22 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वैश्विक संस्थान बदलती दुनिया के साथ तालमेल बिठाने में विफल: NDTV वर्ल्ड समिट में पीएम मोदी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वैश्विक संस्थान बदलती दुनिया के साथ तालमेल बिठाने में विफल: NDTV वर्ल्ड समिट में पीएम मोदी

सारांश

NDTV वर्ल्ड समिट में पीएम मोदी ने वैश्विक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया — 'व्यवस्थाओं के बीच की दुनिया' वाले इस दौर में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समेत तमाम बहुपक्षीय संस्थानों की सीमाओं को रेखांकित किया और 21वीं सदी की ज़रूरतों के अनुरूप अधिक समावेशी वैश्विक ढाँचे की माँग को नई धार दी।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 अक्टूबर 2026 को NDTV वर्ल्ड समिट , नई दिल्ली में कहा कि वैश्विक व्यवस्था बदलती दुनिया के साथ तालमेल बिठाने में विफल रही है।
उन्होंने मौजूदा वैश्विक स्थिति को 'व्यवस्थाओं के बीच की दुनिया' करार दिया।
मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थानों की सीमाएँ अब स्पष्ट हो चुकी हैं।
नई आर्थिक शक्तियों, बदलती आकांक्षाओं और तकनीकी रूपांतरण को वैश्विक बदलाव के प्रमुख कारण बताया।
भारत ने वैश्विक संस्थानों को 21वीं सदी के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और जवाबदेह बनाने की माँग दोहराई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित NDTV वर्ल्ड समिट को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था और उसके संस्थान तेज़ी से बदलती दुनिया के साथ कदमताल करने में विफल रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को 'व्यवस्थाओं के बीच की दुनिया' की संज्ञा दी, जहाँ आज की वास्तविकताओं और पुराने पड़ चुके निर्णय-तंत्र के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है।

मुख्य वक्तव्य

प्रधानमंत्री ने समिट में दो बुनियादी सवाल उठाए — पहला, वैश्विक व्यवस्था में बदलाव क्यों हो रहा है और पुरानी संरचना आज की चुनौतियों का सामना करने में क्यों सक्षम नहीं है? दूसरा, इस बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका क्या होनी चाहिए? उनके अनुसार, यह परिवर्तन न केवल स्वाभाविक है, बल्कि अपरिहार्य भी है।

द्वितीय विश्व युद्ध से मिले सबक का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि केवल ताकत और स्वार्थ पर टिकी वैश्विक व्यवस्था दीर्घकाल में टिकाऊ नहीं हो सकती। उन्होंने रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र (UN) की नींव संवाद, सहयोग और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों पर रखी गई थी — एक ऐसी बुनियाद जो आज भी प्रासंगिक है, किंतु संस्थानों का ढाँचा कालबाह्य हो चुका है।

वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के कारण

मोदी ने कहा कि दशकों में लोगों की आकांक्षाएँ बदली हैं, नई आर्थिक शक्तियाँ उभरी हैं और तकनीक ने समाज, अर्थव्यवस्था तथा शक्ति की प्रकृति को पूरी तरह रूपांतरित कर दिया है। उनके अनुसार, जिन देशों को मूल वैश्विक व्यवस्था की रचना के समय उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला था, वे अब वैश्विक मंच पर अपना स्थान माँग रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'सवाल यह है कि क्या वैश्विक व्यवस्था इन बदलावों के साथ कदमताल कर पाई है? इसका जवाब है — नहीं।' यह टिप्पणी न सिर्फ एक कूटनीतिक संदेश थी, बल्कि वैश्विक संस्थानों में सुधार की भारत की दीर्घकालिक माँग की पुनरावृत्ति भी।

संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की सीमाएँ

प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थानों की ऐतिहासिक भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि समकालीन चुनौतियों — जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद, और आर्थिक असमानता — से निपटने में इनकी सीमाएँ अब स्पष्ट रूप से सामने आ गई हैं। उन्होंने जोर दिया कि जब दुनिया की वास्तविकताएँ बदल जाती हैं, लेकिन निर्णय-तंत्र स्थिर बने रहते हैं, तो यह अंतर और गहरा होता जाता है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब BRICS, G20 और SCO जैसे मंचों पर भारत सक्रिय रूप से बहुपक्षीय सुधारों की वकालत करता रहा है। मोदी के इस वक्तव्य को उस व्यापक कूटनीतिक रुख की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।

भारत की भूमिका और माँग

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि भारत का जोर वैश्विक संस्थानों को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और जवाबदेह बनाने पर है। उन्होंने कहा कि नई शक्तियाँ उभर रही हैं, नई आवाज़ें अपनी भागीदारी की माँग कर रही हैं और नई समस्याओं के लिए नए समाधान चाहिए।

आगे क्या

NDTV वर्ल्ड समिट में दिया गया यह भाषण ऐसे वक्त पर आया है जब भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की माँग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ज़ोर पकड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैश्विक सुधार-एजेंडे को आगे बढ़ाने का भारत का सुचिंतित कूटनीतिक संदेश है, जो आने वाले बहुपक्षीय संवादों की दिशा तय कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन NDTV जैसे वैश्विक मंच पर इसे 'व्यवस्थाओं के बीच की दुनिया' के रूपक से पेश करना एक सुचिंतित कूटनीतिक संदेश है। विरोधाभास यह है कि भारत खुद G20 की अध्यक्षता और BRICS विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्हीं बहुपक्षीय ढाँचों पर निर्भर है जिनकी वह आलोचना करता है। असली सवाल यह है कि भारत केवल सुधार का आह्वान करेगा या ठोस वैकल्पिक प्रस्ताव भी सामने रखेगा — क्योंकि बिना विशिष्ट एजेंडे के, ये टिप्पणियाँ वैश्विक सहानुभूति तो जीत सकती हैं, लेकिन संस्थागत बदलाव नहीं ला सकतीं।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NDTV वर्ल्ड समिट में पीएम मोदी ने वैश्विक व्यवस्था पर क्या कहा?
पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था और उसके संस्थान तेज़ी से बदलती दुनिया के साथ कदमताल करने में विफल रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को 'व्यवस्थाओं के बीच की दुनिया' कहा, जहाँ आज की वास्तविकताओं और पुराने निर्णय-तंत्र के बीच की खाई लगातार बढ़ रही है।
पीएम मोदी के अनुसार वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के क्या कारण हैं?
मोदी के अनुसार, लोगों की बदलती आकांक्षाएँ, नई आर्थिक शक्तियों का उभार और तकनीक द्वारा समाज व अर्थव्यवस्था के रूपांतरण ने वैश्विक बदलाव को अपरिहार्य बना दिया है। जिन देशों को मूल वैश्विक व्यवस्था में प्रतिनिधित्व नहीं मिला था, वे अब वैश्विक मंच पर अपना स्थान माँग रहे हैं।
भारत वैश्विक संस्थानों में क्या सुधार चाहता है?
भारत चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और जवाबदेह बनाया जाए। पीएम मोदी ने कहा कि नई शक्तियों और नई आवाज़ों को इन संस्थानों में उचित भागीदारी मिलनी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बारे में मोदी ने क्या कहा?
मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना संवाद, सहयोग और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों पर की गई थी, जो द्वितीय विश्व युद्ध के सबक पर आधारित थे। हालाँकि, उन्होंने माना कि तब से दुनिया में व्यापक बदलाव हुए हैं और इन संस्थानों की सीमाएँ अब स्पष्ट रूप से सामने आ गई हैं।
मोदी के इस भाषण का कूटनीतिक महत्व क्या है?
यह भाषण भारत की उस दीर्घकालिक कूटनीतिक माँग की पुनरावृत्ति है जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता शामिल है। BRICS, G20 और SCO जैसे मंचों पर भारत की सक्रियता के साथ जोड़कर देखें, तो यह वैश्विक सुधार-एजेंडे को आगे बढ़ाने का सुचिंतित संदेश है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले