गोपालगंज में फूड पॉइज़निंग: 'फेंसा' खाने के बाद 10 बच्चों समेत 12 बीमार, सदर अस्पताल में इलाज जारी
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के गोपालगंज जिले के कृतपुरा गाँव में 2 जुलाई को फूड पॉइज़निंग का गंभीर मामला सामने आया, जहाँ पारंपरिक व्यंजन 'फेंसा' के सेवन के बाद एक ही परिवार के 10 बच्चों सहित कुल 12 लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सभी पीड़ितों को पहले बैकुंठपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, और वहाँ से प्राथमिक उपचार के बाद सदर अस्पताल रेफर किया गया, जहाँ चिकित्सकों के अनुसार सभी की स्थिति अब खतरे से बाहर है।
घटनाक्रम: कैसे हुई फूड पॉइज़निंग
बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के कृतपुरा गाँव निवासी अनिल सहनी के घर गाय ने बछड़े को जन्म दिया था। इस खुशी के अवसर पर परिवार ने गाय के शुरुआती दूध — जिसे स्थानीय भाषा में 'खीस' या 'फेंसा' कहते हैं — से पारंपरिक व्यंजन तैयार किया और पड़ोसी परिवारों को भी परोसा। बुधवार रात जब बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों ने यह व्यंजन खाया, तो कुछ ही घंटों में उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हो गई, जिससे परिवार में अफरातफरी मच गई।
बीमार पड़ने वालों की सूची
फूड पॉइज़निंग की चपेट में आने वाले पीड़ितों में प्रिया कुमारी, सिमरन कुमारी, प्रियांशु कुमारी, ऋषभ कुमार, अभिराज कुमार, मोनालिसा कुमारी, ऋतिक कुमार, अतुल कुमार, मनीषा देवी और राजनती देवी सहित कुल 12 लोग शामिल हैं। परिजनों ने सभी को तत्काल बैकुंठपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया, जहाँ स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें सदर अस्पताल रेफर कर दिया।
चिकित्सकों की प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य सलाह
सदर अस्पताल में डॉ. पंकज कुमार की देखरेख में सभी पीड़ितों का उपचार किया जा रहा है। गुरुवार को डॉ. कुमार ने बताया कि समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से सभी मरीजों की हालत में लगातार सुधार हो रहा है। उन्होंने लोगों को चेतावनी दी कि बरसात और उमस के मौसम में बछड़ा जन्म के तुरंत बाद प्राप्त दूध से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें, क्योंकि यह दूध पाचन तंत्र के लिए हानिकारक हो सकता है।
फेंसा क्या है और खतरा क्यों
चिकित्सकों के अनुसार, 'फेंसा' या 'खीस' गाय के प्रसव के तुरंत बाद निकलने वाला गाढ़ा दूध होता है, जिसमें कोलोस्ट्रम की अधिक मात्रा होती है। यह नवजात बछड़े के लिए पोषणकारी होता है, किंतु मानव पाचन तंत्र इसे पचाने में असमर्थ हो सकता है — विशेषकर जब इसे पकाकर खाया जाए। यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित इस पारंपरिक प्रथा से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों की ओर ध्यान दिलाती है।
आगे की स्थिति
फिलहाल सभी 12 मरीज सदर अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस घटना की जाँच और ग्रामीणों को जागरूक करने के प्रयास अपेक्षित हैं।