ज्योतिग्राम योजना: गुजरात के 18,065 गांवों में 24 घंटे बिजली से बदली ग्रामीण जिंदगी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार की ज्योतिग्राम योजना ने राज्य के 18,065 गांवों और 16,000 से अधिक ग्रामीण बस्तियों में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर ग्रामीण जीवन की तस्वीर बदल दी है। बनासकांठा जिले सहित पूरे गुजरात में छोटे कारोबार, डेयरी उद्योग और छात्रों की पढ़ाई पर इस योजना का सकारात्मक असर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम और बुनियादी ढाँचा
गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (GUVNL), वडोदरा की प्रबंध निदेशक शालिनी अग्रवाल के अनुसार, इस योजना के तहत गाँवों में गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुँचाने के लिए 78,000 किलोमीटर से अधिक नई बिजली लाइनें बिछाई गई हैं। इसके साथ ही 18,700 से अधिक ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं और कई नए सब-स्टेशन बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात के समस्त 18,065 गांवों और 16,000 से अधिक ग्रामीण बस्तियों में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति का काम पूरा किया जा चुका है।
आम जनता पर असर: महिला उद्यमी से लेकर डेयरी व्यवसायी तक
बनासकांठा के डीसा तालुका की आशाबेन सांखला ने बताया कि पहले बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण उन्हें अपनी मशीन पर काम बीच में रोकना पड़ता था। अब ज्योतिग्राम योजना के तहत 24 घंटे बिजली मिलने से वह बिना रुकावट काम कर पा रही हैं।
इसी तालुका के डेयरी व्यवसायी प्रकाशभाई देसाई ने बताया कि नियमित बिजली से दूध ठंडा करने और फैट निकालने की मशीनें बेहतर तरीके से चल रही हैं। उनके अनुसार, पहले बिजली की अनिश्चितता के कारण उन्हें और उनसे जुड़े पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, जो अब काफी हद तक समाप्त हो गया है।
शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव
ग्रामीण बिजली आपूर्ति का असर अगली पीढ़ी पर भी पड़ रहा है। नानी गांव, डीसा तालुका के छात्र संजयभाई रावल ने बताया कि पहले कम बिजली आने के कारण पढ़ाई में व्यवधान आता था। अब 24 घंटे बिजली की उपलब्धता से उनकी पढ़ाई सुचारू रूप से हो रही है।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन संसाधनों पर निर्भरता तेज़ी से बढ़ रही है, और निर्बाध बिजली उनकी नींव बनती जा रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना
गौरतलब है कि ग्रामीण भारत में बिजली की अनियमितता दशकों से छोटे उद्योगों और कृषि आधारित व्यवसायों की उत्पादकता को प्रभावित करती रही है। ज्योतिग्राम योजना इस पुरानी समस्या के समाधान का एक व्यावहारिक प्रयास है। डेयरी, कृषि-प्रसंस्करण और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्र, जो बिजली पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं, इस योजना के सबसे बड़े लाभार्थी बन रहे हैं।
क्या होगा आगे
बिजली विभाग के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति बनाए रखने के लिए व्यापक स्तर पर बुनियादी ढाँचे को और सुदृढ़ करने की प्रक्रिया जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियमित रखरखाव और स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण पर ध्यान दिया जाए, तो यह योजना गुजरात के ग्रामीण अर्थतंत्र को दीर्घकाल में और अधिक मजबूत बना सकती है।