भारत-ब्रिटेन CETA वैश्विक अर्थव्यवस्था का 'फोर्स मल्टीप्लायर' बनेगा: पीयूष गोयल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 26 जून 2026 को लंदन में कहा कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक निर्णायक 'फोर्स मल्टीप्लायर' की भूमिका निभाएगा। इंडिया ग्लोबल फोरम की यूके-इंडिया वीक 2026 के मंच से बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग को नई ऊँचाई देगा।
समझौते की मुख्य विशेषताएँ
गोयल ने कहा कि भारत-ब्रिटेन संबंध अब केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रहे। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच तकनीक, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। मंत्री ने कहा, 'भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला फोर्स मल्टीप्लायर साबित होगा।'
भारतीय उद्योगों को क्या मिलेगा
गोयल ने रेखांकित किया कि CETA भारतीय उद्योगों को वैल्यू चेन में ऊपर जाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का अवसर देगा। उनके अनुसार, जिन क्षेत्रों में दोनों देशों की मौजूदगी है, वहाँ भारतीय कंपनियाँ ब्रिटिश कंपनियों के साथ बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
पूरक क्षमताओं का लाभ
मंत्री ने बताया कि भारत और ब्रिटेन की क्षमताएँ कई क्षेत्रों में एक-दूसरे की पूरक हैं — नवाचार, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और निवेश इनमें प्रमुख हैं। गोयल के अनुसार, इन पूरक शक्तियों का मेल वैश्विक विकास को नई दिशा दे सकता है और दोनों देशों की कंपनियाँ एक-दूसरे की अर्थव्यवस्था को सहारा देते हुए साझा विकास को गति दे सकती हैं।
बहुपक्षीय सहयोग और साझा मूल्य
गोयल ने यह भी कहा कि भारत और ब्रिटेन आतंकवाद-विरोध और वैश्विक शांति एवं स्थिरता जैसे मुद्दों पर समान दृष्टिकोण रखते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देश कई बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर निष्पक्ष और समान व्यापारिक व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं, ताकि सभी देशों को बराबर अवसर मिल सकें।
वैश्विक असर और आगे की राह
गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत-यूके CETA केवल द्विपक्षीय लाभ तक सीमित नहीं है — यह रोज़गार, निवेश और व्यापार के नए अवसर पैदा कर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। गौरतलब है कि यह समझौता वर्षों की वार्ता के बाद अंतिम रूप को पहुँचा है और अब इसके क्रियान्वयन की दिशा में दोनों देशों की नज़रें टिकी हैं।