महाराष्ट्र: 2 लाख से अधिक आदिवासी परिवारों को मिलेगा अलग सातबारा और जमीन रजिस्ट्री का अधिकार
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 8 जुलाई 2026 को राज्य विधानसभा के दोनों सदनों में घोषणा की कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत वन भूमि पट्टा रखने वाले आदिवासी परिवारों को अब जमीन के अलग रजिस्ट्री दस्तावेज़ जारी किए जाएंगे। इस ऐतिहासिक निर्णय से राज्यभर के 2 लाख से अधिक आदिवासी परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
क्या है नई व्यवस्था
नई प्रणाली के तहत पात्र लाभार्थियों को विशेष रूप से तैयार किए गए 'फॉर्म 7ई' और 'विलेज फॉर्म 12ई' के माध्यम से अलग 'सातबारा उतारा' (7/12 एक्सट्रैक्ट) प्रविष्टियाँ प्राप्त होंगी। इससे वे FRA के तहत आवंटित भूमि पर सीधे मुख्य धारक के रूप में अपना मालिकाना हक दर्ज करा सकेंगे। संबंधित भूमि पर उगाई जाने वाली फसलों का रिकॉर्ड भी इन्हीं दस्तावेज़ों में रखा जाएगा।
अब तक क्या थी समस्या
मंत्री बावनकुले ने बताया कि अब तक वन भूमि का पट्टा स्वीकृत होने के बाद भी आदिवासी किसानों के नाम सातबारा दस्तावेज़ के केवल 'अन्य अधिकार' वाले कॉलम में दर्ज होते थे। मुख्य मालिकाना हक के कॉलम में 'महाराष्ट्र सरकार - वन विभाग' ही अंकित रहता था। इस तकनीकी खामी के कारण आदिवासी किसानों को किसान आईडी प्राप्त करने, बैंकों से कृषि ऋण लेने, सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ उठाने और प्राकृतिक आपदाओं में मुआवज़ा पाने में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ता था।
समिति की सिफारिशों पर हुआ फैसला
इस दीर्घकालिक समस्या के स्थायी समाधान के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन और राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की गई थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने वन भूमि पट्टा धारकों के लिए अलग सातबारा फॉर्म और विलेज फॉर्म का विशेष प्रावधान लागू किया है। जिन क्षेत्रों में क्लस्टर वाले फॉरेस्ट ब्लॉक के भीतर वन भूमि के पट्टे दिए गए हैं, वहाँ भूमि रिकॉर्ड विभाग तत्काल सर्वेक्षण करेगा और सर्वे पूर्ण होते ही आधिकारिक प्रविष्टियाँ कर दी जाएंगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने इस घोषणा पर संतोष जताते हुए कहा कि आदिवासियों के लिए जमीन के अलग रिकॉर्ड की लंबे समय से चली आ रही माँग आखिरकार पूरी हो रही है। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने भी इस निर्णय का स्वागत किया और राजस्व मंत्री को बधाई देते हुए 'ग्राम वन अधिकार समितियों' के पुनर्गठन की माँग रखी। इस पर मंत्री बावनकुले ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री फडणवीस के निर्देशों के अनुसार ग्राम वन अधिकार समितियों के गठन को लेकर सरकार सकारात्मक है और इस मामले की जल्द समीक्षा की जाएगी।
आगे की राह
मंत्री बावनकुले ने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि आदिवासी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में तत्काल बैठकें आयोजित करें और '7ई एवं 12ई' दस्तावेज़ प्रक्रिया को लागू करने में सहयोग करें। उन्होंने यह भी बताया कि आदिवासी किसान अब एग्रीस्टैक सहित कृषि से जुड़ी सभी सरकारी योजनाओं का लाभ सरलता और शीघ्रता से उठा सकेंगे। यह कदम आदिवासी भूमि अधिकारों को कागज़ पर नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक निर्णायक पहल माना जा रहा है।