21 जुलाई 2026
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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के पास रेलवे पटरी पर मिली घायल फिशिंग कैट, वन विभाग ने किया सफल बचाव

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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के पास रेलवे पटरी पर मिली घायल फिशिंग कैट, वन विभाग ने किया सफल बचाव

सारांश

बिहार के बगहा में रेलवे पुल पर मिली घायल फिशिंग कैट ने एक बड़ी समस्या की ओर ध्यान खींचा है — गंडक में बाढ़ से वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जानवर मानव बस्तियों में घुस रहे हैं। वन विभाग और रेलवे के समन्वित प्रयास से जानवर सुरक्षित है, लेकिन मानसून में मानव-वन्यजीव टकराव का खतरा बना हुआ है।

मुख्य बातें

21 जुलाई को बगहा-नरकटियागंज रेल सेक्शन पर रेलवे पुल नंबर 349 पर दुर्लभ फिशिंग कैट घायल अवस्था में मिली।
जानवर की पीठ के निचले हिस्से में चोट थी; संभवतः गुजरती ट्रेन की चपेट में आने से लगी।
बगहा वन रेंज की टीम और रेलवे पुलिस ने मिलकर जाल से सुरक्षित पकड़ा; बचाव के दौरान ट्रेन सेवाएँ अस्थायी रूप से प्रभावित रहीं।
पशु चिकित्सक संजीव कुमार की देखरेख में बगहा वन रेंज केंद्र में उपचार जारी; ठीक होने पर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा।
गंडक नदी में बाढ़ के कारण रिजर्व के निचले इलाकों में जलभराव से वन्यजीव मानव बस्तियों की ओर विस्थापित हो रहे हैं।
वन विभाग ने नागरिकों से जंगली जानवर दिखने पर तुरंत अधिकारियों को सूचित करने की अपील की है।

पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा-नरकटियागंज रेल सेक्शन पर मंगलवार, 21 जुलाई को एक दुर्लभ फिशिंग कैट को रेलवे पुल पर घायल अवस्था में पाया गया, जिसे बगहा वन रेंज की टीम और रेलवे अधिकारियों ने मिलकर सुरक्षित बचा लिया। यह जानवर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के निकटवर्ती क्षेत्र में पाया गया, जहाँ गंडक नदी में बाढ़ के कारण वन्यजीव आबादी पर दबाव बढ़ा हुआ है।

घटनाक्रम: कैसे हुई पहचान और बचाव

फिशिंग कैट मुख्य तिरहुत नहर के पास रेलवे पुल नंबर 349 पर — बगहा और खैरपोखरा रेलवे स्टेशनों के बीच — देखी गई। स्थानीय ग्रामीणों ने शुरू में इसे तेंदुए का बच्चा समझ लिया, जिससे इलाके में भय का माहौल बन गया।

सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारियों ने वन विभाग को सतर्क किया। बगहा स्टेशन अधीक्षक संतोष पांडे ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान ट्रेनों को धीमी गति से चलाने या आवश्यकता पड़ने पर रोकने के तत्काल निर्देश जारी किए गए। रेलवे पुलिस की सहायता से बगहा वन रेंज की बचाव टीम मौके पर पहुँची और जानवर को बड़े जाल की मदद से सावधानीपूर्वक पकड़ा। पटरी से जानवर को हटाए जाने के बाद ट्रेन सेवाएँ सामान्य हो गईं।

चोट की प्रकृति और उपचार

बगहा वन रेंज अधिकारी के अनुसार, फिशिंग कैट की पीठ के निचले हिस्से में चोट लगी थी, जिससे उसे चलने-फिरने में कठिनाई हो रही थी — संभवतः किसी गुजरती ट्रेन की चपेट में आने से। बचाव के बाद उसे बगहा वन रेंज केंद्र ले जाया गया, जहाँ पशु चिकित्सक संजीव कुमार की देखरेख में उपचार जारी है। अधिकारियों ने बताया कि पूर्ण स्वस्थ होने पर जानवर को वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के उपयुक्त आवास में वापस छोड़ा जाएगा।

दो सप्ताह से मानव बस्ती के करीब थी बिल्ली

निवासियों के अनुसार, बचाव से पहले यह फिशिंग कैट लगभग दो सप्ताह से सेरहवा सरेह इलाके में विचरण कर रही थी। ग्रामीणों ने बताया कि इसे नरवल-बरवल गाँव के खेतों में कई बार देखा गया — यह गन्ने की फसल के बीच छिपती थी और पास की झाड़ियों में छोटे जानवरों का शिकार करती थी। गौरतलब है कि फिशिंग कैट एक संरक्षित प्रजाति है और भारत में इसकी आबादी सीमित है।

बाढ़ बनी वजह: वन्यजीव क्यों भटक रहे हैं

वन अधिकारियों का मानना है कि लगातार बारिश और गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के निचले इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई है। इससे कई वन्यजीव सुरक्षित ऊँचे स्थानों की तलाश में मानव बस्तियों की ओर आने को विवश हो रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ पहले से बढ़ी हुई हैं।

वन विभाग की अपील

वन विभाग ने वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले निवासियों से आग्रह किया है कि यदि कोई जंगली जानवर दिखे तो उसके निकट न जाएँ और न ही उसे पकड़ने की कोशिश करें। अधिकारियों ने कहा कि ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें, ताकि प्रशिक्षित कर्मचारी मनुष्य और जानवर दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उचित बचाव कर सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक गंभीर संकेत छिपा है — मानसून में गंडक के बढ़ते जलस्तर के कारण वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन्यजीव बार-बार मानव बस्तियों और रेलवे पटरियों पर आ रहे हैं, जो रिजर्व के बफर जोन प्रबंधन की कमज़ोरियों को उजागर करता है। फिशिंग कैट एक संरक्षित प्रजाति है जिसकी आबादी पहले से दबाव में है; रेलवे पटरियाँ इनके लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। वन विभाग और रेलवे के बीच इस बार समन्वय सराहनीय रहा, लेकिन सवाल यह है कि क्या रिजर्व के आसपास स्थायी वन्यजीव-सुरक्षित रेलवे कॉरिडोर बनाने की दिशा में कोई ठोस नीतिगत कदम उठाया जाएगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिशिंग कैट क्या होती है और यह कितनी दुर्लभ है?
फिशिंग कैट (Prionailurus viverrinus) एक मध्यम आकार की जंगली बिल्ली है जो मुख्यतः आर्द्रभूमि, नदी किनारों और दलदली क्षेत्रों में रहती है। यह भारत में संरक्षित प्रजाति है और IUCN की 'संवेदनशील' श्रेणी में आती है; आवास नष्ट होने से इसकी आबादी लगातार घट रही है।
बगहा में फिशिंग कैट को कहाँ और कैसे बचाया गया?
फिशिंग कैट को 21 जुलाई को बगहा और खैरपोखरा स्टेशनों के बीच रेलवे पुल नंबर 349 पर घायल अवस्था में पाया गया। बगहा वन रेंज की टीम और रेलवे पुलिस ने मिलकर बड़े जाल की मदद से उसे सुरक्षित पकड़ा और बचाव केंद्र पहुँचाया।
फिशिंग कैट को क्या चोट लगी और अब उसका क्या हाल है?
वन अधिकारियों के अनुसार जानवर की पीठ के निचले हिस्से में चोट लगी थी, संभवतः किसी गुजरती ट्रेन से टकराने के कारण, जिससे उसे चलने में कठिनाई हो रही थी। अभी पशु चिकित्सक संजीव कुमार की देखरेख में बगहा वन रेंज केंद्र में उसका उपचार चल रहा है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जानवर मानव बस्तियों में क्यों आ रहे हैं?
वन अधिकारियों के अनुसार, लगातार बारिश और गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने से रिजर्व के निचले इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बन गई है। इससे वन्यजीव सुरक्षित ऊँचे स्थानों और मानव बस्तियों की ओर विस्थापित हो रहे हैं।
जंगली जानवर दिखने पर नागरिकों को क्या करना चाहिए?
वन विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जंगली जानवर दिखने पर उसके पास न जाएँ और न ही उसे पकड़ने की कोशिश करें। तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें ताकि प्रशिक्षित दल सुरक्षित बचाव कर सके।
राष्ट्र प्रेस
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