गुवाहाटी सोना तस्करी: ईडी ने ₹54 करोड़ का 37 किलो सोना जब्त, म्यांमार-UAE रूट और हवाला का खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी जोनल ऑफिस-I ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत अक्षय परशुराम बनसोडे और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ जाँच में 37.064 किलोग्राम सोना — जिसमें 29 बड़े गोल्ड बार और 50 छोटे सोने के टुकड़े शामिल हैं — तथा लगभग 13 ग्राम चाँदी के रंग के धातु के टुकड़े अस्थायी रूप से जब्त किए हैं। इस जब्ती का अनुमानित बाजार मूल्य ₹54 करोड़ से अधिक बताया जा रहा है। यह कार्रवाई असम में अंतरराष्ट्रीय सोना तस्करी के एक संगठित नेटवर्क की जाँच का हिस्सा है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह सोना मूल रूप से असम पुलिस ने 30 जून को गुवाहाटी के खारघुली हतिसिल इलाके में बनसोडे के पास से जब्त किया था। फिलहाल यह सोना गुवाहाटी के कामरूप मेट्रो ट्रेजरी में सुरक्षित रखा हुआ है। ईडी ने कामरूप (मेट्रो) के लतासिल पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर PMLA के अंतर्गत जाँच प्रारंभ की थी।
मूल मामला संगठित रूप से सोने की अवैध आवाजाही, तस्करी के सोने को छिपाने और आपराधिक साजिश से जुड़ा था। ईडी की जाँच इसी आपराधिक प्रकरण की मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित परतों को उघाड़ने पर केंद्रित है।
सिंडिकेट का जाल और कोड-आधारित पहचान प्रणाली
जाँच में सामने आया है कि अक्षय परशुराम बनसोडे कथित तौर पर कई वर्षों से एक अज्ञात व्यक्ति के निर्देश पर पूरे भारत में सोने की ढुलाई का काम कर रहा था। वह अज्ञात व्यक्ति एक कूरियर सिंडिकेट संचालित करता था, जिसमें एक कोड-आधारित पहचान प्रणाली का उपयोग किया जाता था। इसके बदले में बनसोडे को हर महीने तय रकम का भुगतान किया जाता था।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर-पूर्व भारत में सीमापार तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और एजेंसियाँ इस गलियारे पर विशेष नज़र रख रही हैं।
म्यांमार-UAE रूट और हवाला भुगतान
जाँच में यह भी पाया गया है कि जब्त सोना कथित तौर पर म्यांमार और UAE के रास्ते भारत में तस्करी करके लाया गया था। इसका भुगतान हवाला चैनलों के जरिए किया गया था। इसे वैध दिखाने के लिए एक बुलियन रिफाइनिंग कंपनी से जुड़े कुछ व्यापारियों द्वारा तैयार किए गए फर्जी इनवॉइस के माध्यम से औपचारिक बुलियन व्यापार में शामिल करने की कोशिश की गई थी।
गौरतलब है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातकों में से एक है, और इसी माँग का फायदा उठाकर तस्करी नेटवर्क लंबे समय से पड़ोसी देशों के रास्ते अवैध सोना भेजते रहे हैं।
न्यायालय ने जाली दस्तावेज पाए, दावेदार की याचिका खारिज
मामले में मालिकाना हक जताने के लिए कुछ इनवॉइस बिक्री दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किए गए थे। संबंधित न्यायालय ने इनकी जाँच के बाद प्रथम दृष्टया इन्हें जाली पाया और सोना छोड़ने की दावेदार की अर्जी खारिज कर दी।
जाँच में यह भी स्पष्ट हुआ कि न तो बनसोडे और न ही मालिकाना हक का दावा करने वाला व्यक्ति कोई वैध कस्टम क्लीयरेंस सर्टिफिकेट, आयात दस्तावेज या सोने को कानूनी रूप से प्राप्त करने का कोई अन्य प्रमाण पेश कर सका।
आगे क्या होगा
ईडी के अनुसार इस मामले से संबंधित आगे की जाँच अभी जारी है। एजेंसी का ध्यान सिंडिकेट के अज्ञात मास्टरमाइंड की पहचान करने और हवाला भुगतान के नेटवर्क को उजागर करने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में और गिरफ्तारियाँ व संपत्ति जब्ती संभव है।