गंगा किनारे अतिक्रमण हटाओ: सुप्रीम कोर्ट का बिहार सरकार को छह हफ्तों का अल्टीमेटम
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 23 जुलाई 2026 को बिहार सरकार को पटना में गंगा नदी के तट पर नौजर घाट से नूरपुर घाट तक फैले समस्त गैरकानूनी कब्जों और अतिक्रमणों को छह हफ्तों के भीतर हटाने का सख्त निर्देश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस आदेश के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
मुख्य आदेश और समयसीमा
सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि छह हफ्तों की तय समयसीमा के भीतर अतिक्रमण हटाने की पूरी प्रक्रिया संपन्न की जाए। इसके साथ ही न्यायालय ने एक जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी को अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल कर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी उच्च न्यायालय या जिला अदालत ने अतिक्रमण हटाने के विरुद्ध कोई अंतरिम स्थगन आदेश दे रखा है, तब भी सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश सर्वोपरि रहेगा और राज्य सरकार को हर स्थिति में कार्रवाई करनी होगी।
सभी राज्यों को अंतिम चेतावनी
सर्वोच्च न्यायालय ने देशभर के सभी राज्यों को गंगा नदी के तटों पर हुए अतिक्रमण की जानकारी उपलब्ध कराने का अंतिम अवसर दिया है। न्यायालय ने चेतावनी दी कि जो राज्य निर्धारित समयसीमा में सूचना नहीं देंगे, उनके मुख्य सचिवों को सीधे अदालत में तलब किया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब गंगा की सफाई और उसके तटों के संरक्षण को लेकर न्यायिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
यमुना किनारे निर्माण पर भी रोक
इसी सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने वृंदावन में यमुना नदी के तट पर जारी निर्माण कार्यों से संबंधित दो याचिकाओं पर भी संज्ञान लिया। न्यायालय ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए 23 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है, क्योंकि चल रहे निर्माण कार्यों के कारण यमुना का प्राकृतिक बहाव बाधित हो सकता है और नदी का मार्ग संकरा पड़ सकता है। इसे देखते हुए अगली सुनवाई तक यमुना के किनारे यथास्थिति बनाए रखने और किसी भी नए निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
क्यों मायने रखता है यह आदेश
गौरतलब है कि गंगा और यमुना के तटों पर अतिक्रमण का मुद्दा वर्षों से न्यायिक और पर्यावरणीय बहस के केंद्र में रहा है। नदियों के बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण न केवल पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि बाढ़ के दौरान जनहानि के जोखिम को भी बढ़ाते हैं। सर्वोच्च न्यायालय का यह दो-आयामी आदेश — बिहार में गंगा और वृंदावन में यमुना, दोनों को एक साथ संबोधित करते हुए — नदी संरक्षण के प्रति न्यायपालिका के बढ़ते सख्त रुख का संकेत है।
आगे क्या होगा
बिहार सरकार को छह हफ्तों के भीतर अतिक्रमण हटाकर हलफनामे के साथ अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। वृंदावन मामले में अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित है। यदि कोई राज्य गंगा तट अतिक्रमण की जानकारी नहीं देता, तो उसके मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना पड़ सकता है।