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महाराष्ट्र में 'वाटर 7/12' प्रणाली लागू होगी, भारत का पहला जल अभिलेख राज्य बनेगा

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महाराष्ट्र में 'वाटर 7/12' प्रणाली लागू होगी, भारत का पहला जल अभिलेख राज्य बनेगा

सारांश

महाराष्ट्र भारत का पहला राज्य बनने जा रहा है जो जमीन के सातबारा की तर्ज पर 'वाटर 7/12' प्रणाली लागू करेगा। राजस्व मंत्री बावनकुले की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय हुआ कि आईआईटी बॉम्बे के विशेषज्ञों द्वारा तैयार जल लेखा ढाँचा पहले चुनिंदा क्षेत्रों में पायलट आधार पर लागू होगा।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र 'वाटर 7/12' लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बनेगा।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 25 मई 2026 को उच्च स्तरीय बैठक में परियोजना को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
प्रणाली भूमि अभिलेख 'सातबारा' के मॉडल पर आधारित है और तीन चरणों में जल ऑडिट करेगी।
सुब्रमण्य कंसुर , आईआईटी बॉम्बे के डॉ.
अविनाश कदम और अर्थशास्त्री उदय नायर ने 'जल लेखा ढाँचा' तैयार किया है।
पहले चुनिंदा क्षेत्रों में पायलट आधार पर लागू होगी, बाद में पूरे राज्य में विस्तार की योजना।

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार, 25 मई 2026 को घोषणा की कि महाराष्ट्र भारत का पहला राज्य बनने जा रहा है जो 'वाटर 7/12' नामक व्यापक जल अभिलेख प्रणाली को लागू करेगा। यह प्रणाली राज्य की प्रसिद्ध भूमि अभिलेख प्रणाली 'सातबारा' के मॉडल पर आधारित है और अंधाधुंध जल उपयोग पर अंकुश लगाने के साथ-साथ आंकड़ों पर आधारित जल प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

उच्च स्तरीय बैठक में योजना को हरी झंडी

मंत्री बावनकुले ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए राजस्व विभाग, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में तय किया गया कि यह प्रणाली प्रारंभ में राज्य के चुनिंदा क्षेत्रों में प्रायोगिक आधार पर लागू की जाएगी।

प्रणाली का ढाँचा और विशेषज्ञों की भूमिका

डॉ. सुब्रमण्य कंसुर ने आईआईटी बॉम्बे के जल विशेषज्ञ डॉ. अविनाश कदम और अर्थशास्त्री उदय नायर के सहयोग से एक आधुनिक 'जल लेखा ढाँचा' और 'जल संतुलन पत्रक' तैयार किया है। यह प्रणाली तीन अलग-अलग चरणों में जल संसाधनों का ऑडिट करेगी और वार्षिक वर्गीकरण के साथ ग्राम पंचायत तथा जलसंभर स्तर पर जल भंडार, अंतर्वाह, बहिर्वाह और शेष राशि की पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित करेगी।

क्यों ज़रूरी है यह पहल

महाराष्ट्र में भूमि दस्तावेज़ीकरण के लिए सातबारा प्रणाली दशकों से कार्यरत है, लेकिन जल संसाधनों के लिए अब तक कोई समकक्ष व्यवस्था नहीं थी। मंत्री बावनकुले के अनुसार, जब तक खपत का सटीक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, तब तक प्रभावी विनियमन और सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना संभव नहीं है। 'वाटर ऑडिट' और 'वाटर बैलेंस शीट' की अवधारणा इसी खामी को दूर करने के लिए विकसित की गई है।

आम जनता और प्रशासन पर असर

यह प्रणाली राज्य सरकार को जल उपयोग पर सचेत और आंकड़ों पर आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाएगी। 'ब्लू ग्रीन अर्बन डेवलपमेंट' के सिद्धांतों के अनुरूप, इस पहल से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल वितरण की पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र के कई हिस्से हर साल गंभीर जल संकट का सामना करते हैं।

आगे क्या होगा

पायलट चरण के परिणामों के आधार पर इस प्रणाली को पूरे राज्य में विस्तारित करने की योजना है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो महाराष्ट्र का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक नज़ीर बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी। महाराष्ट्र में सातबारा प्रणाली दशकों से अस्तित्व में है, फिर भी भूमि विवाद और अभिलेखों की अशुद्धियाँ आम हैं — जल अभिलेख के लिए यही चुनौती और बड़ी होगी क्योंकि जल एक गतिशील और साझा संसाधन है। पायलट क्षेत्रों का चयन, डेटा संग्रह की पद्धति और ग्राम पंचायत स्तर पर क्षमता निर्माण — ये तीन बिंदु तय करेंगे कि यह घोषणा महज़ एक नीतिगत इरादा बनकर रहती है या वास्तव में जल संकट से जूझते महाराष्ट्र के लिए बदलाव लाती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वाटर 7/12' प्रणाली क्या है?
'वाटर 7/12' एक व्यापक जल अभिलेख प्रणाली है जो महाराष्ट्र की भूमि अभिलेख प्रणाली 'सातबारा' के मॉडल पर आधारित है। इसका उद्देश्य ग्राम पंचायत और जलसंभर स्तर पर जल भंडार, अंतर्वाह, बहिर्वाह और शेष राशि का पारदर्शी रिकॉर्ड रखना है।
यह प्रणाली महाराष्ट्र में कब और कैसे लागू होगी?
राजस्व मंत्री बावनकुले के अनुसार, यह प्रणाली प्रारंभ में राज्य के चुनिंदा क्षेत्रों में पायलट आधार पर लागू की जाएगी। पायलट के परिणामों के आधार पर इसे पूरे राज्य में विस्तारित करने की योजना है।
इस प्रणाली को किसने विकसित किया है?
डॉ. सुब्रमण्य कंसुर ने आईआईटी बॉम्बे के जल विशेषज्ञ डॉ. अविनाश कदम और अर्थशास्त्री उदय नायर के सहयोग से 'जल लेखा ढाँचा' और 'जल संतुलन पत्रक' तैयार किया है।
'वाटर 7/12' से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
यह प्रणाली जल उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही लाएगी, जिससे सरकार आंकड़ों के आधार पर जल वितरण के निर्णय ले सकेगी। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल संसाधनों का अधिक न्यायसंगत और कुशल उपयोग सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र में अब तक जल प्रबंधन की क्या स्थिति थी?
महाराष्ट्र में भूमि दस्तावेज़ीकरण के लिए सुदृढ़ सातबारा प्रणाली मौजूद है, लेकिन जल संसाधनों के लिए अब तक कोई व्यापक अभिलेख प्रणाली नहीं थी। व्यवस्थित जल जवाबदेही के अभाव में अंधाधुंध जल उपयोग और प्रभावी विनियमन की कमी बनी रही।
राष्ट्र प्रेस
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