22 जुलाई 2026
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फर्जी CLU घोटाला: ईडी ने अजय सहगल पर मोहाली में PMLA के तहत अभियोग शिकायत दर्ज की, ₹348 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

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फर्जी CLU घोटाला: ईडी ने अजय सहगल पर मोहाली में PMLA के तहत अभियोग शिकायत दर्ज की, ₹348 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

सारांश

पंजाब के फर्जी CLU घोटाले में ईडी ने अजय सहगल के खिलाफ मोहाली न्यायालय में PMLA के तहत अभियोग शिकायत दर्ज की है। 108.58 एकड़ कृषि भूमि को जाली दस्तावेजों से आवासीय-व्यावसायिक भूखंड में बदला गया। ₹348 करोड़ की अपराध आय का अनुमान; सहगल 22 मई 2026 से गिरफ्तार हैं।

मुख्य बातें

ईडी ने 20 जुलाई 2026 को विशेष न्यायालय (पीएमएलए), मोहाली में अजय सहगल के खिलाफ अभियोग शिकायत दाखिल की।
फर्जी सहमति पत्रों के जरिये 108.58 एकड़ कृषि भूमि को 'सनटेक सिटी' परियोजना के लिए आवासीय-व्यावसायिक उपयोग में बदला गया।
अपराध से प्राप्त कुल आय लगभग ₹348 करोड़ — ₹212.58 करोड़ बिक्री और ₹135.41 करोड़ अनबिका माल।
अजय सहगल के भाई संजय सहगल और अनिल सहगल की कंपनी एबीएस टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड को विकास व बिक्री अधिकार सौंपे गए।
जीएमएडीए को 2020 से शिकायतें मिल रही थीं, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
छापेमारी में ₹30.98 लाख नकदी, दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त; अजय सहगल 22 मई 2026 से गिरफ्तार।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने 20 जुलाई 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत विशेष न्यायालय (पीएमएलए), मोहाली में अजय सहगल के विरुद्ध अभियोग शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की है। सहगल पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) हासिल कर ₹348 करोड़ की अपराध आय अर्जित की और उसे छुपाया। यह कार्रवाई पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच की परिणति है।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे रची गई धोखाधड़ी की साजिश

जांच के अनुसार, इंडियन को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड के सचिव अजय सहगल ने नगर एवं ग्रामीण योजना विभाग के समक्ष जाली सहमति पत्र प्रस्तुत किए। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 108.58 एकड़ कृषि भूमि को आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में बदलने की अनुमति ली गई और 'सनटेक सिटी' नामक रियल एस्टेट परियोजना खड़ी की गई।

ईडी की जांच में सामने आया कि इन्हीं जाली दस्तावेजों के आधार पर ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमएडीए) ने परियोजना के लिए लाइसेंस जारी किया और रेरा (RERA) पंजीकरण भी प्राप्त किया गया। इतना ही नहीं, रेरा पंजीकरण से पहले ही इकाइयों की बिक्री शुरू कर दी गई और जीएमएडीए से पूर्णता प्रमाण पत्र लिए बिना खरीदारों को कब्जा सौंपा जाता रहा।

पारिवारिक नेटवर्क और एबीएस टाउनशिप की भूमिका

जांच में एक जटिल पारिवारिक ढाँचे का खुलासा हुआ। इंडियन को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड और वीआरएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड (अब एबीएस टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड) के बीच एक संयुक्त विकास समझौता (जेडीए) किया गया था। इसके तहत परियोजना के समस्त विकास और बिक्री अधिकार एबीएस टाउनशिप को सौंप दिए गए, जिसके निदेशक अजय सहगल के भाई संजय सहगल और अनिल सहगल थे।

एबीएस टाउनशिप ने इसके बाद ला कैनेला फेज 1 और जिला 7 को रेरा के साथ पंजीकृत कराकर इकाइयाँ बेचीं। जांच के अनुसार, ला कैनेला फेज 2 में भी बिना किसी रेरा अनुमोदन के आवासीय इकाइयाँ बेची गईं। इसके अलावा, लाइसेंस की शर्तों के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित भूमि जीएमएडीए के एस्टेट अधिकारी को हस्तांतरित नहीं की गई।

नियामकीय चूक: 2020 से मिल रही थीं शिकायतें

ईडी की जांच में एक गंभीर प्रशासनिक विफलता भी सामने आई है। जांच के अनुसार, जीएमएडीए को वर्ष 2020 से ही जाली सहमति पत्रों के उपयोग से संबंधित शिकायतें मिलनी शुरू हो गई थीं। इसके बावजूद आरोपियों के विरुद्ध कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे उन्हें अवैध अनुमोदन के बल पर इकाइयाँ बेचकर अपराध की आय अर्जित करने का अवसर मिलता रहा।

यह ऐसे समय में और भी गंभीर हो जाता है जब जांच में यह भी उजागर हुआ कि बिल्डिंग प्लान और सीएलयू को बिल्डिंग प्लान नियम 3.12.2 के अनिवार्य प्रावधान — ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र — के बिना ही अवैध रूप से मंजूरी दे दी गई थी। बाद में पंजाब क्षेत्रीय और नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा 85 के तहत केवल आंशिक सीएलयू रद्द किया गया।

तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती

ईडी ने मई और जून 2026 में पीएमएलए की धारा 17 के तहत आरोपी व्यक्तियों से जुड़े कई परिसरों और लॉकरों पर छापेमारी की। इन तलाशियों में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और ₹30.98 लाख की बेहिसाब नकदी बरामद की गई।

जांच में अजय सहगल को अपराध की आय उत्पन्न करने और छुपाने का मुख्य सूत्रधार पाए जाने के बाद उन्हें 22 मई 2026 को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया।

अपराध से प्राप्त आय और आगे की जांच

ईडी की जांच में अपराध से प्राप्त कुल आय लगभग ₹348 करोड़ आंकी गई है — जिसमें ₹212.58 करोड़ की बिक्री और ₹135.41 करोड़ का अनबिका माल शामिल है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने जानबूझकर इस आय को अर्जित किया, अपने पास रखा, छुपाया और उसका उपयोग किया। जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। रेरा और नगर नियोजन नियमों की आड़ में जब जाली दस्तावेजों से लाइसेंस, अनुमोदन और पंजीकरण हासिल होते रहें, तो सवाल केवल आरोपी पर नहीं, बल्कि उन अधिकारियों पर भी उठता है जिन्होंने इन अनुमोदनों पर हस्ताक्षर किए। ₹348 करोड़ की अनुमानित अपराध आय और ईडब्ल्यूएस भूमि का हस्तांतरण न होना यह भी बताता है कि इस घोटाले की कीमत सबसे पहले समाज के कमजोर वर्ग ने चुकाई। जांच का दायरा जब तक नियामकीय मिलीभगत तक नहीं पहुँचता, तब तक यह कार्रवाई अधूरी मानी जाएगी।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फर्जी CLU घोटाले में ईडी ने अजय सहगल के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
ईडी के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने 20 जुलाई 2026 को विशेष न्यायालय (पीएमएलए), मोहाली में अजय सहगल के विरुद्ध अभियोग शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की है। यह शिकायत फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर सीएलयू प्राप्त कर ₹348 करोड़ की अपराध आय अर्जित करने और उसे छुपाने के आरोप में दर्ज की गई है।
सनटेक सिटी रियल एस्टेट घोटाला क्या है?
सनटेक सिटी एक रियल एस्टेट परियोजना है जिसमें 108.58 एकड़ कृषि भूमि को जाली सहमति पत्रों के जरिये आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों में बदला गया। जीएमएडीए ने इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस जारी किया और रेरा पंजीकरण भी प्राप्त किया गया, जबकि रेरा अनुमोदन से पहले ही इकाइयों की बिक्री शुरू हो गई थी।
अजय सहगल को कब गिरफ्तार किया गया और उन पर क्या आरोप हैं?
अजय सहगल को 22 मई 2026 को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। उन पर आरोप है कि वे अपराध की आय उत्पन्न करने, उसे अपने पास रखने, छुपाने और उपयोग करने के मुख्य सूत्रधार थे — जो फर्जी दस्तावेजों, अवैध अनुमोदन और धोखाधड़ीपूर्ण रेरा पंजीकरण के जरिये हासिल की गई।
इस घोटाले में एबीएस टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड की क्या भूमिका है?
एबीएस टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व में वीआरएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड) को संयुक्त विकास समझौते के तहत परियोजना के सभी विकास और बिक्री अधिकार सौंपे गए थे। इस कंपनी के निदेशक अजय सहगल के भाई संजय सहगल और अनिल सहगल थे। कंपनी ने ला कैनेला फेज 1, जिला 7 में रेरा पंजीकरण के साथ और ला कैनेला फेज 2 में बिना रेरा अनुमोदन के इकाइयाँ बेचीं।
जीएमएडीए को शिकायतें कब से मिल रही थीं और क्या कार्रवाई हुई?
जांच के अनुसार, जीएमएडीए को वर्ष 2020 से ही जाली सहमति पत्रों के उपयोग की शिकायतें मिलनी शुरू हो गई थीं। इसके बावजूद आरोपियों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बाद में केवल आंशिक सीएलयू रद्द किया गया, जिससे आरोपियों को अपराध की आय अर्जित करने का मौका मिलता रहा।
राष्ट्र प्रेस
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