20 अगस्त 2026
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गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी का फूड डिलीवरी सेक्टर से आग्रह: ईवी अपनाएं, लागत ₹2.5 से घटकर 50 पैसे प्रति किमी होगी

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गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी का फूड डिलीवरी सेक्टर से आग्रह: ईवी अपनाएं, लागत ₹2.5 से घटकर 50 पैसे प्रति किमी होगी

सारांश

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने NRAI के पाँचवें फूड डिलीवरी समिट में फूड सेक्टर को ईवी अपनाने का आह्वान किया — लागत ₹2.5 से 50 पैसे प्रति किमी तक लाने का दावा। साथ ही खाद्य क्षेत्र के ₹7.5 लाख करोड़ तक पहुँचने और 1 करोड़ नौकरियों की संभावना भी रेखांकित की।

मुख्य बातें

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 20 अगस्त 2026 को अहमदाबाद में NRAI के पाँचवें फूड डिलीवरी समिट-2026 में फूड डिलीवरी सेक्टर से ईवी अपनाने का आग्रह किया।
ईवी अपनाने से डिलीवरी लागत ₹2.5 प्रति किमी से घटकर 50 पैसे प्रति किमी तक आ सकती है।
खाद्य क्षेत्र का देश की अर्थव्यवस्था में वर्तमान योगदान लगभग ₹5.69 लाख करोड़ ; भविष्य में ₹7.5 लाख करोड़ तक पहुँचने की उम्मीद।
यह क्षेत्र अभी 75 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार देता है; अनुमान है कि यह संख्या 1 करोड़ से अधिक हो सकती है।
संघवी ने व्यवसायों को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, कच्छ का श्वेत रण, गिर जैसे पर्यटन स्थलों पर उद्यम स्थापित करने का आह्वान किया; राज्य सरकार बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराएगी।
समिट में 30 से अधिक शहरों के 1,500 से अधिक ब्रांडों से 5,000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए।

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 20 अगस्त 2026 को अहमदाबाद में रेस्तरां मालिकों और फूड डिलीवरी ऑपरेटरों से पेट्रोल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह बदलाव डिलीवरी लागत को ₹2.5 प्रति किलोमीटर से घटाकर मात्र 50 पैसे प्रति किलोमीटर तक ला सकता है — यानी लागत में पाँच गुना की कमी।

समिट का मंच और संदर्भ

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) द्वारा आयोजित पाँचवें फूड डिलीवरी समिट-2026 के उद्घाटन सत्र में संघवी ने यह बात कही। यह आयोजन नवीकरणीय ऊर्जा दिवस के अवसर पर हुआ, जिसने ईवी अपनाने की अपील को और प्रासंगिक बनाया। एक दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में 30 से अधिक शहरों के 1,500 से अधिक ब्रांडों से जुड़े 5,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने विभिन्न सत्रों और कार्यशालाओं में भाग लिया।

खाद्य क्षेत्र का आर्थिक योगदान

संघवी ने बताया कि देश की समग्र अर्थव्यवस्था में खाद्य और खाद्य-संबंधी व्यवसायों का योगदान वर्तमान में लगभग ₹5.69 लाख करोड़ है, और आने वाले वर्षों में यह बढ़कर ₹7.5 लाख करोड़ तक पहुँचने की संभावना है। यह क्षेत्र अभी 75 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार दे रहा है और अनुमान है कि भविष्य में यह संख्या 1 करोड़ से ऊपर जा सकती है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बहुत कम क्षेत्र इतने बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन करते हैं।

गुजरात के पर्यटन स्थलों पर नज़र

उपमुख्यमंत्री ने फूड व्यवसायों को प्रमुख महानगरों से परे देखने की सलाह दी। उन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, शिवराजपुर बीच, धारोई बांध, कच्छ का श्वेत रण और गिर जैसे पर्यटन स्थलों पर उद्यम स्थापित करने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इन स्थलों पर आवश्यक बुनियादी ढाँचा और सुविधाएँ उपलब्ध कराएगी — व्यवसायों को पूंजीगत व्यय का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा और वे परिचालन व्यय का प्रबंधन अपनी ज़रूरत के अनुसार कर सकेंगे।

गिफ्ट सिटी में खाद्य क्षेत्र के अवसर

संघवी ने गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी में खाद्य क्षेत्र की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2007 में देखा गया गिफ्ट सिटी का सपना शुरुआत में 'दिव्य सपना' जैसा लगता था, लेकिन आज यह परियोजना वास्तविकता बन चुकी है। यह शहर वैश्विक फिनटेक निवेश और बुलियन व्यापार का एक उभरता केंद्र है, और संघवी के अनुसार, यहाँ खाद्य क्षेत्र के लिए भी व्यापक अवसर मौजूद हैं।

आगे की राह

यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें दोनों ईवी अपनाने को गति देने के लिए नीतिगत प्रोत्साहन दे रही हैं। गौरतलब है कि फूड डिलीवरी क्षेत्र में दोपहिया वाहनों का व्यापक उपयोग होता है, और ईवी में बदलाव से परिचालन लागत में बड़ी बचत के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आ सकती है। राज्य सरकार ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से कच्छ और गिर तक फूड डिलीवरी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहयोग का आश्वासन दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बशर्ते चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वाहनों की अग्रिम लागत का समाधान हो। लेकिन गुजरात के टियर-2 और पर्यटन स्थलों पर जहाँ चार्जिंग नेटवर्क अभी भी विरल है, वहाँ यह बदलाव उतना सरल नहीं होगा जितना मंच से दिखता है। ₹7.5 लाख करोड़ और 1 करोड़ नौकरियों के अनुमान महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन इनकी समयसीमा और सत्यापन तंत्र का कोई उल्लेख नहीं किया गया — जो नीतिगत घोषणाओं में एक परिचित कमज़ोरी है। असली परीक्षा यह होगी कि राज्य सरकार पर्यटन स्थलों पर जो बुनियादी ढाँचे का वादा कर रही है, वह कागज़ से ज़मीन तक कितनी तेज़ी से उतरता है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हर्ष संघवी ने फूड डिलीवरी सेक्टर को ईवी अपनाने की सलाह क्यों दी?
संघवी ने कहा कि ईवी अपनाने से डिलीवरी लागत ₹2.5 प्रति किलोमीटर से घटकर मात्र 50 पैसे प्रति किलोमीटर तक आ सकती है, जिससे व्यवसायों की परिचालन लागत में भारी बचत होगी। इसके अलावा, यह बदलाव पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होगा।
NRAI का पाँचवाँ फूड डिलीवरी समिट-2026 कहाँ और कब हुआ?
यह समिट 20 अगस्त 2026 को अहमदाबाद में नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) द्वारा आयोजित किया गया। इसमें 30 से अधिक शहरों के 1,500 से अधिक ब्रांडों से जुड़े 5,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
भारत के खाद्य क्षेत्र का अर्थव्यवस्था में कितना योगदान है?
संघवी के अनुसार, खाद्य और खाद्य-संबंधी व्यवसायों का देश की अर्थव्यवस्था में वर्तमान योगदान लगभग ₹5.69 लाख करोड़ है। आने वाले वर्षों में यह ₹7.5 लाख करोड़ तक पहुँचने की संभावना है और रोज़गार 75 लाख से बढ़कर 1 करोड़ से अधिक हो सकता है।
गुजरात के किन पर्यटन स्थलों पर फूड बिज़नेस के अवसर बताए गए?
संघवी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, शिवराजपुर बीच, धारोई बांध, कच्छ का श्वेत रण और गिर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन स्थलों पर बुनियादी ढाँचा और सुविधाएँ प्रदान करेगी, जिससे व्यवसायों को पूंजीगत व्यय का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा।
गिफ्ट सिटी में खाद्य क्षेत्र के लिए क्या अवसर हैं?
संघवी ने बताया कि गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी, जो वैश्विक फिनटेक निवेश और बुलियन व्यापार का उभरता केंद्र है, खाद्य क्षेत्र के लिए भी कई अवसर प्रदान करता है। उन्होंने व्यवसायों को वहाँ निवेश करने और अपनी योजनाएँ आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
राष्ट्र प्रेस
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