गयाजी में पितृपक्ष 2026: ब्रह्मयोनि पहाड़ी पर 'एक पेड़ पूर्वजों के नाम', 41 पौधे रोपे गए
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के गयाजी में इस बार पितृपक्ष महासंगम-2026 केवल पिंडदान और तर्पण तक सीमित नहीं रहा — जिला प्रशासन और वन विभाग, गया ने मिलकर पूर्वजों की श्रद्धा को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए 'एक पेड़ पूर्वजों के नाम' अभियान की शुरुआत की है। 27 सितंबर 2026 को ब्रह्मयोनि पहाड़ी के निकट खटकाचक स्थित पितृवाटिका के निर्धारित स्थल पर आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम में कुल 41 पौधे लगाए गए। यह पहल 'मोक्षस्थली' की धार्मिक पहचान में पर्यावरणीय चेतना का एक नया आयाम जोड़ रही है।
पितृवाटिका की अवधारणा क्या है
ब्रह्मयोनि पहाड़ी क्षेत्र में विकसित की जा रही पितृवाटिका श्रद्धा, स्मृति और प्रकृति संरक्षण को एकसाथ जोड़ने का प्रयास है। यहाँ लगाए जा रहे पौधे केवल हरियाली के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक पौधे को किसी पूर्वज की स्मृति से जोड़ा जाएगा — ताकि परिवार के लिए वह पौधा पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक जीवित स्मारक बना रहे। धार्मिक मान्यता के अनुसार ब्रह्मयोनि पहाड़ी पितृपक्ष में दर्शन-पूजन का प्रमुख स्थल है, और इसी आस्था-भूमि पर पर्यावरण-संदेश देना इस पहल को विशेष बनाता है।
जिलाधिकारी ने क्या कहा
गया के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने बताया कि 'एक पेड़ पूर्वजों के नाम' की अवधारणा के अंतर्गत श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को अपने पूर्वजों की स्मृति में पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि पितृपक्ष के दौरान गया आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु एक पौधा लगाए, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र हरियाली के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। जिला प्रशासन की ओर से नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएँ।
पर्यावरणीय और भावनात्मक जुड़ाव
आमतौर पर पौधारोपण को पर्यावरणीय गतिविधि के रूप में देखा जाता है, लेकिन पूर्वजों की स्मृति से इसे जोड़ने पर इसके साथ व्यक्तिगत और पारिवारिक भावनाएँ भी संलग्न हो जाती हैं। प्रशासन का मानना है कि लगाया गया पौधा परिवार के लिए पूर्वजों की याद का स्थायी प्रतीक बन सकता है और उसकी देखभाल आने वाली पीढ़ियों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगा सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में धार्मिक पर्यटन को पर्यावरण-अनुकूल ढाँचे से जोड़ने की माँग तेज हो रही है।
व्यापक अभियान की संभावना
गयाजी में पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए आते हैं। इस विशाल उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन इस पहल को पर्यावरण जागरूकता के व्यापक अभियान के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है। गौरतलब है कि ब्रह्मयोनि पहाड़ की ऊँचाई से गयाजी का विस्तृत दृश्य दिखाई देता है और यह क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से भी संवेदनशील है — इसीलिए यहाँ हरियाली बढ़ाना पारिस्थितिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे की राह
प्रशासन का कहना है कि पितृपक्ष की परंपरा को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी विरासत तैयार करने की दिशा में सार्थक कदम है। 'एक पेड़ पूर्वजों के नाम' का संदेश यह विचार आगे बढ़ाता है कि पूर्वजों की स्मृति को प्रकृति की हरियाली के साथ जोड़ा जाए और श्रद्धा का यह भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरा-भरा और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ने के संकल्प में परिवर्तित हो सके। पितृवाटिका में लगाए जा रहे पौधे आने वाले वर्षों में इस प्रयास की जड़ों को और गहरा करेंगे।