वंदे मातरम पर कानून की दरकार नहीं, हर नागरिक जानता है अपना फर्ज़ : शिया धर्मगुरु सैफ अब्बास नकवी
सारांश
मुख्य बातें
शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने 27 जुलाई को लखनऊ में स्पष्ट कहा कि वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने के लिए किसी कानून की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि देश का हर नागरिक पहले से ही अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों से भलीभाँति परिचित है। उन्होंने यह भी कहा कि मानसून सत्र में सरकार को असली जन-समस्याओं — पेपर लीक और बेरोज़गारी — पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
वंदे मातरम विधेयक पर नकवी की राय
राज्यसभा में प्रस्तावित वंदे मातरम बिल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नकवी ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि इस पर किसी कानून की जरूरत है। हर नागरिक देश के प्रति अपने कर्तव्य को जानता है।' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस तरह के विधेयक पर चर्चा छेड़कर जनता का ध्यान पेपर लीक और बेरोज़गारी जैसे ज्वलंत मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, मानसून सत्र में सर्वोच्च प्राथमिकता छात्रों की समस्याओं को मिलनी चाहिए।
'हर घर तिरंगा' अभियान और कलाम की मिसाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' कार्यक्रम में 'हर घर तिरंगा' अभियान को बढ़ावा देने की अपील पर नकवी ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को याद किया। उन्होंने कहा, 'देश के लिए उनकी सेवा अनुकरणीय थी। वे सिर्फ एक सूटकेस और कुछ किताबों के साथ राष्ट्रपति भवन गए थे और उतनी ही सादगी के साथ वहाँ से निकले।' नकवी ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने 50 वर्षों तक अपने कार्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया, वे आज इस अभियान की बात कर रहे हैं। उनका मानना है कि हर भारतीय के दिल में तिरंगा पहले से बसता है और वह उसका सम्मान करना जानता है। उन्होंने सुझाया कि प्रधानमंत्री को 'मन की बात' में छात्रों के मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए था।
कांवड़ यात्रा और सांप्रदायिक बयानबाज़ी पर कड़ी प्रतिक्रिया
काली सेना प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप महाराज द्वारा कांवड़ियों से गैर-हिंदू व्यापारियों का बहिष्कार करने की अपील पर नकवी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि अब पैदल चलना चाहिए, क्योंकि तेल और गैस मुस्लिम देशों से आ रहा है।' नकवी ने इस प्रकार के बयानों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे लोग प्रसिद्धि पाने के लिए बेतुकी बातें करते हैं और देश की जनता को गुमराह करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु अच्छी भावना के साथ शामिल होते हैं और वे इस तरह के विभाजनकारी बयानों से सहमत नहीं होंगे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
नकवी की टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष पेपर लीक और रोज़गार संकट को केंद्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश में है। गौरतलब है कि धार्मिक नेताओं द्वारा इस तरह के बयान सामाजिक सद्भाव पर व्यापक बहस को जन्म देते रहे हैं। नकवी ने संकेत दिया कि असली राष्ट्रभक्ति कानून या अभियानों से नहीं, बल्कि नागरिकों की आंतरिक प्रतिबद्धता और सरकार की जवाबदेही से आती है।