सिडबी को सरकार का निर्देश: ग्रामीण-अर्ध शहरी एमएसएमई को आरआरबी नेटवर्क से मिलेगा अधिक ऋण
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) को निर्देश दिया है कि वह देशभर के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तक ऋण की पहुँच बढ़ाने के लिए अपनी गतिविधियों का विस्तार करे। इस उद्देश्य के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के व्यापक नेटवर्क को माध्यम बनाया जाएगा। 26 अगस्त को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
बैठक में क्या हुआ
वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव संजय लोहिया ने सिडबी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि सिडबी को एमएसएमई की वित्तीय जरूरतों की गहरी समझ है, जबकि आरआरबी की पहुँच देश के छोटे शहरों, कस्बों और गाँवों तक है। दोनों संस्थानों की ताकतों को एक साथ जोड़ने से ग्रामीण उद्यमियों तक ऋण प्रवाह में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
आरआरबी को क्या फायदा मिलेगा
लोहिया ने यह भी रेखांकित किया कि इस पहल से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अपने ऋण पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अवसर मिलेगा। कृषि ऋण पर अत्यधिक निर्भरता के बजाय एमएसएमई को ऋण देने से उनकी व्यावसायिक स्थिरता मजबूत होगी। साथ ही, नियम-आधारित डिजिटल अंडरराइटिंग प्रणाली के उपयोग से परिसंपत्तियों की गुणवत्ता बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।
डेटा और डिजिटल मंच की भूमिका
बैठक में एमएसएमई क्लस्टरों से जुड़े आँकड़ों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि सूक्ष्म और लघु इकाइयों का बेहतर डेटा उपलब्ध होने पर लक्षित ऋण योजनाएँ तैयार करना और बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता पहुँचाना आसान होगा।
सिडबी द्वारा विकसित सह-वित्तपोषण ऋण उत्पत्ति मंच पूरी तरह डिजिटल है — ऋण आवेदन से लेकर स्वीकृति और वितरण तक की प्रक्रिया कागजरहित है। पात्र आवेदकों को आवश्यक जानकारी जमा करने के बाद बहुत कम समय में सैद्धांतिक स्वीकृति मिल सकती है और ऋण राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है — शाखा में जाने की जरूरत नहीं।
पायलट परिणाम और विस्तार की योजना
सरकारी बयान के अनुसार, तीन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में इस सह-वित्तपोषण मॉडल के पायलट क्रियान्वयन से उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। इसी सफलता के आधार पर अब इस कार्यक्रम को और अधिक आरआरबी तक विस्तारित करने की योजना बनाई जा रही है। सिडबी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने भी आरआरबी से इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
सरकार ने आरआरबी को यह भी सुझाव दिया कि वे भारत को अगली पीढ़ी के विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाएँ और राज्य सरकारों के रोजगार मेलों में शामिल होकर एमएसएमई उद्यमियों के बीच वित्तीय जागरूकता फैलाएँ। इस पहल से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन, स्थानीय विनिर्माण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।