फर्जी CLU घोटाला: ईडी ने अजय सहगल पर मोहाली में PMLA के तहत अभियोग शिकायत दर्ज की, ₹348 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने 20 जुलाई 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत विशेष न्यायालय (पीएमएलए), मोहाली में अजय सहगल के विरुद्ध अभियोग शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की है। सहगल पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) हासिल कर ₹348 करोड़ की अपराध आय अर्जित की और उसे छुपाया। यह कार्रवाई पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच की परिणति है।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे रची गई धोखाधड़ी की साजिश
जांच के अनुसार, इंडियन को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड के सचिव अजय सहगल ने नगर एवं ग्रामीण योजना विभाग के समक्ष जाली सहमति पत्र प्रस्तुत किए। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 108.58 एकड़ कृषि भूमि को आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में बदलने की अनुमति ली गई और 'सनटेक सिटी' नामक रियल एस्टेट परियोजना खड़ी की गई।
ईडी की जांच में सामने आया कि इन्हीं जाली दस्तावेजों के आधार पर ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमएडीए) ने परियोजना के लिए लाइसेंस जारी किया और रेरा (RERA) पंजीकरण भी प्राप्त किया गया। इतना ही नहीं, रेरा पंजीकरण से पहले ही इकाइयों की बिक्री शुरू कर दी गई और जीएमएडीए से पूर्णता प्रमाण पत्र लिए बिना खरीदारों को कब्जा सौंपा जाता रहा।
पारिवारिक नेटवर्क और एबीएस टाउनशिप की भूमिका
जांच में एक जटिल पारिवारिक ढाँचे का खुलासा हुआ। इंडियन को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड और वीआरएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड (अब एबीएस टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड) के बीच एक संयुक्त विकास समझौता (जेडीए) किया गया था। इसके तहत परियोजना के समस्त विकास और बिक्री अधिकार एबीएस टाउनशिप को सौंप दिए गए, जिसके निदेशक अजय सहगल के भाई संजय सहगल और अनिल सहगल थे।
एबीएस टाउनशिप ने इसके बाद ला कैनेला फेज 1 और जिला 7 को रेरा के साथ पंजीकृत कराकर इकाइयाँ बेचीं। जांच के अनुसार, ला कैनेला फेज 2 में भी बिना किसी रेरा अनुमोदन के आवासीय इकाइयाँ बेची गईं। इसके अलावा, लाइसेंस की शर्तों के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित भूमि जीएमएडीए के एस्टेट अधिकारी को हस्तांतरित नहीं की गई।
नियामकीय चूक: 2020 से मिल रही थीं शिकायतें
ईडी की जांच में एक गंभीर प्रशासनिक विफलता भी सामने आई है। जांच के अनुसार, जीएमएडीए को वर्ष 2020 से ही जाली सहमति पत्रों के उपयोग से संबंधित शिकायतें मिलनी शुरू हो गई थीं। इसके बावजूद आरोपियों के विरुद्ध कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे उन्हें अवैध अनुमोदन के बल पर इकाइयाँ बेचकर अपराध की आय अर्जित करने का अवसर मिलता रहा।
यह ऐसे समय में और भी गंभीर हो जाता है जब जांच में यह भी उजागर हुआ कि बिल्डिंग प्लान और सीएलयू को बिल्डिंग प्लान नियम 3.12.2 के अनिवार्य प्रावधान — ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र — के बिना ही अवैध रूप से मंजूरी दे दी गई थी। बाद में पंजाब क्षेत्रीय और नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा 85 के तहत केवल आंशिक सीएलयू रद्द किया गया।
तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती
ईडी ने मई और जून 2026 में पीएमएलए की धारा 17 के तहत आरोपी व्यक्तियों से जुड़े कई परिसरों और लॉकरों पर छापेमारी की। इन तलाशियों में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और ₹30.98 लाख की बेहिसाब नकदी बरामद की गई।
जांच में अजय सहगल को अपराध की आय उत्पन्न करने और छुपाने का मुख्य सूत्रधार पाए जाने के बाद उन्हें 22 मई 2026 को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया।
अपराध से प्राप्त आय और आगे की जांच
ईडी की जांच में अपराध से प्राप्त कुल आय लगभग ₹348 करोड़ आंकी गई है — जिसमें ₹212.58 करोड़ की बिक्री और ₹135.41 करोड़ का अनबिका माल शामिल है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने जानबूझकर इस आय को अर्जित किया, अपने पास रखा, छुपाया और उसका उपयोग किया। जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे संभव हैं।