गोपालनंद सरस्वती की माँग: गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध, गाय को मिले संवैधानिक 'राष्ट्र माता' का दर्जा
सारांश
मुख्य बातें
धर्मगुरु गोपालनंद सरस्वती ने 25 जुलाई को सूरत में एक बातचीत के दौरान देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और गाय को संवैधानिक रूप से 'राष्ट्र माता' घोषित करने की माँग दोहराई। उन्होंने कहा कि इसी लक्ष्य को लेकर 'गौ सम्मान आह्वान अभियान' चलाया जा रहा है, जिसके तहत देशभर में बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर संग्रह किया जा रहा है।
अभियान की पृष्ठभूमि और माँगें
गोपालनंद सरस्वती ने कहा कि स्वतंत्रता के 78 वर्ष बीत जाने के बाद भी भारत में गोवध पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका है और उनके अनुसार वर्तमान में गोहत्या की घटनाएँ पहले की तुलना में अधिक हो रही हैं। उन्होंने माँग की कि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गोवध निषेध संबंधी सख्त कानून लागू किए जाएँ और हर आयु वर्ग के गोवंश की हत्या पर पूर्ण रोक लगे।
इसके अतिरिक्त उन्होंने चारा नीति, गोचर भूमि नीति और पंचगव्य नीति बनाए जाने की भी माँग की। उनका दावा है कि इन नीतियों से भारत की कृषि व्यवस्था मज़बूत होगी, देश आरोग्य की दिशा में आगे बढ़ेगा और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।
हस्ताक्षर अभियान का लक्ष्य
गोपालनंद सरस्वती ने बताया कि अभियान के पहले चरण में सवा पाँच करोड़ हस्ताक्षर सरकार को सौंपे जा चुके हैं। दूसरे चरण में 15 करोड़ हस्ताक्षर एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि इसके बाद भी माँगें पूरी नहीं होती हैं, तो तीसरे चरण में 20 करोड़ और हस्ताक्षर जुटाए जाएँगे। इस प्रकार कुल 40 करोड़ से अधिक नागरिकों के समर्थन के साथ सरकार से गोवध पर पूर्ण प्रतिबंध का आग्रह किया जाएगा।
अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर प्रतिक्रिया
अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान चोरी के मामले पर उन्होंने कहा कि चोरी चाहे किसी मंदिर में हो या किसी दुकान में, दोनों ही अपराध हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए वहाँ चोरी की घटना से लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं। उन्होंने माँग की कि मामले की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों को कड़ी सज़ा दी जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राम मंदिर में प्राप्त दानराशि का उपयोग देशभर की गौशालाओं के लिए किया जाए, अथवा राम मंदिर ट्रस्ट स्वयं एक विशाल गौशाला स्थापित करे।
मणिशंकर अय्यर के बयान पर टिप्पणी
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं को निडर बताया और शरजील इमाम के मामले का उल्लेख किया — गोपालनंद सरस्वती ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से जेल में है तो उसके पीछे निश्चित रूप से कोई आधार होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में कई बार सभी साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए जाते, लेकिन बिना किसी आधार के किसी को इतने लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
निर्भीकता और विकास पर विचार
युवाओं की निडरता के सवाल पर उन्होंने कहा कि निर्भीकता केवल युवाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए — बल्कि बच्चों, बुज़ुर्गों, समाज और शासन, सभी में यह भाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्य और सात्विक मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति स्वाभाविक रूप से निडर रहता है। उनके अनुसार एक निर्भीक भारत ही विकास के मार्ग पर तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।