वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के पास रेलवे पटरी पर मिली घायल फिशिंग कैट, वन विभाग ने किया सफल बचाव
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा-नरकटियागंज रेल सेक्शन पर मंगलवार, 21 जुलाई को एक दुर्लभ फिशिंग कैट को रेलवे पुल पर घायल अवस्था में पाया गया, जिसे बगहा वन रेंज की टीम और रेलवे अधिकारियों ने मिलकर सुरक्षित बचा लिया। यह जानवर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के निकटवर्ती क्षेत्र में पाया गया, जहाँ गंडक नदी में बाढ़ के कारण वन्यजीव आबादी पर दबाव बढ़ा हुआ है।
घटनाक्रम: कैसे हुई पहचान और बचाव
फिशिंग कैट मुख्य तिरहुत नहर के पास रेलवे पुल नंबर 349 पर — बगहा और खैरपोखरा रेलवे स्टेशनों के बीच — देखी गई। स्थानीय ग्रामीणों ने शुरू में इसे तेंदुए का बच्चा समझ लिया, जिससे इलाके में भय का माहौल बन गया।
सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारियों ने वन विभाग को सतर्क किया। बगहा स्टेशन अधीक्षक संतोष पांडे ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान ट्रेनों को धीमी गति से चलाने या आवश्यकता पड़ने पर रोकने के तत्काल निर्देश जारी किए गए। रेलवे पुलिस की सहायता से बगहा वन रेंज की बचाव टीम मौके पर पहुँची और जानवर को बड़े जाल की मदद से सावधानीपूर्वक पकड़ा। पटरी से जानवर को हटाए जाने के बाद ट्रेन सेवाएँ सामान्य हो गईं।
चोट की प्रकृति और उपचार
बगहा वन रेंज अधिकारी के अनुसार, फिशिंग कैट की पीठ के निचले हिस्से में चोट लगी थी, जिससे उसे चलने-फिरने में कठिनाई हो रही थी — संभवतः किसी गुजरती ट्रेन की चपेट में आने से। बचाव के बाद उसे बगहा वन रेंज केंद्र ले जाया गया, जहाँ पशु चिकित्सक संजीव कुमार की देखरेख में उपचार जारी है। अधिकारियों ने बताया कि पूर्ण स्वस्थ होने पर जानवर को वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के उपयुक्त आवास में वापस छोड़ा जाएगा।
दो सप्ताह से मानव बस्ती के करीब थी बिल्ली
निवासियों के अनुसार, बचाव से पहले यह फिशिंग कैट लगभग दो सप्ताह से सेरहवा सरेह इलाके में विचरण कर रही थी। ग्रामीणों ने बताया कि इसे नरवल-बरवल गाँव के खेतों में कई बार देखा गया — यह गन्ने की फसल के बीच छिपती थी और पास की झाड़ियों में छोटे जानवरों का शिकार करती थी। गौरतलब है कि फिशिंग कैट एक संरक्षित प्रजाति है और भारत में इसकी आबादी सीमित है।
बाढ़ बनी वजह: वन्यजीव क्यों भटक रहे हैं
वन अधिकारियों का मानना है कि लगातार बारिश और गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के निचले इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई है। इससे कई वन्यजीव सुरक्षित ऊँचे स्थानों की तलाश में मानव बस्तियों की ओर आने को विवश हो रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ पहले से बढ़ी हुई हैं।
वन विभाग की अपील
वन विभाग ने वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले निवासियों से आग्रह किया है कि यदि कोई जंगली जानवर दिखे तो उसके निकट न जाएँ और न ही उसे पकड़ने की कोशिश करें। अधिकारियों ने कहा कि ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें, ताकि प्रशिक्षित कर्मचारी मनुष्य और जानवर दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उचित बचाव कर सकें।