10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हरीश साल्वे का बड़ा बयान: ममता के इस्तीफा न देने से संवैधानिक संकट नहीं, राज्यपाल के पास हैं विकल्प

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हरीश साल्वे का बड़ा बयान: ममता के इस्तीफा न देने से संवैधानिक संकट नहीं, राज्यपाल के पास हैं विकल्प

सारांश

भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने साफ कहा — ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना संवैधानिक संकट नहीं, क्योंकि राज्यपाल के पास पर्याप्त विकल्प हैं। लेकिन उनकी कैपिटल-हमले वाली चेतावनी और संस्थाओं पर हमले की बढ़ती प्रवृत्ति पर टिप्पणी ने इस पूरे विवाद को एक नया आयाम दे दिया है।

मुख्य बातें

हरीश साल्वे ने 5 मई को कहा कि ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने से कोई बड़ा संवैधानिक संकट नहीं होगा।
राज्यपाल के पास दो विकल्प — कार्यवाहक मुख्यमंत्री की अनुमति देना या राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करना।
साल्वे ने कोलकाता में अमेरिकी कैपिटल जैसी हिंसा की आशंका जताते हुए सतर्क किया।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संबंधित मामले खारिज होने के कारण पश्चिम बंगाल चुनाव संवैधानिक रूप से वैध — साल्वे।
ममता ने मीडिया से कहा — ''हम वास्तव में हारे नहीं हैं, नतीजे 'वोट चोरी' के परिणाम हैं।''

भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने मंगलवार, 5 मई को पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हालात पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने पर कोई बड़ा संवैधानिक संकट उत्पन्न नहीं होगा, क्योंकि संविधान में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के पर्याप्त प्रावधान मौजूद हैं। राष्ट्र प्रेस से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव हारने के बाद भी पद पर बने रहना लोकतांत्रिक सिद्धांतों की अवहेलना है।

राज्यपाल के पास क्या हैं विकल्प

साल्वे ने बताया कि संविधान के अंतर्गत राज्यपाल के पास दो स्पष्ट विकल्प उपलब्ध हैं — वे मौजूदा मुख्यमंत्री को कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में काम करने की अनुमति दे सकते हैं, अथवा केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं। उनके अनुसार, कानून इस प्रकार की स्थितियों के लिए पहले से तैयार है और इसमें कोई रिक्तता नहीं है।

कैपिटल हिंसा से की तुलना

साल्वे ने एक तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, ''उम्मीद है कि वह कोलकाता में कैपिटल जैसी स्थिति पैदा करने की योजना नहीं बना रही हैं।'' वे यहाँ अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रकरण का संदर्भ दे रहे थे, जब 2021 में चुनाव परिणाम स्वीकार करने से पहले उनके समर्थकों ने वॉशिंगटन डीसी स्थित कैपिटल भवन पर हमला किया था। यह तुलना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।

संस्थाओं पर हमले की बढ़ती प्रवृत्ति

साल्वे ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में एक खतरनाक प्रवृत्ति उभरी है, जिसमें नेता 'सच' की जगह 'मेरा सच और तुम्हारा सच' की भाषा बोलने लगे हैं। उन्होंने ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग को 'विलेन' कहे जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और इसे संवैधानिक संस्थाओं पर अनुचित दबाव की कोशिश करार दिया। साल्वे ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी का यह रवैया आम आदमी पार्टी (AAP) नेता अरविंद केजरीवाल के उस बयान जैसा है, जिसमें उन्होंने एक हाई कोर्ट जज पर पक्षपात का आरोप लगाया था। उनके अनुसार, ऐसे बयानों का संदेश यह होता है कि ''अगर फैसला हमारे पक्ष में नहीं आया तो हम आपकी पृष्ठभूमि खंगालेंगे।''

संविधान की शपथ और उसकी अवहेलना

साल्वे ने इस पूरे मामले में एक गंभीर नैतिक प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री, जिसने संविधान का पालन करने की शपथ ली है, वही उसका पालन करने से इनकार कर रही हैं — यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों का सीधा अपमान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव पूरी तरह संवैधानिक रूप से वैध है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने इससे जुड़े मामलों को पहले ही खारिज कर दिया था।

ममता बनर्जी का पक्ष और आगे की स्थिति

गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने हाल के विधानसभा चुनाव में 'वोट चोरी' और गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए नई सरकार के शपथ ग्रहण से पहले इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, ''मैं अभी इस्तीफा क्यों दूं? हम वास्तव में हारे नहीं हैं। नतीजे असली जनादेश को नहीं दिखाते, बल्कि गड़बड़ी और 'वोट चोरी' के परिणाम हैं।'' यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता-हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर संवैधानिक और राजनीतिक तनाव चरम पर है। आने वाले दिनों में राज्यपाल की भूमिका और केंद्र-राज्य संबंध इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 'कोई संकट नहीं' कहना पर्याप्त है जब एक निर्वाचित मुख्यमंत्री चुनाव परिणाम को ही अस्वीकार कर रही हों। कैपिटल हमले की तुलना एक गंभीर संकेत है — यह बताता है कि संवैधानिक तंत्र भले ही टूटे नहीं, लेकिन लोकतांत्रिक मर्यादाएँ दबाव में हैं। संस्थाओं पर बढ़ते हमलों की यह प्रवृत्ति — चाहे चुनाव आयोग हो या न्यायपालिका — केवल पश्चिम बंगाल की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक संस्कृति की चिंताजनक तस्वीर पेश करती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरीश साल्वे ने ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने पर क्या कहा?
हरीश साल्वे ने कहा कि ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने पर कोई बड़ा संवैधानिक संकट नहीं आएगा, क्योंकि संविधान में ऐसी स्थितियों से निपटने के पर्याप्त प्रावधान मौजूद हैं। उन्होंने राज्यपाल के पास उपलब्ध दोनों विकल्पों — कार्यवाहक मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति शासन — का उल्लेख किया।
पश्चिम बंगाल में राज्यपाल के पास अभी क्या विकल्प हैं?
राज्यपाल के पास दो विकल्प हैं — वे ममता बनर्जी को कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में काम करने की अनुमति दे सकते हैं, या केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं। दोनों ही विकल्प संविधान के अंतर्गत पूरी तरह वैध हैं।
ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से क्यों मना किया?
ममता बनर्जी ने 'वोट चोरी' और चुनावी गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए इस्तीफा देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजे असली जनादेश को नहीं दर्शाते और वे वास्तव में हारी नहीं हैं।
क्या पश्चिम बंगाल का हालिया विधानसभा चुनाव संवैधानिक रूप से वैध है?
हाँ, हरीश साल्वे के अनुसार यह चुनाव पूरी तरह संवैधानिक रूप से वैध है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने इससे जुड़े मामलों को पहले ही खारिज कर दिया था। इसलिए चुनाव परिणाम की वैधता पर कोई कानूनी प्रश्नचिह्न नहीं है।
साल्वे ने चुनाव आयोग पर ममता की टिप्पणी के बारे में क्या कहा?
साल्वे ने ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग को 'विलेन' कहे जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने इसे संवैधानिक संस्थाओं पर हमला और लोकतांत्रिक सिद्धांतों का अपमान करार दिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले