एचईसी रांची को बचाने की मुहिम: श्रमिक संगठनों ने बनाई संयुक्त आंदोलन की रणनीति
सारांश
मुख्य बातें
हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी), रांची — जिसे एशिया की सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक इकाइयों में गिना जाता है और 'मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज' के रूप में जाना जाता है — के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट को देखते हुए विभिन्न श्रमिक संगठनों ने 5 जुलाई को एकजुट होकर चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तय किया गया कि केंद्र सरकार पर प्रभावी दबाव बनाने के लिए सभी श्रमिक संगठन एक साझा मंच पर आएंगे।
बैठक में उठाई गई प्रमुख मांगें
बैठक में श्रमिक प्रतिनिधियों ने कई अहम मांगें सामने रखीं। इनमें एचईसी में स्थायी अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक की नियुक्ति, एक व्यापक पुनरुद्धार पैकेज, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लंबित वेतन का नियमित भुगतान तथा कारखाने में औद्योगिक गतिविधियों को पुनः गति देना शामिल हैं। श्रमिक नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
सुबोधकांत सहाय का आह्वान
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि एचईसी राष्ट्र की बहुमूल्य औद्योगिक धरोहर है और इसे बचाना आज की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने आगाह किया कि यदि समय रहते ठोस पहल नहीं हुई, तो यह महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम और अधिक गहरे संकट में फंस सकता है। सहाय ने श्रमिक संगठनों से लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष तेज करने और व्यापक जनसमर्थन जुटाने का आह्वान किया।
कौन-कौन से संगठन हुए शामिल
बैठक में हटिया मजदूर लोक मंच, हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन, एचईसी सप्लाई संघर्ष समिति, हटिया कामगार यूनियन (एटक), एचईसी श्रमिक संघ, हटिया मजदूर यूनियन, सीटू और जनता मजदूर यूनियन सहित अनेक श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह व्यापक भागीदारी इस बात का संकेत है कि एचईसी संकट को लेकर विभिन्न विचारधाराओं के श्रमिक संगठन अब एकजुट हो रहे हैं।
एचईसी का महत्व और संकट की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि एचईसी की स्थापना 1958 में हुई थी और यह दशकों तक भारत के भारी उद्योग क्षेत्र की रीढ़ रही है। इसके उत्पाद इस्पात संयंत्रों, खनन उद्योग और रक्षा क्षेत्र तक में काम आते हैं। बैठक में रेखांकित किया गया कि एचईसी का संकट केवल एक कारखाने का संकट नहीं — यह हजारों कर्मचारियों, उनके परिवारों और पूरे हटिया क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से जुड़ा सवाल है। यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण और विनिवेश पर राष्ट्रीय बहस तेज हो रही है।
आगे क्या होगा
श्रमिक संगठनों ने संकेत दिया है कि आने वाले हफ्तों में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को विस्तार दिया जाएगा और केंद्र सरकार तक अपनी बात पहुँचाने के लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाया जाएगा। एचईसी के पुनरुद्धार की दिशा में केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं।