21 अक्टूबर 2026
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तालकटोरा स्टेडियम में मछुआरा समुदाय का प्रदर्शन, SC आरक्षण की मांग पर संजय निषाद की अगुवाई

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तालकटोरा स्टेडियम में मछुआरा समुदाय का प्रदर्शन, SC आरक्षण की मांग पर संजय निषाद की अगुवाई

सारांश

दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में मछुआरा समुदाय ने SC आरक्षण की माँग को लेकर हुंकार भरी। डॉ. संजय निषाद ने 1994 के SC दर्जे की बहाली और OBC सूची से नाम हटाने की माँग रखी — यह आंदोलन यूपी चुनाव से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से उठती एक बड़ी संवैधानिक चुनौती है।

मुख्य बातें

21 अक्टूबर 2026 को तालकटोरा स्टेडियम, नई दिल्ली में मछुआरा समुदाय का बड़ा प्रदर्शन।
संजय निषाद (यूपी कैबिनेट मंत्री, निषाद पार्टी अध्यक्ष) के नेतृत्व में कश्यप, कहार, केवट, मल्लाह, मांझी, तुरैहा समाज एकत्र।
माँग: 9% OBC सूची से नाम हटाकर SC श्रेणी में जोड़ा जाए; मझवार नाम पर प्रमाण पत्र जारी हो।
1994 तक इस समुदाय को SC प्रमाण पत्र मिलता था; 21 दिसंबर 2016 को राज्यपाल ने भी SC दर्जे की पात्रता स्वीकार की थी।
निषाद ने PM मोदी और CM योगी के मछुआरा विजन में किए वादे को याद दिलाया।
कांग्रेस की यूपी में 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना पर निषाद ने तीखी आलोचना की।

नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 21 अक्टूबर 2026 को मछुआरा समुदाय ने अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण की संवैधानिक माँग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद की अगुवाई में कश्यप, कहार, केवट, मल्लाह, मांझी और तुरैहा समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हुए।

प्रदर्शन का स्वरूप और माँगें

प्रदर्शनकारियों के हाथों में 'तुरैहा हैं अनुसूचित जाति के हकदार हैं' और 'मझुआ SC आरक्षण हमारा हक' लिखी तख्तियाँ थीं। समुदाय की एकसूत्री माँग है कि उनका नाम 9 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की सूची से हटाकर अनुसूचित जाति में जोड़ा जाए और मझवार के नाम पर प्रमाण पत्र जारी किया जाए।

डॉ. निषाद ने कहा, 'हमारे पुरखों ने देश को आज़ाद कराया और संविधान बनाया, इसलिए इन सभी लोगों का संविधान में हक बनता है।' उन्होंने माँग रखी कि उत्तराखंड में शिल्पकार को जातियों के समूह के रूप में मान्यता दिए जाने की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी केवट, मल्लाह और मझवार को जातियों के समूह के रूप में संवैधानिक दर्जा दिया जाए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

डॉ. निषाद के अनुसार, 1994 तक इस समुदाय को SC प्रमाण पत्र जारी किए जाते थे, लेकिन बाद में इन जातियों को पिछड़ी जाति की सूची में स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 21 दिसंबर 2016 को राज्यपाल ने भी स्पष्ट रूप से लिखा था कि ये जातियाँ पिछड़ी नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति की हकदार हैं।

गौरतलब है कि निषाद, केवट, मल्लाह और संबद्ध जातियाँ उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका रखती हैं और इनकी आबादी करोड़ों में आँकी जाती है। SC दर्जे की माँग कई दशकों से लंबित है और इसे लेकर समय-समय पर आंदोलन होते रहे हैं।

मोदी-योगी सरकार पर भरोसा, पर माँग भी

डॉ. निषाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने अपने मछुआरा विजन में निषाद समुदाय को SC आरक्षण देने का वादा किया था। उनका कहना था, 'सबने इस समाज को लूटा था, लेकिन मोदी-योगी ने वादा किया था।' इस बयान से स्पष्ट है कि प्रदर्शन विरोधी नहीं, बल्कि वादे की पूर्ति की माँग है।

उत्तर प्रदेश चुनाव और कांग्रेस पर निशाना

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में डॉ. निषाद ने कांग्रेस की 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी और प्रियंका गांधी को जिम्मेदारी दिए जाने की खबरों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 'डूबता हुआ जहाज' है और पिछली बार मुश्किल से 2 सीटें जीत पाई थी; इस बार 150 सीटों पर उतरने पर और बुरी हालत होगी।

आगे क्या होगा

प्रदर्शन के बाद समुदाय के नेताओं द्वारा केंद्र और राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपे जाने की संभावना है। SC दर्जे की माँग के लिए संवैधानिक संशोधन या राज्य सरकार की सिफारिश की आवश्यकता होगी, जो एक लंबी विधायी प्रक्रिया है। यह देखना बाकी है कि आगामी चुनावी मौसम में यह माँग किस राजनीतिक दिशा लेती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो राजनीतिक दबाव का एक परिष्कृत रूप है। SC दर्जे की माँग केवल सामाजिक न्याय का सवाल नहीं — यह उत्तर प्रदेश की करोड़ों की आबादी वाले समुदाय के वोट बैंक को साधने की राजनीतिक अनिवार्यता भी है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यदि यह माँग अधूरी रही, तो गठबंधन में दरार का जोखिम वास्तविक है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मछुआरा समुदाय SC आरक्षण की माँग क्यों कर रहा है?
मछुआरा समुदाय की माँग है कि केवट, मल्लाह, मझवार और संबद्ध जातियों को OBC सूची से हटाकर अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए। समुदाय के अनुसार 1994 तक उन्हें SC प्रमाण पत्र मिलता था और 21 दिसंबर 2016 को राज्यपाल ने भी SC दर्जे की पात्रता स्वीकार की थी।
21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में किसने प्रदर्शन किया?
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के नेतृत्व में तालकटोरा स्टेडियम में कश्यप, कहार, केवट, मल्लाह, मांझी और तुरैहा समाज के लोग एकत्र हुए। यह प्रदर्शन SC आरक्षण की संवैधानिक माँग को लेकर आयोजित किया गया।
संजय निषाद की मुख्य माँग क्या है?
डॉ. संजय निषाद की माँग है कि मछुआरा समुदाय की जातियों का नाम 9 प्रतिशत OBC आरक्षण की सूची से हटाकर SC श्रेणी में जोड़ा जाए और मझवार के नाम पर SC प्रमाण पत्र जारी किया जाए। उन्होंने उत्तराखंड में शिल्पकार को जातियों के समूह के रूप में दी गई मान्यता का उदाहरण देते हुए UP में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने की माँग रखी।
क्या मोदी-योगी सरकार ने इस समुदाय से कोई वादा किया था?
डॉ. निषाद के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मछुआरा विजन में निषाद समुदाय को SC आरक्षण देने का वादा किया था। यही कारण है कि प्रदर्शनकारी सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि उस वादे की पूर्ति की माँग के लिए एकत्र हुए।
SC दर्जे की माँग कैसे पूरी हो सकती है?
SC सूची में किसी जाति को जोड़ने के लिए संसद में संविधान संशोधन या केंद्र सरकार की अधिसूचना की आवश्यकता होती है, जिसके लिए राज्य सरकार की सिफारिश ज़रूरी है। यह एक लंबी विधायी प्रक्रिया है और इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ-साथ संसदीय बहुमत भी अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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