जीएमसी का ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत ‘ग्रीन गांधीनगर’ के उद्देश्यों को पूरा करना
सारांश
Key Takeaways
- जीएमसी ने ग्रीन गांधीनगर के लिए वर्मी कम्पोस्ट प्लांट स्थापित किया है।
- कचरे से जैविक खाद बनाने का प्रयास कर रहा है।
- यह पहल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रही है।
- जैविक खाद का उपयोग स्थानीय बगीचों और खेतों में किया जाता है।
- सभी किसानों के लिए उच्च गुणवत्ता की खाद उपलब्ध है।
गांधीनगर, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में, गांधीनगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (जीएमसी) ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत ‘ग्रीन गांधीनगर’ के सपने को साकार करने में एक अहम भूमिका निभा रहा है।
जीएमसी ने शहर में उत्पन्न कचरे को जैविक खाद में परिवर्तित कर जीरो वेस्ट मॉडल की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके लिए एक अत्याधुनिक वर्मी कम्पोस्ट प्लांट स्थापित किया गया है, जहां आवासीय क्षेत्रों, होटलों और सब्जी मंडियों से प्राप्त गीले कचरे को वैज्ञानिक तरीके से जैविक खाद में बदला जाता है।
गांधीनगर के इस वर्मी कम्पोस्ट प्लांट के इंचार्ज, भीमा भाई खराड़ी ने बताया कि किचन वेस्ट, गार्डन वेस्ट और सब्जी वेस्ट यहां एकत्र किया जाता है। इसे एकत्रित कर 15 से 25 दिन तक रखकर पानी छानते हैं, उसके बाद इसे सड़ने दिया जाता है और फिर पीसकर केंचुओं को डालते हैं। इस प्रक्रिया के बाद 15 दिन में खाद तैयार हो जाती है।
जीएमसी प्रतिदिन करीब 100 मीट्रिक टन कचरा इकट्ठा करता है और इससे उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कंपोस्ट तैयार की जाती है। इस जैविक खाद का उपयोग न केवल शहर के हरित क्षेत्र, बगीचों और नर्सरियों में किया जाता है, बल्कि आसपास के किसानों को भी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे सरकार के प्राकृतिक खेती अभियान को भी समर्थन मिल रहा है।
जीएमसी के कमिश्नर जेएन वाघेला ने बताया कि इस वर्मी कम्पोस्ट प्लांट की वार्षिक क्षमता 2000 टन से अधिक है और यहां उच्च गुणवत्ता की केंचुए वाली खाद बनाई जाती है। गांधीनगर और उसके आसपास के क्षेत्रों के किसान इसकी खरीदारी करते हैं।
गांधीनगर महानगरपालिका अपने वर्मी कम्पोस्ट प्लांट में तैयार जैविक खाद की ब्रांडिंग की प्रक्रिया में भी है, ताकि इसकी आय बढ़ सके और लोगों को बेहतर खाद मिल सके।
जीएमसी का कचरे से जैविक खाद बनाने का यह प्रयास पूरे गुजरात में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक बचत का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।