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हरदोई का प्रह्लाद कुंड: होली का प्रतीक, जहां भक्त प्रह्लाद की भक्ति ने दिखाई विजय

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हरदोई का प्रह्लाद कुंड: होली का प्रतीक, जहां भक्त प्रह्लाद की भक्ति ने दिखाई विजय

सारांश

हरदोई में प्रह्लाद कुंड का ऐतिहासिक महत्व है, जहां भक्त प्रह्लाद की भक्ति और होलिका के जलने की घटना का जश्न मनाया जाता है। जानें इस अद्भुत स्थल के बारे में।

मुख्य बातें

प्रह्लाद कुंड का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है।
यह भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है।
होलिका दहन का पर्व नकारात्मकता का अंत करता है।
यहाँ श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या आती है।
सच्ची भक्ति से सभी बाधाएँ पार की जा सकती हैं।

हरदोई, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। रंगों का त्योहार होली इस वर्ष 4 मार्च को मनाया जाएगा। होली से एक दिन पूर्व होने वाला होलिका दहन का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दिन नकारात्मकता, दुख, रोग और कष्टों के समाप्ति का प्रतीक है। साथ ही, यह अधर्म पर धर्म की विजय और भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का प्रमाण भी है। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में स्थित प्रह्लाद कुंड इसी ऐतिहासिक और पौराणिक घटना का गवाह है।

पुराणों के अनुसार, असुरराज हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु के प्रति शत्रुता रखता था। वह स्वयं को भगवान मानता था और किसी को भी विष्णु की भक्ति करने की अनुमति नहीं देता था। उसके पुत्र प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु के परम भक्त थे। प्रह्लाद की भक्ति देखकर हिरण्यकश्यप क्रोधित हो गया और उसने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे। अंतिम प्रयास में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका का सहारा लिया।

होलिका को यह वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी। हिरण्यकश्यप ने होलिका से कहा कि वह प्रह्लाद को अपनी गोद में बिठाकर आग में जाए, ताकि प्रह्लाद जल जाए। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका की गोद में बैठे प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ और होलिका स्वयं भस्म हो गई। इस घटना के बाद लोग खुशी से रंग लगाकर और फूल बरसाकर इस विजय का जश्न मनाने लगे। यही परंपरा आज होली के रूप में मनाई जाती है।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, हरदोई में स्थित प्रह्लाद कुंड एक पावन स्थल है जहाँ यह चमत्कार घटित हुआ था। यहाँ का कुंड आज भी भक्ति और ईश्वरीय शक्ति की याद दिलाता है। कुंड के पास एक छोटा सा मंदिर है, जहाँ प्रह्लाद और भगवान नरसिंह की पूजा की जाती है। होलिका दहन के दिन यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। वे होलिका दहन करते हैं और प्रह्लाद की भक्ति से प्रेरणा लेते हैं।

यह कुंड न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यह लोगों को सिखाता भी है कि सच्ची भक्ति और श्रद्धा से कोई भी बाधा पार की जा सकती है। मान्यता है कि श्रद्धालु अगर प्रह्लाद कुंड के दर्शन करें तो वे उस अलौकिक शक्ति को महसूस कर सकते हैं और उनकी सभी समस्याओं का नाश होता है।

प्रह्लाद कुंड हरदोई शहर से कुछ दूरी पर स्थित है और यहाँ पहुँचना आसान है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भक्तों को सच्ची श्रद्धा और भक्ति की प्रेरणा भी देता है। यहाँ की परंपराएँ आज भी लोगों को जोड़ती हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रह्लाद कुंड कहाँ स्थित है?
प्रह्लाद कुंड उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में स्थित है।
होलिका दहन का महत्व क्या है?
होलिका दहन नकारात्मकता के अंत और धर्म की विजय का प्रतीक है।
प्रह्लाद कुंड में कौन-कौन सी पूजा होती है?
यहाँ प्रह्लाद और भगवान नरसिंह की पूजा होती है।
क्यों लोग प्रह्लाद कुंड में आते हैं?
लोग यहाँ आकर प्रह्लाद की भक्ति से प्रेरणा लेते हैं और होलिका दहन करते हैं।
प्रह्लाद कुंड का चमत्कार क्या है?
यह कुंड श्रद्धालुओं को अलौकिक शक्ति का अनुभव कराता है।
राष्ट्र प्रेस
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