5 जुलाई 2026
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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: भरूच में 130 मीटर स्टील पुल का स्पैन पूरा, 330 मीटर में से 230 मीटर तैयार

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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: भरूच में 130 मीटर स्टील पुल का स्पैन पूरा, 330 मीटर में से 230 मीटर तैयार

सारांश

भरूच के ट्रालसी गांव के पास मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का 130 मीटर स्टील स्पैन 16 मई को पूरा हुआ — 330 मीटर के नियोजित पुल में से 230 मीटर तैयार। 2,900 मीट्रिक टन का यह स्पैन DFCCIL के माल ढुलाई गलियारे को पार करता है और देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना की रफ़्तार का प्रमाण है।

मुख्य बातें

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत भरूच के ट्रालसी गांव के पास 130 मीटर स्टील स्पैन का प्रक्षेपण 16 मई को पूरा हुआ।
योजनाबद्ध 330 मीटर पुल में से अब तक 230 मीटर का निर्माण पूरा।
पूर्ण पुल का कुल वजन लगभग 6,100 मीट्रिक टन होगा; 100 वर्षों के परिचालन जीवनकाल के लिए डिज़ाइन।
पुल DFCCIL के पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे के सूरत-वडोदरा खंड को पार करता है।
स्टील पुर्जे उमरगम की कार्बन फैक्ट्री कार्यशाला में निर्मित; प्रत्येक जैक में 250 टन धकेलने की क्षमता।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने गुजरात के भरूच जिले में एक अहम इंजीनियरिंग पड़ाव पार कर लिया है — ट्रालसी गांव के निकट निर्माणाधीन 330 मीटर लंबे स्टील पुल के 130 मीटर वाले निरंतर स्पैन का प्रक्षेपण कार्य 16 मई को सफलतापूर्वक पूरा हो गया। अधिकारियों के अनुसार, अब तक कुल 230 मीटर का ढांचा तैयार हो चुका है।

पुल की संरचना और तकनीकी विशेषताएं

यह पुल तीन स्पैन वाला स्टील ढांचा है, जिसमें 100+130 मीटर का एक निरंतर स्पैन और 100 मीटर का एक साधारण रूप से समर्थित स्पैन शामिल है। नवनिर्मित 130 मीटर लंबा स्पैन लगभग 18 मीटर ऊंचा और 15.5 मीटर चौड़ा है, जिसका वजन करीब 2,900 मीट्रिक टन है।

इससे पहले मार्च में ही 1,500 मीट्रिक टन वजनी 100 मीटर लंबे साधारण रूप से समर्थित स्पैन को स्थापित किया जा चुका था। शेष 100 मीटर के निरंतर भाग — जिसका वजन लगभग 1,600 मीट्रिक टन है — को भी उसी स्थान पर स्थापित किया जाएगा। तीनों खंड पूर्ण होने पर पुल की संपूर्ण संरचना का वजन लगभग 6,100 मीट्रिक टन होगा।

निर्माण प्रक्रिया और तकनीक

130 मीटर के स्पैन को जमीन से लगभग 14 मीटर की ऊंचाई पर एक अस्थायी तिपाई पर इकट्ठा किया गया, और फिर दो अर्ध-स्वचालित जैक द्वारा समर्थित एक स्वचालित प्रक्षेपण प्रणाली के ज़रिए आगे बढ़ाया गया। प्रत्येक जैक में मैक-अलॉय बार के माध्यम से 250 टन तक धकेलने की क्षमता थी।

निर्माण में लगभग 1,21,373 टॉर-शियर टाइप हाई स्ट्रेंथ (TTHS) बोल्ट, धातु के बियरिंग और C5 सिस्टम सुरक्षात्मक पेंटिंग का उपयोग किया गया। पुल के सभी स्टील पुर्जे उमरगम स्थित कार्बन फैक्ट्री कार्यशाला में निर्मित किए गए हैं।

रणनीतिक महत्व

यह पुल पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे के सूरत और वडोदरा खंडों के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (DFCCIL) की पटरी को पार करता है। गौरतलब है कि यह स्थान दो अत्यंत व्यस्त रेल मार्गों का संगम है — एक ओर बुलेट ट्रेन का भविष्य, दूसरी ओर देश की माल ढुलाई की रीढ़।

पुल को 100 वर्षों के परिचालन जीवनकाल के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो इसे भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर इतिहास में दीर्घकालिक निवेश के रूप में स्थापित करता है।

आगे क्या

शेष 100 मीटर के निरंतर स्पैन की स्थापना के बाद पुल की पूरी संरचना तैयार होगी। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है, और भरूच में यह इंजीनियरिंग उपलब्धि इसके क्रियान्वयन में एक ठोस कदम है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरूच में बुलेट ट्रेन का 130 मीटर स्टील पुल क्या है?
यह मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत गुजरात के भरूच जिले में ट्रालसी गांव के पास निर्मित 330 मीटर लंबे स्टील पुल का हिस्सा है। इसका 130 मीटर का निरंतर स्पैन 16 मई को पूरा हुआ और यह DFCCIL के पश्चिमी माल ढुलाई गलियारे को पार करता है।
330 मीटर के पुल में से अब तक कितना निर्माण पूरा हुआ है?
अधिकारियों के अनुसार 330 मीटर के नियोजित पुल में से 230 मीटर का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष 100 मीटर के निरंतर स्पैन की स्थापना अभी बाकी है, जिसके बाद पूर्ण संरचना का वजन लगभग 6,100 मीट्रिक टन होगा।
इस पुल को बनाने में कौन-सी तकनीक इस्तेमाल हुई?
130 मीटर के स्पैन को जमीन से 14 मीटर ऊंचाई पर अस्थायी तिपाई पर असेंबल कर स्वचालित प्रक्षेपण प्रणाली से आगे बढ़ाया गया। इसमें 250 टन क्षमता वाले मैक-अलॉय बार जैक, 1,21,373 TTHS बोल्ट और C5 सिस्टम सुरक्षात्मक पेंटिंग का उपयोग हुआ।
यह पुल कितने वर्षों तक चलेगा और इसके पुर्जे कहां बने?
पुल को 100 वर्षों के परिचालन जीवनकाल के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके सभी स्टील पुर्जे गुजरात के उमरगम स्थित कार्बन फैक्ट्री कार्यशाला में निर्मित किए गए हैं।
यह पुल किस रेल मार्ग के ऊपर से गुजरता है?
यह पुल पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे के सूरत और वडोदरा खंडों के बीच DFCCIL की पटरी को पार करता है। यह भारतीय रेलवे के सक्रिय माल ढुलाई नेटवर्क के ऊपर बुलेट ट्रेन के लिए बनाई जा रही एलिवेटेड संरचना का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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