इंडिया गठबंधन में बिखराव: DMK की विदाई और TMC की अनिश्चितता से मानसून सत्र पर असर
सारांश
मुख्य बातें
इंडिया गठबंधन इस समय अपने सबसे गहरे संकट से गुज़र रहा है — द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के औपचारिक रूप से अलग होने और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत की आशंका के बीच, जुलाई के अंत में शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में विपक्ष की एकजुट आवाज़ कमज़ोर पड़ती दिख रही है। 5 जून 2026 तक की स्थिति के अनुसार, गठबंधन की प्रभावी सीट-संख्या 234 से घटकर लगभग 212 रह गई है।
मुख्य घटनाक्रम
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में फिल्म अभिनेता विजय की पार्टी तमिझगा वेट्री कषगम (TVK) ने 234 में से 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने अपना 11 साल पुराना गठबंधन DMK से तोड़कर TVK के साथ नया समझौता कर लिया।
इस घटनाक्रम के जवाब में DMK ने नई दिल्ली में होने वाली इंडिया गठबंधन की अगली बैठक में शामिल न होने का फैसला किया और संसद के आगामी सत्र में लोकसभा में पूर्व सहयोगियों से अलग बैठने की तैयारी शुरू कर दी। DMK के पास लोकसभा में 22 सांसद हैं, जो विपक्षी दलों में चौथी सबसे बड़ी संख्या है।
तृणमूल कांग्रेस की जटिल स्थिति
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 294 में से 206 सीटें जीतकर TMC के 15 साल के शासन को समाप्त कर दिया। इस करारी हार के बाद TMC की चेयरपर्सन ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने का संकेत दिया है और पार्टी अब गठबंधन की समन्वय बैठकों में उनके ज़रिए प्रतिनिधित्व करेगी।
पार्टी के भीतर असंतोष और गहरा हो गया है। TMC के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने — जो आरजी कर मेडिकल कॉलेज में इंटर्न के बलात्कार और हत्या पर खुलकर बोलने वाले नेताओं में शामिल थे — 'सूत्रों' का हवाला देते हुए दावा किया है कि कई सांसद पाला बदल सकते हैं। लोकसभा में TMC के 28 सांसद हैं, जिसका अर्थ है कि 19 सांसदों का एक समूह दलबदल विरोधी कानून के दायरे में आए बिना अलग हो सकता है। राज्यसभा में पार्टी के 13 सदस्य हैं।
सत्ता पक्ष की मज़बूत स्थिति
इन घटनाक्रमों के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की संसदीय स्थिति काफी मज़बूत बनी हुई है। 18वीं लोकसभा में NDA के पास 292 सीटें हैं, जिनमें अकेले BJP के 240 सदस्य हैं। सहयोगी दलों में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के 16, जनता दल (यूनाइटेड) के 12, शिवसेना के 7 और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 5 सांसद शामिल हैं।
राज्यसभा में 245 में से BJP के 113, जनता दल (यूनाइटेड) के 4 और शिवसेना के 2 सदस्य हैं। यह बहुमत यह सुनिश्चित करता है कि सत्ता पक्ष मानसून सत्र में अपेक्षित विधायी कामकाज आसानी से पूरा कर सकता है।
विपक्ष पर असर
DMK के अलग होने के बाद इंडिया गठबंधन की प्रभावी सीट-संख्या घटकर लगभग 212 रह गई है। कांग्रेस के 98 सांसद के साथ वह मुख्य विपक्षी दल बनी हुई है। समाजवादी पार्टी 37 सीटों के साथ विपक्ष का दूसरा बड़ा घटक है।
आम आदमी पार्टी (AAP) में हुई फूट के बाद उसके लोकसभा में केवल 3 सांसद बचे हैं। राज्यसभा में DMK के 8 सदस्यों के किसी भी गुट से अलग बैठने के फैसले से विपक्ष की ताकत और कम होगी। गठबंधन की शुरुआत 2024 लोकसभा चुनाव से पहले हुई थी, लेकिन तभी से सीट-बंटवारे पर तनाव और जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार के जल्द बाहर होने से यह कमज़ोर पड़ता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होनी है और विपक्ष को एकजुट रणनीति की सबसे अधिक ज़रूरत है।
आगे क्या
गठबंधन की अगली बैठक में DMK की अनुपस्थिति और TMC के भीतर संभावित दलबदल की आशंका मानसून सत्र से पहले विपक्षी रणनीति को और अनिश्चित बना देती है। AAP के तीन सांसदों का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि TMC और DMK के सांसद संसद में स्वतंत्र रूप से काम करते हैं, तो विपक्ष की सामूहिक बाधा-क्षमता कमज़ोर पड़ जाएगी और NDA के लिए विधायी एजेंडा आगे बढ़ाना और आसान हो जाएगा।