ईवी, हाइड्रोजन और सीएनजी वाणिज्यिक वाहनों की आयु सीमा 5 साल बढ़ाने का प्रस्ताव, 20 साल तक हो सकती है सीमा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 18 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय परमिट प्रणाली के अंतर्गत आने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), हाइड्रोजन ईंधन आधारित वाहनों और सीएनजी (प्राकृतिक गैस) से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों की निर्धारित आयु सीमा में 5 वर्ष की अतिरिक्त बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। यदि यह प्रस्ताव अंतिम रूप लेता है, तो मौजूदा 12 वर्ष और 15 वर्ष की सीमाएं क्रमशः 17 वर्ष और 20 वर्ष हो जाएंगी।
मुख्य घटनाक्रम
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने हाल ही में एक मसौदा अधिसूचना जारी की है, जो केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), 1989 में संशोधन का प्रस्ताव करती है। इस मसौदे पर आम जनता, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। सुझावों पर विचार के बाद अंतिम नियम राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किए जाएंगे, जिसके बाद ही वे प्रभावी होंगे।
मुख्य प्रस्ताव नियम 88 में है, जो राष्ट्रीय परमिट प्रणाली के अंतर्गत वाहनों की आयु सीमा निर्धारित करता है। यह विस्तार सभी वाणिज्यिक वाहनों पर समान रूप से लागू नहीं होगा — यह केवल नियम 88 के दायरे में आने वाले बैटरी चालित, हाइड्रोजन ईंधन आधारित और सीएनजी वाहनों तक सीमित रहेगा।
राष्ट्रीय परमिट प्रणाली में डिजिटल बदलाव
मसौदा नियमों में राष्ट्रीय परमिट प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने का भी प्रस्ताव है। आवेदक अब एक बार में अधिकतम 5 वर्ष की अवधि के लिए राष्ट्रीय परमिट प्राधिकरण प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए ₹16,500 प्रति वर्ष का शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसे राष्ट्रीय परमिट खाते में जमा करना होगा।
फॉर्म-46 के माध्यम से आवेदन और फॉर्म-47 के तहत अनुमति प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने का प्रस्ताव है। इससे परिवहन क्षेत्र में कागजी कार्यवाही में कमी आएगी और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
अस्थायी पंजीकरण और दस्तावेज़ीकरण में बदलाव
मंत्रालय ने अस्थायी पंजीकरण से जुड़े नियमों में भी महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित किए हैं। यदि किसी वाहन का केवल चेसिस है और बॉडी अभी नहीं लगी है, तो उसका अस्थायी पंजीकरण जारी होने की तारीख से 6 महीने तक वैध रहेगा। यदि इस अवधि में बॉडी फिटमेंट पूरा नहीं हो पाता, तो पंजीकरण प्राधिकरण इसे हर बार 30 दिनों के लिए बढ़ा सकेगा।
विशेष रूप से अनुकूलित या किसी अन्य राज्य में पंजीकृत होने वाले पूर्ण निर्मित वाहनों के लिए अस्थायी पंजीकरण 45 दिनों तक वैध रहेगा। इसके अलावा, फॉर्म-20 में आधार से जुड़े मोबाइल नंबर का उल्लेख अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव है।
आरएंडडी और ट्रेड सर्टिफिकेट प्रावधान
सरकार ऑटोमोबाइल उद्योग में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहित करने के लिए पात्र ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को ट्रेड सर्टिफिकेट प्रावधानों के दायरे में लाने की तैयारी में है। इसके तहत केवल वे निर्माता पात्र होंगे जिन्हें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) से मान्यता प्राप्त होगी और जो नए उत्पादों के विकास में सक्रिय R&D कार्य कर रहे होंगे।
मसौदा नियमों में फॉर्म-48 में भी बदलाव का प्रस्ताव है — जिसके तहत वाहन के वैध पंजीकरण, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC), फिटनेस सर्टिफिकेट, लंबित चालान और पूर्व में प्राप्त राष्ट्रीय परमिट की जानकारी दर्ज करना अनिवार्य होगा।
आगे क्या होगा
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब सरकार वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ईंधन वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। गौरतलब है कि आयु सीमा में यह विस्तार हरित वाहनों को प्रोत्साहन देने की व्यापक नीति का हिस्सा प्रतीत होता है। हितधारकों की प्रतिक्रिया के बाद अंतिम नियम राजपत्र में प्रकाशित होंगे और तभी प्रभावी होंगे।