26 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सिडबी को सरकार का निर्देश: ग्रामीण-अर्ध शहरी एमएसएमई को आरआरबी नेटवर्क से मिलेगा अधिक ऋण

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सिडबी को सरकार का निर्देश: ग्रामीण-अर्ध शहरी एमएसएमई को आरआरबी नेटवर्क से मिलेगा अधिक ऋण

सारांश

केंद्र सरकार ने सिडबी को निर्देश दिया है कि वह आरआरबी नेटवर्क का उपयोग करते हुए ग्रामीण और अर्ध-शहरी एमएसएमई तक ऋण पहुँच बढ़ाए। तीन आरआरबी में पायलट सफल रहने के बाद अब डिजिटल सह-वित्तपोषण मॉडल का व्यापक विस्तार होगा — जिसका लक्ष्य स्थानीय रोजगार और ग्रामीण विनिर्माण को गति देना है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 26 अगस्त को सिडबी को निर्देश दिया कि वह ग्रामीण और अर्ध-शहरी एमएसएमई तक ऋण पहुँच बढ़ाए।
डीएफएस सचिव संजय लोहिया ने सिडबी और आरआरबी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।
तीन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में सह-वित्तपोषण मॉडल का पायलट सफल; अब और बैंकों तक विस्तार की योजना।
सिडबी का डिजिटल सह-वित्तपोषण मंच पूरी तरह कागजरहित — ऋण राशि सीधे आवेदक के खाते में।
आरआरबी को कृषि ऋण पर निर्भरता घटाकर एमएसएमई ऋण पोर्टफोलियो में विविधता लाने का सुझाव।
पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद।

केंद्र सरकार ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) को निर्देश दिया है कि वह देशभर के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तक ऋण की पहुँच बढ़ाने के लिए अपनी गतिविधियों का विस्तार करे। इस उद्देश्य के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के व्यापक नेटवर्क को माध्यम बनाया जाएगा। 26 अगस्त को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

बैठक में क्या हुआ

वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव संजय लोहिया ने सिडबी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि सिडबी को एमएसएमई की वित्तीय जरूरतों की गहरी समझ है, जबकि आरआरबी की पहुँच देश के छोटे शहरों, कस्बों और गाँवों तक है। दोनों संस्थानों की ताकतों को एक साथ जोड़ने से ग्रामीण उद्यमियों तक ऋण प्रवाह में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

आरआरबी को क्या फायदा मिलेगा

लोहिया ने यह भी रेखांकित किया कि इस पहल से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अपने ऋण पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अवसर मिलेगा। कृषि ऋण पर अत्यधिक निर्भरता के बजाय एमएसएमई को ऋण देने से उनकी व्यावसायिक स्थिरता मजबूत होगी। साथ ही, नियम-आधारित डिजिटल अंडरराइटिंग प्रणाली के उपयोग से परिसंपत्तियों की गुणवत्ता बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।

डेटा और डिजिटल मंच की भूमिका

बैठक में एमएसएमई क्लस्टरों से जुड़े आँकड़ों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि सूक्ष्म और लघु इकाइयों का बेहतर डेटा उपलब्ध होने पर लक्षित ऋण योजनाएँ तैयार करना और बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता पहुँचाना आसान होगा।

सिडबी द्वारा विकसित सह-वित्तपोषण ऋण उत्पत्ति मंच पूरी तरह डिजिटल है — ऋण आवेदन से लेकर स्वीकृति और वितरण तक की प्रक्रिया कागजरहित है। पात्र आवेदकों को आवश्यक जानकारी जमा करने के बाद बहुत कम समय में सैद्धांतिक स्वीकृति मिल सकती है और ऋण राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है — शाखा में जाने की जरूरत नहीं।

पायलट परिणाम और विस्तार की योजना

सरकारी बयान के अनुसार, तीन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में इस सह-वित्तपोषण मॉडल के पायलट क्रियान्वयन से उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। इसी सफलता के आधार पर अब इस कार्यक्रम को और अधिक आरआरबी तक विस्तारित करने की योजना बनाई जा रही है। सिडबी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने भी आरआरबी से इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

सरकार ने आरआरबी को यह भी सुझाव दिया कि वे भारत को अगली पीढ़ी के विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाएँ और राज्य सरकारों के रोजगार मेलों में शामिल होकर एमएसएमई उद्यमियों के बीच वित्तीय जागरूकता फैलाएँ। इस पहल से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन, स्थानीय विनिर्माण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन की है — क्योंकि ग्रामीण एमएसएमई को ऋण देने की घोषणाएँ पहले भी होती रही हैं और जमीन पर अंतर सीमित रहा है। तीन आरआरबी में पायलट की 'उत्साहजनक' सफलता का कोई ठोस आँकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया, जो पारदर्शिता की दृष्टि से एक कमी है। डिजिटल अंडरराइटिंग और कागजरहित वितरण की अवधारणा आशाजनक है, परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी की बाधाएँ इसकी व्यापक सफलता की असली कसौटी होंगी।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकार ने सिडबी को क्या निर्देश दिया है?
केंद्र सरकार ने सिडबी को निर्देश दिया है कि वह क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के नेटवर्क का उपयोग करते हुए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में एमएसएमई को अधिक ऋण उपलब्ध कराए। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों और उद्यमियों तक वित्तीय सहायता प्रभावी ढंग से पहुँचाना है।
सिडबी और आरआरबी का सह-वित्तपोषण मॉडल कैसे काम करता है?
सिडबी का डिजिटल सह-वित्तपोषण ऋण उत्पत्ति मंच पूरी तरह कागजरहित है — ऋण आवेदन से लेकर स्वीकृति और वितरण तक की प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। पात्र आवेदकों को शाखा में जाए बिना ऋण राशि सीधे उनके बैंक खाते में मिलती है।
क्या यह मॉडल पहले कहीं आजमाया गया है?
हाँ, तीन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में इस मॉडल का पायलट क्रियान्वयन किया गया, जिसके परिणाम उत्साहजनक बताए गए हैं। इसी सफलता के आधार पर अब इसे और अधिक आरआरबी तक विस्तारित करने की योजना है।
इस पहल से आरआरबी को क्या फायदा होगा?
इस पहल से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अपने ऋण पोर्टफोलियो में विविधता लाने का मौका मिलेगा — कृषि ऋण पर अत्यधिक निर्भरता कम होगी और एमएसएमई ऋण से उनकी व्यावसायिक गतिविधियाँ मजबूत होंगी। नियम-आधारित डिजिटल अंडरराइटिंग से परिसंपत्तियों की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहेगी।
इस कदम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म व लघु उद्यमों की वित्तीय जरूरतें पूरी होंगी, जिससे रोजगार सृजन, स्थानीय विनिर्माण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले