गुजरात का 'मारी योजना' पोर्टल: 680 सरकारी सेवाएं एक क्लिक पर, CM भूपेंद्र पटेल की ई-गवर्नेंस पहल
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में एक अहम कदम उठाया है — राज्य का 'मारी योजना' पोर्टल अब नागरिकों को 680 से अधिक सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ घर बैठे एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दे रहा है। 26 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति में यह पोर्टल समाज कल्याण से लेकर कृषि, स्वास्थ्य और रोज़गार तक के विभागों को एकीकृत करता है, जिससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की ज़रूरत काफी हद तक समाप्त हो गई है।
पोर्टल में क्या-क्या है
'मारी योजना' पोर्टल पर समाज कल्याण, शिक्षा, कृषि, पशुपालन, खेल, स्वास्थ्य, स्थानीय प्रशासन, महिला विकास, ग्राम विकास, राजस्व विभाग और रोज़गार समेत कई विभागों की 680 से अधिक योजनाएं एकीकृत की गई हैं। नागरिक जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, स्थायी निवास सर्टिफिकेट, जाति प्रमाणपत्र, पेंशन, स्कॉलरशिप और आय प्रमाणपत्र जैसी सेवाएं अब एक ही क्लिक पर प्राप्त कर सकते हैं। गौरतलब है कि पहले इन्हीं कार्यों के लिए नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों में जाकर लंबी कतारों में समय गंवाना पड़ता था।
लाभार्थियों की प्रतिक्रिया
लाभार्थी गिरीश नीलगिरी ने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से काम बेहद सरल हो गया है। उनके अनुसार, 'विधवा पेंशन से लेकर आय प्रमाणपत्र और सीनियर सिटीजन प्रमाणपत्र — ये सभी काम आसानी से और कम समय में यहाँ हो जाते हैं।' एक अन्य लाभार्थी तुषार कुमार पटेल ने कहा कि ऑनलाइन सेवाओं से बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है और 'जीवन प्रमाणपत्र हासिल करने में अब बहुत आसानी हो गई है।'
प्रशासन का नज़रिया
गांधीनगर के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट एवं मामलतदार एम.डी. गोहेल के अनुसार, यह पोर्टल सरकार का एक 'सराहनीय डिजिटल कदम' है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग, पशुपालन और कृषि जैसे विभागों की 680 से अधिक सरकारी योजनाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं और इनके बारे में एक क्लिक पर जानकारी हासिल की जा सकती है।
पोर्टल का मकसद और बदलाव
'मारी योजना' पोर्टल का मुख्य उद्देश्य सरकारी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और समय-कुशल बनाना है। पहले नागरिकों को आवेदन जमा करने, आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी लेने और आवेदन की स्थिति जानने में काफी समय लगता था। अब ये सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन पूरी हो रही हैं, जिससे नागरिकों के समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।
आगे क्या
यह पहल ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार भी डिजिटल इंडिया के तहत राज्यों को ई-गवर्नेंस अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। गुजरात का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बन सकता है, बशर्ते ग्रामीण और कम डिजिटल साक्षर नागरिकों तक इसकी पहुँच सुनिश्चित की जाए।