27 जुलाई 2026
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वंदे मातरम पर कानून की दरकार नहीं, हर नागरिक जानता है अपना फर्ज़ : शिया धर्मगुरु सैफ अब्बास नकवी

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वंदे मातरम पर कानून की दरकार नहीं, हर नागरिक जानता है अपना फर्ज़ : शिया धर्मगुरु सैफ अब्बास नकवी

सारांश

शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने एक साथ तीन विवादास्पद मुद्दों पर बेबाकी से राय रखी — वंदे मातरम बिल को अनावश्यक बताया, 'हर घर तिरंगा' पर सवाल उठाए और कांवड़ियों को गैर-हिंदू व्यापारियों से दूर रहने की सलाह देने वाले स्वामी आनंद स्वरूप की तीखी आलोचना की।

मुख्य बातें

शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने 27 जुलाई को लखनऊ में कहा कि वंदे मातरम को अनिवार्य करने के लिए कोई कानून नहीं चाहिए।
नकवी ने आरोप लगाया कि सरकार पेपर लीक और बेरोज़गारी से ध्यान हटाने के लिए वंदे मातरम बिल पर बहस करा रही है।
'हर घर तिरंगा' अभियान पर उन्होंने कहा कि जिन्होंने 50 वर्षों तक कार्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया, वे आज इसकी बात कर रहे हैं।
स्वामी आनंद स्वरूप महाराज के कांवड़ियों से गैर-हिंदू व्यापारियों का बहिष्कार करने के बयान को नकवी ने 'बेतुका' और 'गुमराह करने वाला' करार दिया।
नकवी ने मानसून सत्र में छात्रों के मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की माँग की।

शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने 27 जुलाई को लखनऊ में स्पष्ट कहा कि वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने के लिए किसी कानून की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि देश का हर नागरिक पहले से ही अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों से भलीभाँति परिचित है। उन्होंने यह भी कहा कि मानसून सत्र में सरकार को असली जन-समस्याओं — पेपर लीक और बेरोज़गारी — पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

वंदे मातरम विधेयक पर नकवी की राय

राज्यसभा में प्रस्तावित वंदे मातरम बिल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नकवी ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि इस पर किसी कानून की जरूरत है। हर नागरिक देश के प्रति अपने कर्तव्य को जानता है।' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस तरह के विधेयक पर चर्चा छेड़कर जनता का ध्यान पेपर लीक और बेरोज़गारी जैसे ज्वलंत मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, मानसून सत्र में सर्वोच्च प्राथमिकता छात्रों की समस्याओं को मिलनी चाहिए।

'हर घर तिरंगा' अभियान और कलाम की मिसाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' कार्यक्रम में 'हर घर तिरंगा' अभियान को बढ़ावा देने की अपील पर नकवी ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को याद किया। उन्होंने कहा, 'देश के लिए उनकी सेवा अनुकरणीय थी। वे सिर्फ एक सूटकेस और कुछ किताबों के साथ राष्ट्रपति भवन गए थे और उतनी ही सादगी के साथ वहाँ से निकले।' नकवी ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने 50 वर्षों तक अपने कार्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया, वे आज इस अभियान की बात कर रहे हैं। उनका मानना है कि हर भारतीय के दिल में तिरंगा पहले से बसता है और वह उसका सम्मान करना जानता है। उन्होंने सुझाया कि प्रधानमंत्री को 'मन की बात' में छात्रों के मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए था।

कांवड़ यात्रा और सांप्रदायिक बयानबाज़ी पर कड़ी प्रतिक्रिया

काली सेना प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप महाराज द्वारा कांवड़ियों से गैर-हिंदू व्यापारियों का बहिष्कार करने की अपील पर नकवी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि अब पैदल चलना चाहिए, क्योंकि तेल और गैस मुस्लिम देशों से आ रहा है।' नकवी ने इस प्रकार के बयानों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे लोग प्रसिद्धि पाने के लिए बेतुकी बातें करते हैं और देश की जनता को गुमराह करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु अच्छी भावना के साथ शामिल होते हैं और वे इस तरह के विभाजनकारी बयानों से सहमत नहीं होंगे।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

नकवी की टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष पेपर लीक और रोज़गार संकट को केंद्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश में है। गौरतलब है कि धार्मिक नेताओं द्वारा इस तरह के बयान सामाजिक सद्भाव पर व्यापक बहस को जन्म देते रहे हैं। नकवी ने संकेत दिया कि असली राष्ट्रभक्ति कानून या अभियानों से नहीं, बल्कि नागरिकों की आंतरिक प्रतिबद्धता और सरकार की जवाबदेही से आती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि यह देखना ज़रूरी है कि इस तरह की आवाज़ें सामाजिक सद्भाव की उस परत को मज़बूत करती हैं जो राजनीतिक ध्रुवीकरण के बीच अक्सर अनदेखी रह जाती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैयद सैफ अब्बास नकवी ने वंदे मातरम बिल पर क्या कहा?
नकवी ने कहा कि वंदे मातरम को अनिवार्य करने के लिए किसी कानून की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि हर नागरिक अपने राष्ट्रीय कर्तव्य को पहले से जानता है। उनके अनुसार, यह विधेयक पेपर लीक और बेरोज़गारी जैसे असली मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश है।
'हर घर तिरंगा' अभियान पर नकवी की क्या राय है?
नकवी ने कहा कि हर भारतीय के दिल में तिरंगा पहले से बसता है और उसे सम्मान देना वह जानता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन्होंने 50 वर्षों तक अपने कार्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया, वे आज इस अभियान की बात कर रहे हैं।
स्वामी आनंद स्वरूप के बयान पर नकवी ने क्या प्रतिक्रिया दी?
काली सेना प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप महाराज द्वारा कांवड़ियों से गैर-हिंदू व्यापारियों का बहिष्कार करने की अपील पर नकवी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग प्रसिद्धि के लिए बेतुके बयान देते हैं और देश को गुमराह करते हैं; साथ ही यह भी कहा कि तेल और गैस मुस्लिम देशों से आती है, इसलिए यह तर्क व्यावहारिक रूप से टिकता नहीं।
नकवी ने मानसून सत्र में किन मुद्दों को प्राथमिकता देने की माँग की?
नकवी ने कहा कि मानसून सत्र में केवल छात्रों के मुद्दे — विशेष रूप से पेपर लीक — उठाए जाने चाहिए। उनका मानना है कि सरकार बेरोज़गारी जैसी असली समस्याओं को दबाने के लिए वंदे मातरम जैसे विषयों को आगे ला रही है।
नकवी ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का ज़िक्र क्यों किया?
'हर घर तिरंगा' अभियान के संदर्भ में नकवी ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को सच्ची राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि कलाम केवल एक सूटकेस और कुछ किताबों के साथ राष्ट्रपति भवन गए और उतनी ही सादगी से निकले — यह सेवा अनुकरणीय है।
राष्ट्र प्रेस
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