हरसिमरत कौर बादल ने फडणवीस को पत्र लिखा, तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड की स्वायत्तता बचाने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणी अकाली दल (SAD) की वरिष्ठ नेता एवं बठिंडा सांसद हरसिमरत कौर बादल ने 27 जून 2025 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड की धार्मिक स्वायत्तता को बनाए रखने की अपील की। उन्होंने माँग की कि राज्य सरकार उस प्रस्तावित मसौदा कानून को वापस ले, जो बोर्ड में सरकार द्वारा नामित सदस्यों की संख्या में भारी वृद्धि करता है और सिख समुदाय की भावनाओं के विपरीत है।
विवाद की जड़: क्या है नया मसौदा कानून
हरसिमरत कौर बादल ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रस्तावित नया अधिनियम सात दशक पुराने नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब अधिनियम, 1956 की जगह लेना चाहता है। यह पुराना कानून सिख समुदाय को श्री गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़े इस पवित्र धार्मिक स्थान के प्रबंधन में पूर्ण स्वायत्तता प्रदान करता है। उनके अनुसार, नया प्रस्तावित ढाँचा इस स्वायत्तता को समाप्त कर बोर्ड पर सरकारी नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास है।
फरवरी 2024 का संशोधन और उसकी वापसी
यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे पर विवाद उठा है। फरवरी 2024 में महाराष्ट्र सरकार ने तख्त बोर्ड को नियंत्रित करने वाले अधिनियम में संशोधन करते हुए बोर्ड के 17 में से 12 सदस्यों को सरकार द्वारा सीधे नामांकित करने का प्रावधान किया था। उस संशोधन में शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का प्रतिनिधित्व घटा दिया गया था और मुख्य खालसा दीवान तथा हजूर सचखंड दीवान का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त कर दिया गया था। SGPC और स्थानीय सिख संगठनों के व्यापक विरोध के बाद उस संशोधन को वापस लिया गया था। अब आशंका है कि नए मसौदा कानून में उसी तर्ज पर बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है।
सिख संगठनों की आपत्ति और 'गुरुमाता'
हरसिमरत कौर बादल ने पत्र में बताया कि तख्त प्रबंधन ने पुराने अधिनियम को निरस्त करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले के विरोध में एक 'गुरुमाता' (सामूहिक आदेश) भी जारी किया है। उनका कहना है कि सिख संगठनों से कोई सलाह-मशवरा किए बिना बोर्ड के ढाँचे में बदलाव लाने की कोशिश यह धारणा पैदा करती है कि राज्य सरकार बोर्ड की स्वायत्तता को नष्ट करना चाहती है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के सिख इसे पवित्र स्थान पर पूर्ण सरकारी नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
सांसद की माँग: पुराना अधिनियम बहाल रखा जाए
बठिंडा सांसद ने मुख्यमंत्री फडणवीस से आग्रह किया कि नए मसौदा कानून को वापस लेकर 1956 के अधिनियम को लागू रहने दिया जाए। उन्होंने जोर दिया कि तख्त श्री हजूर साहिब की 'मर्यादा' (आचार संहिता), प्रबंधन और धार्मिक स्वायत्तता को प्रभावित करने वाला कोई भी निर्णय एकतरफा नहीं लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह कदम सिख समुदाय में बढ़ते तनाव को कम करने में सहायक होगा। मुख्यमंत्री से इस मुद्दे का शीघ्र समाधान करने का अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को सिख धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप से बचना चाहिए।