घुटनों के दर्द और अकड़न से राहत दिलाता है 'नी मूवमेंट', आयुष मंत्रालय ने बताए इसके अहम फायदे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
घुटनों के दर्द और अकड़न से राहत दिलाता है 'नी मूवमेंट', आयुष मंत्रालय ने बताए इसके अहम फायदे

सारांश

आयुष मंत्रालय ने विश्व योग दिवस से पहले 'नी मूवमेंट' व्यायाम को लेकर जागरूकता अभियान तेज़ किया है। यह सरल, उपकरण-रहित अभ्यास घुटनों के दर्द, कूल्हों की अकड़न और जोड़ों की कमज़ोरी का प्राकृतिक समाधान बताया गया है — खासकर उन लाखों भारतीयों के लिए जो गतिहीन जीवनशैली जी रहे हैं।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने ' नी मूवमेंट ' व्यायाम के नियमित अभ्यास की सलाह दी है।
यह व्यायाम घुटनों के दर्द, कूल्हों की अकड़न और शरीर के निचले हिस्से की कमज़ोरी दूर करने में कारगर बताया गया है।
जोड़ों में प्राकृतिक चिकनाई, लचीलापन और गतिशीलता बढ़ती है; चोट का जोखिम घटता है।
यह अभ्यास बिना किसी उपकरण के घर पर किया जा सकता है।
तेज़ दर्द की स्थिति में डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से परामर्श लेने की सलाह दी गई है।

नई दिल्ली, 5 मई। घुटनों का दर्द, कूल्हों की अकड़न और शरीर के निचले हिस्से की कमज़ोरी आज के समय में बेहद आम शिकायतें बन चुकी हैं। उम्र बढ़ने के साथ या लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता के कारण ये समस्याएँ और गहरी होती जाती हैं। इन्हीं परेशानियों के प्राकृतिक समाधान के रूप में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने 'नी मूवमेंट' नामक सरल व्यायाम के नियमित अभ्यास की सलाह दी है।

आयुष मंत्रालय की पहल और पृष्ठभूमि

विश्व योग दिवस के नज़दीक आते ही आयुष मंत्रालय लगातार विभिन्न योगासनों और उनके स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूकता फैला रहा है। इसी कड़ी में मंत्रालय ने घुटनों की गतिशीलता बढ़ाने वाले इस व्यायाम को विशेष रूप से उजागर किया है। मंत्रालय के अनुसार, घुटनों में दर्द और अस्थिरता अक्सर जोड़ों के कम उपयोग या कमज़ोरी के संकेत होते हैं, और 'नी मूवमेंट' जैसे सरल अभ्यास इन समस्याओं का एक प्रभावी प्राकृतिक समाधान हो सकते हैं।

नी मूवमेंट से क्या-क्या फायदे होते हैं

आयुष मंत्रालय के मुताबिक, इस व्यायाम के नियमित अभ्यास से जोड़ों की मज़बूती और गतिशीलता में उल्लेखनीय सुधार होता है। घुटनों और कूल्हों के आसपास की मांसपेशियाँ सक्रिय होती हैं, जिससे जोड़ों में प्राकृतिक चिकनाई बढ़ती है और लचीलापन आता है। साथ ही दर्द व अकड़न में कमी आती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस अभ्यास से शरीर के निचले हिस्से में स्थिरता और संतुलन बेहतर होता है, मुद्रा सुधरती है और चोट या खिंचाव का जोखिम घटता है। गति की सीमा बढ़ने से लंबे समय तक स्थायी राहत मिलती है। यह अभ्यास खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी बताया गया है जो लंबे समय तक बैठे रहते हैं या जिनकी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि कम है।

रोज़मर्रा की जिंदगी पर असर

नियमित 'नी मूवमेंट' अभ्यास से चलने, बैठने, खड़े होने और सीढ़ियाँ चढ़ने जैसी सामान्य दैनिक गतिविधियाँ बिना परेशानी के की जा सकती हैं। यह व्यायाम जोड़ों की कमज़ोरी दूर करता है और कूल्हों व घुटनों की अकड़न को कम करता है। गौरतलब है कि यह एक ऐसा व्यायाम है जो बिना किसी उपकरण के घर पर आसानी से किया जा सकता है, जिससे इसे अपनाना हर वर्ग के लिए सुलभ है।

सावधानियाँ और विशेषज्ञ की सलाह

विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस व्यायाम की शुरुआत धीरे-धीरे करनी चाहिए। यदि अभ्यास के दौरान तेज़ दर्द महसूस हो, तो तुरंत किसी डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना ज़रूरी है। उचित तरीके से किए जाने पर धीरे-धीरे जोड़ों की गति बढ़ती है और शरीर मज़बूत होता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और सरल, घरेलू उपायों की माँग बढ़ रही है।

आयुष मंत्रालय की यह पहल योग को आम जन के स्वास्थ्य प्रबंधन में मुख्यधारा में लाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है, और विश्व योग दिवस से पहले इसे और गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या केवल सोशल मीडिया पोस्ट और सलाह से जन-स्वास्थ्य में बदलाव आएगा। भारत में घुटनों और जोड़ों की बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं, जिसकी जड़ में गतिहीन जीवनशैली, मोटापा और पोषण की कमी है — जिन पर व्यापक नीतिगत हस्तक्षेप की ज़रूरत है। 'नी मूवमेंट' जैसे सरल उपाय पूरक हो सकते हैं, पर इन्हें एकमात्र समाधान के रूप में प्रस्तुत करना भ्रामक हो सकता है। मंत्रालय को चाहिए कि वह इन अभ्यासों के साथ-साथ विशेषज्ञ-आधारित, क्लिनिकल रूप से सत्यापित दिशानिर्देश भी जारी करे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'नी मूवमेंट' व्यायाम क्या है?
'नी मूवमेंट' एक सरल योग-आधारित व्यायाम है जिसमें घुटनों और कूल्हों की गतिशीलता बढ़ाने के लिए नियंत्रित हलचल की जाती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह बिना किसी उपकरण के घर पर आसानी से किया जा सकता है।
'नी मूवमेंट' से घुटनों के दर्द में कैसे राहत मिलती है?
इस व्यायाम से जोड़ों के आसपास की मांसपेशियाँ सक्रिय होती हैं और जोड़ों में प्राकृतिक चिकनाई बढ़ती है, जिससे दर्द और अकड़न में कमी आती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित अभ्यास से गति की सीमा बढ़ती है और लंबे समय तक राहत मिलती है।
किन लोगों के लिए यह व्यायाम सबसे अधिक उपयोगी है?
यह व्यायाम खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी बताया गया है जो लंबे समय तक बैठे रहते हैं, कम चलते-फिरते हैं, या उम्र बढ़ने के कारण जोड़ों की कमज़ोरी महसूस करते हैं। बुज़ुर्ग और गतिहीन जीवनशैली वाले लोग इससे विशेष लाभ उठा सकते हैं।
क्या 'नी मूवमेंट' करते समय कोई सावधानी बरतनी चाहिए?
विशेषज्ञों की सलाह है कि इस व्यायाम की शुरुआत धीरे-धीरे करें। यदि अभ्यास के दौरान तेज़ दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना ज़रूरी है।
आयुष मंत्रालय ने यह सलाह अभी क्यों दी?
विश्व योग दिवस नज़दीक होने के कारण आयुष मंत्रालय विभिन्न योगासनों और उनके फायदों पर लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। 'नी मूवमेंट' इसी श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरल घरेलू उपायों से जन-स्वास्थ्य सुधारना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले