गैरसैंण में बजट सत्र ने दिखाई धामी सरकार की ताकत, कांग्रेस पर साधे तीखे वार
सारांश
Key Takeaways
- बजट सत्र 41 घंटे 10 मिनट तक चला।
- धामी ने कांग्रेस पर तीखे हमले किए।
- राज्य की अर्थव्यवस्था में 41%25 की वृद्धि हुई।
- 12 विधेयकों को मंजूरी दी गई।
- समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य।
गैरसैंण, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र इस बार कई दृष्टिकोणों से ऐतिहासिक रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आयोजित इस सत्र ने राज्य सरकार की उपलब्धियों और नीतियों का स्पष्ट प्रदर्शन किया। धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल के चार साल पूरे होने पर आयोजित इस सत्र में मुख्यमंत्री ने सदन को एक सक्रिय और आक्रामक अंदाज में संबोधित किया।
9 मार्च से आरंभ हुए इस पांच दिवसीय बजट सत्र की कार्यवाही कुल 41 घंटे 10 मिनट तक चली, जो गैरसैंण में अब तक का सबसे लंबा विधानसभा सत्र माना जा रहा है। इस दौरान वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पारित किया गया। सदन ने कुल 12 विधेयकों को मंजूरी दी और चार अध्यादेशों को भी स्वीकृति प्रदान की। विधानसभा को 50 अल्प सूचित प्रश्न और 545 तारांकित प्रश्न मिले, जिनमें से 291 के जवाब सदन में दिए गए। यह सत्र केवल विधायी कार्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के विकास, सरकार की कार्यशैली और नीतियों पर विस्तृत चर्चा का मंच बना। कई विधायकों ने धामी सरकार के प्रयासों की सराहना की।
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का अंदाज काफी भिन्न था। आमतौर पर शांत और संयमित रहने वाले धामी इस बार पूरी तरह आक्रामक हो गए। उन्होंने खासकर कांग्रेस पर जोरदार हमला किया और उसके पुराने कार्यकाल की नीतियों को कठघरे में खड़ा किया। धामी ने कहा कि उनकी सरकार केवल घोषणाएं करने वाली नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने वाली है। मुख्य सेवक के रूप में की गई 3885 घोषणाओं में से 2408 पूरी हो चुकी हैं और बाकी पर तेजी से काम चल रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार शिलान्यास और लोकार्पण तक सीमित नहीं रहती, बल्कि घोषणाओं को कार्यान्वयन के माध्यम से पूरा करती है। विपक्ष के लिए यह समझना कठिन है, क्योंकि उनके समय में जनता के प्रति जवाबदेही का कोई भाव नहीं था।
कांग्रेस के पुराने दौर पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय खनन गतिविधियां माफियाओं के पास थीं। नियमों की अनदेखी की जाती थी और राज्य का राजस्व माफियाओं के हाथों में चला जाता था। तब खनन से लगभग 400 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता था, जो अब बढ़कर 1200 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। उन्होंने 2012 से 2017 के दौरान को 'पॉलिसी पैरालिसिस' का समय बताया, जब सरकार का ध्यान केवल शराब नीति और लाइसेंस के बदले नकदी पर था। उस समय के स्टिंग ऑपरेशनों ने उत्तराखंड की छवि को देशभर में नुकसान पहुंचाया।
राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पर तंज कसते हुए धामी ने कहा कि दशकों सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने बड़े निर्णय लेने का साहस नहीं दिखाया। धारा 370 हटाना, तीन तलाक खत्म करना और राम मंदिर निर्माण जैसे ऐतिहासिक कदम वर्षों तक टाले गए। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इन्हें पूरा किया गया।
समान नागरिक संहिता पर भी मुख्यमंत्री ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने आज़ादी के बाद सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू की। इससे महिलाओं को तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली। धामी ने तंज कसा कि तुष्टिकरण की राजनीति करने वालों को समान अधिकारों की समझ नहीं आती, क्योंकि उनकी नजरें वोट बैंक पर टिकी रहती हैं।
लैंड जिहाद और अतिक्रमण पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने सख्त कार्रवाई करके 12 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई है। उत्तराखंड में अवैध कब्जे बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि विपक्ष अल्पसंख्यकों को केवल राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल करता रहा है, जबकि उनकी सरकार हर बच्चे को अच्छी किताब और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चाहती है।
विकास के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए धामी ने कहा कि पिछले चार साल में राज्य की अर्थव्यवस्था डेढ़ गुना से अधिक बढ़ी है। बजट का आकार 60 हजार करोड़ से बढ़कर 1 लाख 10 हजार करोड़ से अधिक हो गया। प्रति व्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई। राज्य में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए और स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर 1700 हो गई। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्यों में उत्तराखंड पहले स्थान पर और सार्वजनिक वित्तीय प्रदर्शन में विशेष राज्यों में दूसरे स्थान पर है।
उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां केवल सरकार की नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड की सामूहिक मेहनत का परिणाम हैं। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार का संकल्प देवभूमि उत्तराखंड को सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है। यह विकल्प रहित संकल्प है कि विकास की रोशनी राज्य के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उत्तराखंड विकास, आस्था और समृद्धि के नए मानक स्थापित करे।