सड़क पर नमाज रोकने के आदेश पर गिरिराज सिंह ने सभी मुख्यमंत्रियों को दिया धन्यवाद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने 23 मई को पटना में मीडिया से बातचीत में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस निर्देश का खुलकर समर्थन किया, जिसमें सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि जिन मुख्यमंत्रियों ने कानून-व्यवस्था की दृष्टि से ऐसे आदेश जारी किए हैं, वे सराहना के पात्र हैं।
गिरिराज सिंह का बयान
गिरिराज सिंह ने कहा, 'देश के कुछ कट्टरपंथियों ने माहौल खराब करने की कोशिश की है, जो देशभर में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ रहे हैं। मैं उन सभी मुख्यमंत्रियों को धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने कानून-व्यवस्था की दृष्टि से ऐसा आदेश दिया है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार कानून से चलती है और नागरिकों को कानून का पालन करना चाहिए।
गौ हत्या और सांप्रदायिक माहौल पर टिप्पणी
गौ हत्या के मुद्दे पर गिरिराज सिंह ने कहा कि हिंदुओं को उकसाने के उद्देश्य से सार्वजनिक स्थानों पर पशु बलि का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोलकाता की सड़कों पर इस तरह की गतिविधियों को खुली छूट दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता और शांति बनाए रखना सरकार की ज़िम्मेदारी है।
बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम का मुद्दा
पश्चिम बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य किए जाने के प्रश्न पर गिरिराज सिंह ने कहा कि यह पूरे देश में लागू है और इसका पालन सभी को करना चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में संविधान और संघीय ढाँचे की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि अब बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का शासन है और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने में जुटे हैं।
रामकृपाल यादव का समर्थन
भाजपा नेता रामकृपाल यादव ने भी सीएम धामी के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार के मुखिया की पहली प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना होती है और धामी का यह निर्णय उसी दिशा में उठाया गया उचित कदम है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर बहस तेज़ हो रही है। उत्तराखंड के बाद कुछ अन्य भाजपा-शासित राज्यों में भी इसी तरह के निर्देशों की चर्चा है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकते हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि सार्वजनिक स्थलों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार का संवैधानिक दायित्व है।