नगरपालिका भर्ती घोटाला: ईडी ने पूर्व मंत्री रथिन घोष को 25 मई तक फिर तलब किया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के नगरपालिका भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर सख्त कदम उठाते हुए राज्य की पूर्व ममता बनर्जी सरकार में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रहे रथिन घोष को दोबारा पूछताछ के लिए समन जारी किया है। एजेंसी ने उन्हें 25 मई की दोपहर तक कोलकाता के साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह मामला नगरपालिकाओं में नौकरी दिलाने के बदले कथित तौर पर करोड़ों रुपये वसूले जाने से जुड़ा है।
कौन हैं रथिन घोष
रथिन घोष उत्तर 24 परगना जिले की मध्यमग्राम विधानसभा सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। पूर्व ममता सरकार में उन्होंने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी संभाली थी।
पिछली पूछताछ और टालमटोल
ईडी इससे पहले भी कई बार रथिन घोष को इस मामले में पूछताछ के लिए बुला चुकी है। हर बार उन्होंने चुनाव प्रचार और राजनीतिक व्यस्तताओं का हवाला देकर उपस्थित होने से बचने की कोशिश की। आखिरकार 15 मई को वह ईडी कार्यालय पहुँचे, जहाँ उनसे करीब 10 घंटे तक पूछताछ की गई।
उस दिन ईडी दफ्तर में प्रवेश करते समय घोष ने मीडिया से कहा था कि उन्हें नहीं पता कि उन्हें क्यों बुलाया गया है। पूछताछ समाप्त होने के बाद बाहर निकलते वक्त उन्होंने कोई बयान नहीं दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी को इस घोटाले की भनक सबसे पहले तब लगी जब एजेंसी पश्चिम बंगाल स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तृणमूल कांग्रेस से संबद्ध प्रमोटर अयान शील के घर छापेमारी कर रही थी। उस जाँच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और सूचनाओं ने नगरपालिका भर्ती घोटाले की परतें खोलीं।
बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर इस मामले में समानांतर जाँच शुरू की। जैसे-जैसे दोनों एजेंसियों की जाँच आगे बढ़ी, कई प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं और पूर्व मंत्रियों के नाम सामने आने लगे।
सुजीत बोस पहले से हिरासत में
इसी मामले में पूर्व ममता बनर्जी सरकार में अग्निशमन मंत्री रहे और तीन बार विधायक रहे सुजीत बोस फिलहाल ईडी की हिरासत में हैं। बोस इस बार उत्तर 24 परगना जिले की अपनी परंपरागत बिधाननगर विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे।
आगे क्या होगा
रथिन घोष को 25 मई की समय-सीमा दी गई है। जाँच एजेंसियों की यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल में भर्ती घोटालों की श्रृंखला में एक और अहम पड़ाव है। ईडी और सीबीआई की जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।