18 सितंबर 2026
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एचएएल ने तेजस एफओसी कॉन्ट्रैक्ट पूरा किया, मार्क-1ए और एचटीटी-40 डिलीवरी शुरू: सीएमडी रवि के

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एचएएल ने तेजस एफओसी कॉन्ट्रैक्ट पूरा किया, मार्क-1ए और एचटीटी-40 डिलीवरी शुरू: सीएमडी रवि के

सारांश

एचएएल के सीएमडी रवि के ने एक साथ कई बड़े मील के पत्थर साझा किए — तेजस एफओसी कॉन्ट्रैक्ट पूरा, एचटीटी-40 और ध्रुव सिविल वर्जन की डिलीवरी शुरू, 26-27 मार्क-1ए एयरफ्रेम तैयार और सुपर-सुखोई ऑर्डर फाइनल स्टेज में। भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एचएएल का सबसे व्यस्त दिनों में से एक रहा।

मुख्य बातें

एचएएल ने 18 सितंबर 2026 को तेजस एलसीए का एफओसी कॉन्ट्रैक्ट सफलतापूर्वक पूरा किया।
बेसिक ट्रेनर एचटीटी-40 और एएलएच ध्रुव सिविल वर्जन की डिलीवरी आज से आरंभ।
180 मार्क-1ए के लिए 26-27 एयरफ्रेम तैयार; रडार व हथियार इंटीग्रेशन अभी अधूरा, सितंबर में पूरा होने की उम्मीद।
जीई इंजन आपूर्ति अगले वर्ष से बड़े पैमाने पर शुरू होने की उम्मीद; फिलहाल 10 इंजन उपलब्ध।
सुपर-सुखोई आधुनिकीकरण में 40 से अधिक सिस्टम बदले जाने हैं; ऑर्डर फाइनल स्टेज में।
एएलएच ध्रुव के लिए रक्षा मंत्रालय ने नई मंजूरी दी; निर्यात की योजना भी तैयार।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रवि के ने 18 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में घोषणा की कि एचएएल ने तेजस एलसीए का फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस (एफओसी) कॉन्ट्रैक्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और अब मार्क-1ए विमानों की डिलीवरी की दिशा में अगला कदम उठाया जा रहा है। इसके साथ ही बेसिक ट्रेनर विमान एचटीटी-40 और एएलएच ध्रुव के सिविल संस्करण की डिलीवरी भी इसी दिन आरंभ हुई — जो भारतीय वायुसेना और नागरिक उड्डयन दोनों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।

एफओसी कॉन्ट्रैक्ट पूर्ण: एचएएल के लिए गर्व का पल

रवि के ने कहा कि एलसीए एफओसी कॉन्ट्रैक्ट से उनका निजी जुड़ाव रहा है, जब वे इस डिवीजन का नेतृत्व करते थे। उन्होंने कहा, 'यह मेरे लिए बहुत गर्व का क्षण है कि हम उस कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करने में सक्षम हुए हैं।' एचटीटी-40 की डिलीवरी भी आज से आरंभ की गई, जिसकी भारतीय वायुसेना को अत्यंत आवश्यकता थी। साथ ही एएलएच ध्रुव के सिविल वर्जन की शुरुआत को उन्होंने एचएएल के लिए एक 'बड़ा माइलस्टोन' बताया, क्योंकि इसके लिए सर्टिफाइंग एजेंसी के साथ दीर्घकालिक कार्य किया गया। रवि के ने कहा कि निजी भागीदारों के साथ मिलकर सैन्य और नागरिक दोनों प्रकार के पुर्जे बनाने का एक 'डुअल-यूज इकोसिस्टम' अब वास्तविकता बन चुका है।

मार्क-1ए की डिलीवरी: इंटीग्रेशन अधूरा, पर आत्मविश्वास कायम

180 मार्क-1ए विमानों के कॉन्ट्रैक्ट के तहत डिलीवरी की समयसीमा पर पूछे जाने पर रवि के ने स्वीकार किया कि रडार और हथियार इंटीग्रेशन का कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि यह एक 'इटरेटिव प्रोसेस' है, जिसमें 10-12 सॉर्टीज की आवश्यकता होती है और सॉफ्टवेयर में बदलाव के बाद पुनः उड़ान भरनी पड़ती है। उन्होंने कहा, 'अभी यह स्पेसिफिकेशन को मीट नहीं कर रहा, जो एयरफोर्स को डिलीवरी की शर्त है।' हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि सितंबर के शेष दिनों में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

एयरफ्रेम उत्पादन के बारे में उन्होंने बताया कि एचएएल के पास पहले से ही 26-27 तैयार एयरफ्रेम उपलब्ध हैं और एलसीए का निर्माण तीन डिवीजनों में हो रहा है, जबकि चौथे डिवीजन का काम निजी वेंडर्स को दिया गया है। उनके अनुसार, 'जब भी इंजन उपलब्ध होंगे, हम डिलीवरी पूरी करने में सक्षम होंगे।'

जीई इंजन आपूर्ति: समस्याओं का समाधान जारी

जीई (GE) के इंजनों की आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बारे में रवि के ने बताया कि एचएएल ने इस बार महज आपूर्तिकर्ता से समय-सीमा पूछने के बजाय जीई के टायर-1 और टायर-2 वेंडर्स तक सीधे पहुँच बनाई। उन्होंने कहा कि कास्टिंग से जुड़ी समस्या की पहचान की गई और एचएएल ने अपनी फाउंड्री एवं फोर्ज क्षमता से सहयोग का प्रस्ताव भी दिया। उनके अनुसार, जीई के वेंडर इस वर्ष के अंत तक अपनी समस्याओं से उबर लेंगे और अगले वर्ष से बड़ी संख्या में इंजन आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल एचएएल के पास 10 इंजन उपलब्ध हैं।

