भारत की GDP वृद्धि दर 7.7%: लंका दिनकर बोले — मोदी नेतृत्व में वैश्विक संकट के बीच अर्थव्यवस्था मज़बूत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता लंका दिनकर ने 6 जून 2026 को विजयवाड़ा में कहा कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, युद्ध और सप्लाई चेन में व्यवधान के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की GDP वृद्धि दर हासिल की है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और स्थिर नेतृत्व को दिया।
वैश्विक पृष्ठभूमि और भारत की स्थिति
दिनकर के अनुसार, ईरान-इज़राइल-अमेरिका तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुँचाई है। इन परिस्थितियों में जहाँ दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मंदी और गिरावट से जूझ रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक रफ़्तार उल्लेखनीय रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं का असर भारत पर अन्य देशों की तुलना में कम पड़ा है।
मुख्य आर्थिक आँकड़े
BJP नेता ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की विकास दर 7.7 प्रतिशत रही। इसके अलावा जनवरी-मार्च तिमाही में यह दर 7.8 प्रतिशत रही, जो पूरे वर्ष की सबसे ऊँची तिमाही वृद्धि है। गौरतलब है कि ये आँकड़े ऐसे समय में आए हैं जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) सहित कई वैश्विक संस्थाएं विकसित देशों की विकास दर में कटौती का अनुमान लगा रही हैं।
विकसित भारत 2047 का विज़न
दिनकर ने प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विज़न का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा, "हमारे देश में ऐसे शानदार नतीजे इसलिए मिल रहे हैं क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प है कि 2047 तक भारत 'विकसित भारत' बने और 'विश्व गुरु' के तौर पर उभरे।" उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास और सरकार की नीतियों को इस विकास यात्रा की नींव बताया।
सामाजिक स्थिरता पर चेतावनी
दिनकर ने यह भी आगाह किया कि कुछ तत्व आम जनता और युवाओं को भड़काकर देश की शांति, सद्भाव और आर्थिक स्थिरता को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "दूसरी ओर, कुछ ऐसे तत्व हैं जो आम जनता और खासकर देश के युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि देश में शांति और सद्भाव बिगड़े और अर्थव्यवस्था चरमरा जाए।"
आगे की राह
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार बुनियादी ढाँचे, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की घरेलू माँग और सेवा क्षेत्र की मज़बूती वैश्विक झटकों के विरुद्ध एक प्रभावी बफर साबित हो रही है। अगली तिमाही के आँकड़े यह तय करेंगे कि क्या यह वृद्धि दर टिकाऊ है।