श्रीनगर कोर्ट ने पूर्व आतंकवादी गुलाम मोहि-उद-दीन डार को हत्या में उम्रकैद सुनाई, ₹50,000 जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
श्रीनगर की एक अदालत ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को हत्या के एक मामले में पूर्व आतंकवादी गुलाम मोहि-उद-दीन डार को उम्रकैद और ₹50,000 जुर्माने की सजा सुनाई। यह मामला मैसुमा पुलिस स्टेशन में वर्ष 2020 में दर्ज किया गया था और श्रीनगर पुलिस की सुदृढ़ जांच के बाद अदालत में यह फैसला सुनाया गया।
मामले का विवरण
अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत दोषसिद्धि दर्ज की। दोषी गुलाम मोहि-उद-दीन डार, जो श्रीनगर के निवासी हैं, पर बडगाम निवासी मोहम्मद अब्दुल्ला के पुत्र अब्दुल गनी डार की हत्या का आरोप सिद्ध हुआ। श्रीनगर पुलिस ने एक आधिकारिक बयान में इस फैसले की पुष्टि की।
दोषी की आतंकवादी पृष्ठभूमि
दोषी गुलाम मोहि-उद-दीन डार आतंकवादी संगठन 'तहरीक-उल-मुजाहिदीन' के संस्थापक सदस्यों में से एक रहा है। यह संगठन कश्मीर में 'जमात-ए-अहल-ए-हदीस' आंदोलन से जुड़े एक सशस्त्र गुट के रूप में उभरा था। आतंकवादी गतिविधियों के दौरान वह ग्रेनेड हमलों, सुरक्षा चौकियों पर हमलों, हथियार छीनने और नागरिकों तथा सुरक्षाकर्मियों की लक्षित हत्याओं में संलिप्त रहा। इसके अतिरिक्त, 2000 के दशक तक उसने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिज्ब-उल-मुजाहिदीन (HM) जैसे संगठनों को लॉजिस्टिकल सहायता प्रदान की और उनके नेटवर्क को मजबूत करने में भूमिका निभाई।
पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया
श्रीनगर पुलिस के अनुसार, यह सजा वर्षों की बारीकी से की गई जांच और अदालत में मजबूती से पक्ष रखने का परिणाम है। दोषी को पहले गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद विधिसम्मत न्यायिक प्रक्रिया के तहत मुकदमा चला। गौरतलब है कि यह मामला यह स्थापित करता है कि किसी व्यक्ति की आतंकवादी पृष्ठभूमि उसे आपराधिक मामलों में कानूनी जवाबदेही से मुक्त नहीं करती।
व्यापक संदर्भ और महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां और न्यायपालिका मिलकर पुराने आतंकवाद से जुड़े मामलों को कानूनी अंजाम तक पहुंचाने में जुटी हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे फैसले पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी देते हैं। यह मामला दर्शाता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी की पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना न्यायिक प्रक्रिया अपना काम करती है।
आगे की स्थिति
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोषी पक्ष उच्च न्यायालय में अपील करेगा या नहीं। बडगाम के पीड़ित परिवार के लिए यह फैसला लंबे इंतजार के बाद मिला न्याय है। श्रीनगर पुलिस ने इस सफलता को जांच टीम की मेहनत और न्यायिक प्रणाली की प्रभावशीलता का प्रमाण बताया है।