग प्लान और सीएलयू को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट क्षेत्र के प्रावधान के बिना ही मंजूरी दी गई, जबकि बिल्डिंग प्लान नियम 3.12.2 (इंटरनल डेवलपमेंट वर्क्स) के तहत यह अनिवार्य है।

नियमों का उल्लंघन और खरीदारों से धोखाधड़ी

जांच में यह भी उजागर हुआ कि लाइसेंस की शर्तों के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित भूमि को जीएमएडीए के एस्टेट ऑफिसर को हस्तांतरित नहीं किया गया। इसके अलावा, रेरा पंजीकरण से पहले ही परियोजना में इकाइयाँ बेची जाने लगीं और जीएमएडीए से कंप्लीशन सर्टिफिकेट (आंशिक या पूर्ण) प्राप्त किए बिना ही भूमि मालिकों को कब्जा सौंपा जाने लगा।

पारिवारिक कनेक्शन और डेवलपमेंट अधिकारों का हस्तांतरण

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड और एबीएस टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत परियोजना के समस्त विकास और बिक्री अधिकार एबीएस टाउनशिप को सौंप दिए गए। उल्लेखनीय है कि एबीएस टाउनशिप के निदेशक सहगल के भाई संजय सहगल और अनिल सहगल थे।

आगे की कार्रवाई

मोहाली की स्पेशल कोर्ट में दायर यह प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट पीएमएलए के तहत ईडी की औपचारिक अभियोजन प्रक्रिया का हिस्सा है। अब अदालत आगे की सुनवाई तय करेगी। यह मामला पंजाब के रियल एस्टेट क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के जरिये नियामकीय मंजूरियाँ हासिल करने की प्रवृत्ति को उजागर करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने अजय सहगल के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने 22 जुलाई को मोहाली की स्पेशल कोर्ट में अजय सहगल के खिलाफ पीएमएलए के तहत प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। आरोप है कि उन्होंने 'सनटेक सिटी' परियोजना में फर्जी सहमति पत्रों से सीएलयू हासिल कर मनी लॉन्ड्रिंग की।
सनटेक सिटी प्रोजेक्ट में क्या गड़बड़ी पाई गई?
जांच में पाया गया कि 108.58 एकड़ कृषि भूमि को रिहायशी और कमर्शियल प्लॉट में बदलने के लिए पंजाब के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को फर्जी सहमति पत्र सौंपे गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जीएमएडीए से लाइसेंस और रेरा पंजीकरण भी हासिल किया गया।
क्या खरीदारों को भी नुकसान हुआ?
हाँ, रेरा पंजीकरण से पहले ही परियोजना में इकाइयाँ बेची गईं और जीएमएडीए से कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिए बिना ही कब्जा सौंपा जाने लगा। इसके अलावा, ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित भूमि भी नियमानुसार हस्तांतरित नहीं की गई।
एबीएस टाउनशिप्स का इस मामले से क्या संबंध है?
इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड और एबीएस टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक समझौते के तहत परियोजना के सभी विकास और बिक्री अधिकार एबीएस टाउनशिप को सौंपे गए थे। एबीएस टाउनशिप के निदेशक अजय सहगल के भाई संजय सहगल और अनिल सहगल थे।
ईडी की यह जांच किस आधार पर शुरू हुई थी?
ईडी ने पंजाब पुलिस द्वारा अजय सहगल और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर पीएमएलए, 2002 के तहत जांच शुरू की थी। जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के साक्ष्य मिलने पर अब मोहाली की स्पेशल कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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