जीडीपी विवाद: संजय राउत बोले— 'PM मोदी अपने सलाहकार बदलें, गलत जानकारी जा रही है देश तक'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने 3 सितंबर को मुंबई में जीडीपी आँकड़ों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सलाहकार बदलने चाहिए, क्योंकि देश के सामने गलत जानकारी परोसी जा रही है। यह प्रतिक्रिया मोदी सरकार के पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर मात्र 2.6% है।
राउत का केंद्र पर हमला
राउत ने सवाल उठाया कि यदि जीडीपी का आँकड़ा इतना मज़बूत है, तो रोज़गार कहाँ है और निवेश कहाँ है। उन्होंने कहा, 'गरीबी और महंगाई साफ दिख रही है — यह जीडीपी के मज़बूत होने का लक्षण नहीं है।' राउत ने आगे कहा कि इस तरह की भ्रामक सूचना देश की जनता को गुमराह करती है और इसकी जड़ प्रधानमंत्री के सलाहकार मंडल में है।
गोयल का पलटवार
इससे पहले बुधवार को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) के एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि आँकड़े एकत्र करने की यह व्यवस्था वर्षों से चली आ रही है और इसमें किसी राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका नहीं होती। गोयल ने यह भी कहा कि आँकड़ों को तोड़-मरोड़कर पेश करने से सच्चाई नहीं छिपाई जा सकती और इस तरह की नकारात्मक सोच 140 करोड़ भारतीयों के परिश्रम और सामर्थ्य का अपमान है।
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO नियुक्ति पर भी निशाना
राउत ने उसी दिन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पहली बार CEO की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। ट्रस्ट ने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को यह पद सौंपा है। राउत ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'पहली बार राम मंदिर ट्रस्ट में CEO नियुक्त किया गया है — इसका मतलब है कि मंदिर का कॉर्पोरेटकरण हो गया है। जब बिज़नेस होता है तो CEO आता है, मैनेजिंग डायरेक्टर आता है, डायरेक्टर आते हैं।'
विपक्ष का व्यापक रुख
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल जीडीपी आँकड़ों की विश्वसनीयता और सरकारी सांख्यिकीय तंत्र की स्वायत्तता पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। पूर्व वित्त सचिव गर्ग का बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि वे स्वयं मोदी सरकार के कार्यकाल में शीर्ष पद पर रहे हैं। राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की नियुक्ति को लेकर भी विपक्ष इसे धार्मिक संस्था के 'कॉर्पोरेटकरण' के रूप में देख रहा है और इस पर सियासी बहस तेज़ होती दिख रही है।
आगे क्या
जीडीपी आँकड़ों की प्रामाणिकता और सरकारी सांख्यिकी प्रणाली की विश्वसनीयता पर यह बहस संसद के आगामी सत्र में भी गूँजने की संभावना है। राम मंदिर ट्रस्ट में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर विपक्ष का दबाव बढ़ता रहेगा।