11 अगस्त 2026
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हॉर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़े उर्वरक जहाज, 196 लाख टन का रिकॉर्ड भंडार

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हॉर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़े उर्वरक जहाज, 196 लाख टन का रिकॉर्ड भंडार

सारांश

मध्य पूर्व संकट के बीच भारत ने उर्वरक आपूर्ति का मोर्चा संभाल लिया है — हॉर्मुज स्ट्रेट पार कर चार जहाज भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। 196.08 लाख टन का रिकॉर्ड भंडार और 11 देशों से यूरिया की खरीद बताती है कि भारत की खाद कूटनीति अब पूरी तरह सक्रिय है।

मुख्य बातें

यूरिया, डीएपी और सल्फर से लदे चार जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट पार कर कृष्णपट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा की ओर रवाना।
22 जून 2026 तक भारत का कुल उर्वरक भंडार 196.08 लाख टन — पिछले साल के 168.67 लाख टन से काफी अधिक।
1 मार्च से 21 जून 2026 के बीच उर्वरक बिक्री 153.4 लाख टन रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.2 लाख टन अधिक।
भारत ने वैश्विक बाजार से 90 लाख टन से अधिक यूरिया और पीएंडके उर्वरकों का प्रबंध किया; हालिया टेंडर में 17.70 लाख टन यूरिया अनुबंध पूरा।
विदेशों में 28 भारतीय मिशनों के राजनयिक समन्वय से 11 से अधिक देशों से आपूर्ति के वैकल्पिक रास्ते खुले।

भारत को उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम के तहत, यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और सल्फर से लदे चार जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर भारतीय बंदरगाहों की ओर रवाना हो गए हैं। 22 जून 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इन जहाजों ने पिछले हफ्ते फारस की खाड़ी में स्थित इस रणनीतिक जलडमरूमध्य को पार किया। वैश्विक व्यापार की मौजूदा चुनौतियों के बीच यह घटनाक्रम भारत की कृषि आपूर्ति श्रृंखला के लिए राहत की खबर है।

जहाज किन बंदरगाहों पर पहुँचेंगे

आधिकारिक बयान के मुताबिक, ये चारों जहाज अब कृष्णपट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। इन बंदरगाहों पर पहुँचते ही नए आयात को तत्काल उतारा जाएगा, जिससे देश के मौजूदा उर्वरक बफर में वृद्धि होगी और खरीफ सीजन की कृषि जरूरतें पूरी की जा सकेंगी।

उर्वरक भंडार की स्थिति

बयान के अनुसार, 22 जून 2026 तक भारत का कुल उर्वरक भंडार 196.08 लाख टन दर्ज किया गया, जो पिछले साल इसी तारीख के 168.67 लाख टन के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि है। इस भंडार में 81.44 लाख टन यूरिया, 20.92 लाख टन डीएपी, 55.91 लाख टन एनपीके, 12.68 लाख टन एमओपी और 25.13 लाख टन एसएसपी शामिल है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि सरकार ने संकट के बावजूद आपूर्ति बनाए रखने में सफलता पाई है।

बिक्री और उत्पादन में उछाल

मध्य पूर्व संकट के बाद 1 मार्च 2026 से 21 जून 2026 के बीच कृषि गतिविधियाँ बढ़ने से कुल उर्वरक बिक्री 153.4 लाख टन तक पहुँच गई — पिछले वर्ष की इसी अवधि की 140.2 लाख टन की तुलना में 13.2 लाख टन की बढ़ोतरी। घरेलू उत्पादन भी बढ़कर 133.12 लाख टन हो गया, जबकि भारतीय बंदरगाहों पर कुल आयात 43.69 लाख टन रहा।

वैश्विक खरीद रणनीति

सरकार ने हालिया वैश्विक टेंडर में 17.70 लाख टन यूरिया का अनुबंध सफलतापूर्वक पूरा किया। इस नई खरीद के साथ, भारत ने वैश्विक बाजार से 90 लाख टन से अधिक यूरिया और पीएंडके उर्वरकों का प्रबंध कर लिया है — विशेषकर मौजूदा खरीफ सीजन के लिए। बयान के अनुसार, यह बड़े पैमाने की खरीद रणनीति विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों के साथ सक्रिय राजनयिक समन्वय से संभव हुई, जिसने कई अंतरराष्ट्रीय गलियारों के जरिए आयात के वैकल्पिक रास्ते खोले।

कहाँ से आ रहा है उर्वरक

यूरिया की आपूर्ति ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड से की जा रही है। वहीं, डीएपी और एनपीके की आपूर्ति रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से लाल सागर मार्ग के जरिए हासिल की गई है। यह विविधीकृत आपूर्ति नेटवर्क किसी एक देश या मार्ग पर निर्भरता कम करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कहानी इसके पीछे की कूटनीतिक मशीनरी में है — 28 भारतीय मिशन, 11 से अधिक देश, और एक साथ कई समुद्री मार्गों का उपयोग। यह दर्शाता है कि भारत ने एकल आपूर्ति स्रोत पर निर्भरता की कमजोरी को पहचान लिया है। फिर भी, 90 लाख टन से अधिक की वैश्विक खरीद का बड़ा हिस्सा अभी भी आयात पर टिका है — घरेलू उत्पादन क्षमता में दीर्घकालिक निवेश के बिना यह रणनीति हर संकट में दोहरानी पड़ेगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हॉर्मुज स्ट्रेट पार करने वाले चार उर्वरक जहाज भारत के किन बंदरगाहों पर पहुँचेंगे?
ये चारों जहाज कृष्णपट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा बंदरगाहों पर पहुँचेंगे। वहाँ पहुँचते ही यूरिया, डीएपी और सल्फर को तत्काल उतारा जाएगा ताकि देश के उर्वरक भंडार को बढ़ाया जा सके।
22 जून 2026 तक भारत का उर्वरक भंडार कितना है?
आधिकारिक बयान के अनुसार 22 जून 2026 तक भारत का कुल उर्वरक भंडार 196.08 लाख टन है, जो पिछले साल इसी तारीख के 168.67 लाख टन से काफी अधिक है। इसमें 81.44 लाख टन यूरिया, 20.92 लाख टन डीएपी, 55.91 लाख टन एनपीके, 12.68 लाख टन एमओपी और 25.13 लाख टन एसएसपी शामिल हैं।
मध्य पूर्व संकट के बाद भारत में उर्वरक बिक्री पर क्या असर पड़ा?
1 मार्च से 21 जून 2026 के बीच भारत में कुल उर्वरक बिक्री 153.4 लाख टन रही, जो पिछले साल की इसी अवधि की 140.2 लाख टन से 13.2 लाख टन अधिक है। कृषि गतिविधियों में तेजी और सरकार की सक्रिय आपूर्ति रणनीति को इस वृद्धि का कारण बताया जा रहा है।
भारत ने उर्वरक आयात के लिए कौन-कौन से देशों से खरीद की है?
यूरिया ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड से मँगाया गया है। डीएपी और एनपीके की आपूर्ति रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से लाल सागर मार्ग के जरिए हासिल की गई है।
भारत की उर्वरक खरीद में 28 भारतीय मिशनों की क्या भूमिका रही?
विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों ने सक्रिय राजनयिक समन्वय के जरिए कई अंतरराष्ट्रीय गलियारों से आयात के वैकल्पिक रास्ते खोले। इसी समन्वय की बदौलत भारत ने वैश्विक बाजार से 90 लाख टन से अधिक यूरिया और पीएंडके उर्वरकों का प्रबंध किया, जो खरीफ सीजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बताया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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