ईडी ने कॉलोनाइजर अजय सहगल के खिलाफ मोहाली कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 22 जुलाई को मोहाली की स्पेशल कोर्ट में पंजाब के कॉलोनाइजर अजय सहगल के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की। आरोप है कि सहगल ने फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की मंजूरी हासिल कर अपराध से अर्जित धन को वैध बनाया — यानी मनी लॉन्ड्रिंग की।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जांच पंजाब पुलिस द्वारा सहगल और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई।
जांच में सामने आया कि इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड के सेक्रेटरी के रूप में सहगल ने 'सनटेक सिटी' परियोजना के तहत 108.58 एकड़ कृषि भूमि को रिहायशी और कमर्शियल प्लॉट में बदलने के लिए पंजाब के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को फर्जी सहमति पत्र सौंपे।
फर्जी दस्तावेजों से मिली मंजूरियाँ
इन्हीं फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर प्राप्त सीएलयू पर ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमएडीए) ने परियोजना के विकास के लिए लाइसेंस जारी किया। इतना ही नहीं, ईडी के अनुसार, सहगल ने इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट (रेरा) के तहत परियोजना का पंजीकरण भी करा लिया।
गौरतलब है कि बिल्डिंग प्लान और सीएलयू को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट क्षेत्र के प्रावधान के बिना ही मंजूरी दी गई, जबकि बिल्डिंग प्लान नियम 3.12.2 (इंटरनल डेवलपमेंट वर्क्स) के तहत यह अनिवार्य है।
नियमों का उल्लंघन और खरीदारों से धोखाधड़ी
जांच में यह भी उजागर हुआ कि लाइसेंस की शर्तों के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित भूमि को जीएमएडीए के एस्टेट ऑफिसर को हस्तांतरित नहीं किया गया। इसके अलावा, रेरा पंजीकरण से पहले ही परियोजना में इकाइयाँ बेची जाने लगीं और जीएमएडीए से कंप्लीशन सर्टिफिकेट (आंशिक या पूर्ण) प्राप्त किए बिना ही भूमि मालिकों को कब्जा सौंपा जाने लगा।
पारिवारिक कनेक्शन और डेवलपमेंट अधिकारों का हस्तांतरण
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड और एबीएस टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत परियोजना के समस्त विकास और बिक्री अधिकार एबीएस टाउनशिप को सौंप दिए गए। उल्लेखनीय है कि एबीएस टाउनशिप के निदेशक सहगल के भाई संजय सहगल और अनिल सहगल थे।
आगे की कार्रवाई
मोहाली की स्पेशल कोर्ट में दायर यह प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट पीएमएलए के तहत ईडी की औपचारिक अभियोजन प्रक्रिया का हिस्सा है। अब अदालत आगे की सुनवाई तय करेगी। यह मामला पंजाब के रियल एस्टेट क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के जरिये नियामकीय मंजूरियाँ हासिल करने की प्रवृत्ति को उजागर करता है।