22 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ज्योतिग्राम योजना: गुजरात के 18,065 गांवों में 24 घंटे बिजली से बदली ग्रामीण जिंदगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ज्योतिग्राम योजना: गुजरात के 18,065 गांवों में 24 घंटे बिजली से बदली ग्रामीण जिंदगी

सारांश

गुजरात की ज्योतिग्राम योजना अब सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं — यह बनासकांठा की आशाबेन की मशीन है जो बिना रुके चलती है, प्रकाशभाई की डेयरी है जो अब घाटे में नहीं, और संजयभाई की वो रात है जब बत्ती नहीं जाती। 18,065 गाँवों तक 24 घंटे बिजली पहुँचाना — यही असली ग्रामीण रूपांतरण है।

मुख्य बातें

ज्योतिग्राम योजना के तहत गुजरात के 18,065 गांवों और 16,000 से अधिक ग्रामीण बस्तियों में 24 घंटे विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
78,000 किलोमीटर से अधिक नई बिजली लाइनें बिछाई गईं और 18,700 से अधिक ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए।
बनासकांठा के डीसा तालुका में छोटे कारोबारी, डेयरी व्यवसायी और छात्र सभी योजना का लाभ उठा रहे हैं।
डेयरी व्यवसायी प्रकाशभाई देसाई के अनुसार, दूध ठंडा करने और फैट निकालने की मशीनें अब बेहतर चलने से पशुपालकों को होने वाला नुकसान कम हुआ है।
GUVNL की एमडी शालिनी अग्रवाल ने बताया कि बुनियादी ढाँचे को और मज़बूत करने की प्रक्रिया जारी है।

गुजरात सरकार की ज्योतिग्राम योजना ने राज्य के 18,065 गांवों और 16,000 से अधिक ग्रामीण बस्तियों में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर ग्रामीण जीवन की तस्वीर बदल दी है। बनासकांठा जिले सहित पूरे गुजरात में छोटे कारोबार, डेयरी उद्योग और छात्रों की पढ़ाई पर इस योजना का सकारात्मक असर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम और बुनियादी ढाँचा

गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (GUVNL), वडोदरा की प्रबंध निदेशक शालिनी अग्रवाल के अनुसार, इस योजना के तहत गाँवों में गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुँचाने के लिए 78,000 किलोमीटर से अधिक नई बिजली लाइनें बिछाई गई हैं। इसके साथ ही 18,700 से अधिक ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं और कई नए सब-स्टेशन बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात के समस्त 18,065 गांवों और 16,000 से अधिक ग्रामीण बस्तियों में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति का काम पूरा किया जा चुका है।

आम जनता पर असर: महिला उद्यमी से लेकर डेयरी व्यवसायी तक

बनासकांठा के डीसा तालुका की आशाबेन सांखला ने बताया कि पहले बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण उन्हें अपनी मशीन पर काम बीच में रोकना पड़ता था। अब ज्योतिग्राम योजना के तहत 24 घंटे बिजली मिलने से वह बिना रुकावट काम कर पा रही हैं।

इसी तालुका के डेयरी व्यवसायी प्रकाशभाई देसाई ने बताया कि नियमित बिजली से दूध ठंडा करने और फैट निकालने की मशीनें बेहतर तरीके से चल रही हैं। उनके अनुसार, पहले बिजली की अनिश्चितता के कारण उन्हें और उनसे जुड़े पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, जो अब काफी हद तक समाप्त हो गया है।

शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव

ग्रामीण बिजली आपूर्ति का असर अगली पीढ़ी पर भी पड़ रहा है। नानी गांव, डीसा तालुका के छात्र संजयभाई रावल ने बताया कि पहले कम बिजली आने के कारण पढ़ाई में व्यवधान आता था। अब 24 घंटे बिजली की उपलब्धता से उनकी पढ़ाई सुचारू रूप से हो रही है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन संसाधनों पर निर्भरता तेज़ी से बढ़ रही है, और निर्बाध बिजली उनकी नींव बनती जा रही है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना

गौरतलब है कि ग्रामीण भारत में बिजली की अनियमितता दशकों से छोटे उद्योगों और कृषि आधारित व्यवसायों की उत्पादकता को प्रभावित करती रही है। ज्योतिग्राम योजना इस पुरानी समस्या के समाधान का एक व्यावहारिक प्रयास है। डेयरी, कृषि-प्रसंस्करण और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्र, जो बिजली पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं, इस योजना के सबसे बड़े लाभार्थी बन रहे हैं।

क्या होगा आगे

बिजली विभाग के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति बनाए रखने के लिए व्यापक स्तर पर बुनियादी ढाँचे को और सुदृढ़ करने की प्रक्रिया जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियमित रखरखाव और स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण पर ध्यान दिया जाए, तो यह योजना गुजरात के ग्रामीण अर्थतंत्र को दीर्घकाल में और अधिक मजबूत बना सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 किमी लाइनें, 18,700 ट्रांसफार्मर, 18,000 से अधिक गाँव — लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह बुनियादी ढाँचा दीर्घकालिक रखरखाव की कसौटी पर भी खरा उतरता है। भारत में बहुत-सी ग्रामीण बिजली परियोजनाएँ शुरुआती सफलता के बाद रखरखाव के अभाव में कमज़ोर पड़ जाती हैं। डेयरी और लघु उद्योगों तक बिजली पहुँचना ज़रूरी था, लेकिन सेवा की निरंतरता सुनिश्चित करना उससे भी बड़ी चुनौती है। गुजरात मॉडल यदि रखरखाव और स्थानीय क्षमता निर्माण को प्राथमिकता दे, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए एक व्यावहारिक खाका बन सकता है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्योतिग्राम योजना क्या है?
ज्योतिग्राम योजना गुजरात सरकार की एक ग्रामीण विद्युतीकरण पहल है, जिसके तहत राज्य के 18,065 गांवों और 16,000 से अधिक ग्रामीण बस्तियों में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। इसके लिए 78,000 किमी से अधिक नई बिजली लाइनें और 18,700 से अधिक ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं।
ज्योतिग्राम योजना से डेयरी व्यवसायियों को क्या फायदा हुआ?
बनासकांठा के डीसा तालुका के डेयरी व्यवसायी प्रकाशभाई देसाई के अनुसार, नियमित बिजली आपूर्ति से दूध ठंडा करने और फैट निकालने की मशीनें बेहतर तरीके से चल रही हैं। पहले बिजली की अनिश्चितता से उन्हें और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, जो अब काफी हद तक समाप्त हो गया है।
ज्योतिग्राम योजना से छात्रों की पढ़ाई पर क्या असर पड़ा है?
नानी गांव, डीसा तालुका के छात्र संजयभाई रावल ने बताया कि पहले बिजली की कमी के कारण पढ़ाई में बाधा आती थी। अब 24 घंटे बिजली उपलब्ध होने से वह और उनके जैसे ग्रामीण छात्र बिना रुकावट पढ़ाई कर सकते हैं।
गुजरात में ज्योतिग्राम योजना के तहत कितना बुनियादी ढाँचा तैयार किया गया है?
GUVNL की एमडी शालिनी अग्रवाल के अनुसार, योजना के तहत 78,000 किलोमीटर से अधिक नई बिजली लाइनें बिछाई गई हैं, लगभग 18,700 ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं और नए सब-स्टेशन स्थापित किए गए हैं। इससे 18,065 गांवों और 16,000 से अधिक ग्रामीण बस्तियों को विश्वसनीय बिजली मिल रही है।
ज्योतिग्राम योजना से ग्रामीण महिला उद्यमियों को कैसे लाभ मिला?
बनासकांठा की आशाबेन सांखला के अनुसार, पहले बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण उन्हें मशीन पर काम बीच में रोकना पड़ता था, जिससे उत्पादकता प्रभावित होती थी। अब 24 घंटे बिजली मिलने से वह बिना रुकावट काम कर पा रही हैं, जो उनके छोटे कारोबार के लिए बड़ा बदलाव है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले