इंडियनऑयल-मॉरीशस 5 वर्षीय ईंधन समझौता: पेट्रोल, डीजल और ATF की पूर्ण आपूर्ति, कीमत अस्थिरता से सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और मॉरीशस स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन (STC) के बीच एक 5 वर्षीय दीर्घकालिक ईंधन आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो मॉरीशस को पेट्रोल, हाई स्पीड डीजल और विमानन टर्बाइन ईंधन (ATF) की संपूर्ण आयात आवश्यकता की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। केंद्र सरकार के अनुसार, यह हाल के वर्षों में दक्षिण एशिया के बाहर किसी भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनी द्वारा किया गया पहला ऐसा दीर्घकालिक समझौता है।
समझौते का विवरण और दायरा
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मॉरीशस यात्रा के दौरान इस सप्ताह इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह समझौता भारत को मॉरीशस का प्रमुख और भरोसेमंद ईंधन आपूर्तिकर्ता बनाता है। इसके तहत IOCL मॉरीशस की पेट्रोल, हाई स्पीड डीजल और ATF की पूरी आयात जरूरत को पूरा करेगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता का असर द्वीपीय अर्थव्यवस्था पर कम होगा।
भारत की ऊर्जा निर्यात क्षमता
सरकार ने कहा कि भारत आज दुनिया के प्रमुख पेट्रोलियम शोधन केंद्रों में से एक बन चुका है। देश की 23 रिफाइनरियों में प्रतिवर्ष लगभग 267 मिलियन मीट्रिक टन परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन होता है, जिससे भारत परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध निर्यातक बन गया है। गौरतलब है कि भारत पहले से ही नेपाल और भूटान की पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है और पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान भी इन देशों को की गई आपूर्ति प्रतिबद्धताएँ पूरी की गईं।
जैव ईंधन और क्षमता निर्माण सहयोग
यह समझौता केवल ईंधन आपूर्ति तक सीमित नहीं है। तेल एवं गैस सहयोग पर हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और जैव ईंधन क्षेत्र में सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। भारतीय विशेषज्ञ मॉरीशस के अधिकारियों को तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास में सहायता प्रदान करेंगे। उल्लेखनीय है कि मॉरीशस वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन का संस्थापक सदस्य है, जिसकी शुरुआत भारत ने अपनी जी-20 अध्यक्षता के दौरान की थी।
हिंद महासागर में रणनीतिक महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक और आर्थिक उपस्थिति को व्यापक बनाने की कोशिश कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की ऊर्जा कूटनीति को नई ऊँचाई देता है और एक भरोसेमंद ऊर्जा सुरक्षा साझेदार के रूप में भारत की साख को और पुख्ता करता है।
आगे की राह
वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन सचिवालय मॉरीशस के ऊर्जा एवं सार्वजनिक उपयोगिता मंत्रालय के साथ मिलकर देश के लिए जैव ईंधन नीति ढाँचा विकसित करने पर काम कर रहा है। ज्ञान साझाकरण, अनुसंधान और प्रशिक्षण के माध्यम से दोनों देश जैव ईंधन क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को आगे बढ़ाएंगे, जो इस साझेदारी को परंपरागत ईंधन से परे एक हरित ऊर्जा भविष्य की ओर ले जाती है।