2 जुलाई 2026
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गोपालगंज में फूड पॉइज़निंग: 'फेंसा' खाने के बाद 10 बच्चों समेत 12 बीमार, सदर अस्पताल में इलाज जारी

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गोपालगंज में फूड पॉइज़निंग: 'फेंसा' खाने के बाद 10 बच्चों समेत 12 बीमार, सदर अस्पताल में इलाज जारी

सारांश

बिहार के गोपालगंज में गाय के प्रसव के बाद बने पारंपरिक व्यंजन 'फेंसा' ने 10 बच्चों समेत 12 लोगों को बीमार कर दिया। समय पर अस्पताल पहुँचने से सभी खतरे से बाहर हैं, लेकिन यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित इस परंपरा के स्वास्थ्य जोखिमों को उजागर करती है।

मुख्य बातें

बिहार के गोपालगंज जिले के कृतपुरा गाँव में 2 जुलाई को फूड पॉइज़निंग का मामला सामने आया।
पारंपरिक व्यंजन 'फेंसा' खाने के बाद 10 बच्चों समेत कुल 12 लोग बीमार पड़े।
सभी पीड़ितों को पहले बैकुंठपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र , फिर सदर अस्पताल रेफर किया गया।
पंकज कुमार की देखरेख में इलाज जारी; सभी की स्थिति खतरे से बाहर ।
चिकित्सकों ने बरसात के मौसम में बछड़ा जन्म के तुरंत बाद के दूध से बने खाद्य पदार्थ न खाने की सलाह दी।

बिहार के गोपालगंज जिले के कृतपुरा गाँव में 2 जुलाई को फूड पॉइज़निंग का गंभीर मामला सामने आया, जहाँ पारंपरिक व्यंजन 'फेंसा' के सेवन के बाद एक ही परिवार के 10 बच्चों सहित कुल 12 लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सभी पीड़ितों को पहले बैकुंठपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, और वहाँ से प्राथमिक उपचार के बाद सदर अस्पताल रेफर किया गया, जहाँ चिकित्सकों के अनुसार सभी की स्थिति अब खतरे से बाहर है।

घटनाक्रम: कैसे हुई फूड पॉइज़निंग

बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के कृतपुरा गाँव निवासी अनिल सहनी के घर गाय ने बछड़े को जन्म दिया था। इस खुशी के अवसर पर परिवार ने गाय के शुरुआती दूध — जिसे स्थानीय भाषा में 'खीस' या 'फेंसा' कहते हैं — से पारंपरिक व्यंजन तैयार किया और पड़ोसी परिवारों को भी परोसा। बुधवार रात जब बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों ने यह व्यंजन खाया, तो कुछ ही घंटों में उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हो गई, जिससे परिवार में अफरातफरी मच गई।

बीमार पड़ने वालों की सूची

फूड पॉइज़निंग की चपेट में आने वाले पीड़ितों में प्रिया कुमारी, सिमरन कुमारी, प्रियांशु कुमारी, ऋषभ कुमार, अभिराज कुमार, मोनालिसा कुमारी, ऋतिक कुमार, अतुल कुमार, मनीषा देवी और राजनती देवी सहित कुल 12 लोग शामिल हैं। परिजनों ने सभी को तत्काल बैकुंठपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया, जहाँ स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें सदर अस्पताल रेफर कर दिया।

चिकित्सकों की प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य सलाह

सदर अस्पताल में डॉ. पंकज कुमार की देखरेख में सभी पीड़ितों का उपचार किया जा रहा है। गुरुवार को डॉ. कुमार ने बताया कि समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से सभी मरीजों की हालत में लगातार सुधार हो रहा है। उन्होंने लोगों को चेतावनी दी कि बरसात और उमस के मौसम में बछड़ा जन्म के तुरंत बाद प्राप्त दूध से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें, क्योंकि यह दूध पाचन तंत्र के लिए हानिकारक हो सकता है।

फेंसा क्या है और खतरा क्यों

चिकित्सकों के अनुसार, 'फेंसा' या 'खीस' गाय के प्रसव के तुरंत बाद निकलने वाला गाढ़ा दूध होता है, जिसमें कोलोस्ट्रम की अधिक मात्रा होती है। यह नवजात बछड़े के लिए पोषणकारी होता है, किंतु मानव पाचन तंत्र इसे पचाने में असमर्थ हो सकता है — विशेषकर जब इसे पकाकर खाया जाए। यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित इस पारंपरिक प्रथा से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों की ओर ध्यान दिलाती है।

आगे की स्थिति

फिलहाल सभी 12 मरीज सदर अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस घटना की जाँच और ग्रामीणों को जागरूक करने के प्रयास अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान लगभग अनुपस्थित है। बरसात के मौसम में जब खाद्य संदूषण का खतरा वैसे भी बढ़ जाता है, ऐसे में यह चूक और घातक हो सकती थी। राज्य स्वास्थ्य तंत्र को इस परंपरा से जुड़े जोखिमों पर सक्रिय सामुदायिक संवाद की ज़रूरत है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फेंसा क्या होता है और यह फूड पॉइज़निंग का कारण कैसे बना?
'फेंसा' गाय के प्रसव के तुरंत बाद निकलने वाले गाढ़े दूध (कोलोस्ट्रम) से बना पारंपरिक व्यंजन है। यह दूध नवजात बछड़े के लिए पोषणकारी होता है, लेकिन इसमें मौजूद तत्व मानव पाचन तंत्र के लिए हानिकारक हो सकते हैं, जिससे उल्टी और दस्त जैसे फूड पॉइज़निंग के लक्षण उत्पन्न होते हैं।
गोपालगंज फूड पॉइज़निंग में कितने लोग बीमार हुए और उनकी स्थिति क्या है?
कुल 12 लोग बीमार पड़े, जिनमें 10 बच्चे शामिल हैं। डॉ. पंकज कुमार के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से सभी की स्थिति अब खतरे से बाहर है और लगातार सुधार हो रहा है।
पीड़ितों को कहाँ भर्ती कराया गया?
सभी पीड़ितों को पहले बैकुंठपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें गोपालगंज सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहाँ डॉ. पंकज कुमार की देखरेख में सभी का इलाज जारी है।
डॉक्टरों ने इस तरह की फूड पॉइज़निंग से बचने के लिए क्या सलाह दी?
डॉ. पंकज कुमार ने लोगों से अपील की है कि बरसात और उमस के मौसम में बछड़े के जन्म के तुरंत बाद प्राप्त दूध से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। बासी भोजन से भी इस मौसम में परहेज करना चाहिए।
यह घटना किस गाँव की है और परिवार ने फेंसा क्यों बनाया था?
यह घटना बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के कृतपुरा गाँव की है। ग्रामीण अनिल सहनी के घर गाय के बछड़ा देने की खुशी में परिवार ने परंपरानुसार शुरुआती दूध से फेंसा बनाकर पड़ोसियों में भी बाँटा, जिसके सेवन के बाद सभी बीमार पड़ गए।
राष्ट्र प्रेस
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