हेलीकॉप्टर इकोसिस्टम: घरेलू बाज़ार पहले, निर्यात बाद में

भारत के हेलीकॉप्टर निर्माण क्षेत्र पर बात करते हुए रवि के ने कहा कि एएलएच ध्रुव सैन्य क्षेत्र में सफलतापूर्वक काम कर रहा है और रक्षा मंत्रालय (एमओडी) ने हाल ही में और एएलएच को मंजूरी दी है, जो इस प्लेटफॉर्म पर सरकार का विश्वास दर्शाता है। उन्होंने बताया कि एचएएल अब सिविल मार्केट में भी प्रवेश कर रहा है, जहाँ मेडिकल इवैक्यूएशन, चार्टर और यात्री परिवहन जैसी सेवाओं की भारी माँग है। रणनीति स्पष्ट है — पहले भारतीय बाज़ार सेवित करो, फिर निर्यात बाज़ार में उतरो।

सुपर-सुखोई आधुनिकीकरण: ऑर्डर फाइनल स्टेज में

सुखोई-30 के आधुनिकीकरण कार्यक्रम — जिसे 'सुपर-सुखोई' कहा जाता है — के बारे में रवि के ने बताया कि इसमें डीआरडीओ (DRDO) के रडार सहित 40 से अधिक सिस्टम बदले जाने हैं। इस कार्य में निजी भागीदार और डीआरडीओ भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इसका ऑर्डर 'फाइनल स्टेज में है' और अनुमोदन मिलते ही तय समय-सीमा के भीतर काम पूरा करने का पूरा भरोसा है। यह कार्यक्रम भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने वाला माना जाता है।

एचएएल की यह बहु-आयामी प्रगति ऐसे समय में आई है जब भारत अपनी रक्षा आत्मनिर्भरता को तेज़ी से बढ़ा रहा है और 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को नई ऊँचाई पर ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि मार्क-1ए का रडार और हथियार इंटीग्रेशन अभी तक अधूरा है — जबकि 180 विमानों का यह कॉन्ट्रैक्ट वर्षों पहले हुआ था। जीई इंजन की सप्लाई श्रृंखला में व्यवधान कोई नई बात नहीं; असली सवाल यह है कि एचएएल ने टायर-1 और टायर-2 वेंडर्स तक पहुँच अब क्यों बनाई, पहले क्यों नहीं। सुपर-सुखोई का ऑर्डर 'फाइनल स्टेज' में बताया जा रहा है, लेकिन यह वाक्यांश भारतीय रक्षा खरीद प्रक्रिया में वर्षों तक चल सकता है। एचएएल की वास्तविक परीक्षा तब होगी जब मार्क-1ए की पहली बैच वायुसेना को सौंपी जाएगी — तब तक ये सभी 'माइलस्टोन' प्रत्याशा ही रहेंगे।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेजस एफओसी कॉन्ट्रैक्ट क्या है और एचएएल ने इसे कब पूरा किया?
तेजस एलसीए का फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस (एफओसी) कॉन्ट्रैक्ट भारतीय वायुसेना को एक निश्चित स्तर की परिचालन क्षमता वाले विमान सौंपने का समझौता था। एचएएल ने इसे 18 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में पूरा किया, जिसके बाद अब मार्क-1ए की डिलीवरी की प्रक्रिया शुरू होगी।
तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी कब तक शुरू होगी?
एचएएल के सीएमडी रवि के के अनुसार, रडार और हथियार इंटीग्रेशन सितंबर 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। एचएएल के पास पहले से 26-27 एयरफ्रेम तैयार हैं और जैसे ही जीई इंजन उपलब्ध होंगे, डिलीवरी शुरू हो जाएगी।
जीई इंजन की आपूर्ति में देरी क्यों हो रही है और इसका समाधान क्या है?
जीई इंजन के वेंडर्स में कास्टिंग से जुड़ी तकनीकी समस्याएँ थीं। एचएएल ने अब टायर-1 और टायर-2 वेंडर्स तक सीधे पहुँच बनाई है और अपनी फाउंड्री एवं फोर्ज क्षमता से सहयोग का प्रस्ताव भी दिया है। उम्मीद है कि जीई इस वर्ष के अंत तक समस्याओं से उबरेगा और अगले वर्ष से बड़े पैमाने पर इंजन आपूर्ति करेगा।
एएलएच ध्रुव का सिविल वर्जन क्यों महत्वपूर्ण है?
एएलएच ध्रुव का सिविल संस्करण एचएएल के लिए पहली बार नागरिक उड्डयन बाज़ार में प्रवेश का अवसर है। इससे मेडिकल इवैक्यूएशन, चार्टर और यात्री परिवहन जैसी सेवाएँ संभव होंगी। एचएएल की योजना पहले भारतीय बाज़ार को सेवित करने और फिर निर्यात करने की है।
सुपर-सुखोई आधुनिकीकरण कार्यक्रम किस चरण में है?
सुखोई-30 के आधुनिकीकरण कार्यक्रम में 40 से अधिक सिस्टम बदले जाने हैं, जिसमें डीआरडीओ का रडार भी शामिल है। एचएएल के सीएमडी के अनुसार, ऑर्डर 'फाइनल स्टेज' में है और अनुमोदन मिलते ही तय समय-सीमा में काम पूरा होने का भरोसा है।
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