जामनगर होमगार्ड्स ने बनाईं 12,000 सीड बॉल्स, पीएम मोदी के 12 साल पर पर्यावरण को समर्पित पहल
सारांश
मुख्य बातें
जामनगर जिला होमगार्ड्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्र सरकार में 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 12,000 से अधिक सीड बॉल्स (बीज गोलियाँ) तैयार की हैं, जिन्हें वर्षा ऋतु से पहले जामनगर वन विभाग को सौंपा जाएगा। 14 जून को शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य हरित आवरण बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को नई गति देना है।
पहल का स्वरूप और उद्देश्य
जामनगर होमगार्ड्स ने यह अभियान गुजरात सरकार के गृह विभाग के निर्देशानुसार चलाया। इन सीड बॉल्स में सरगवा, नींबू, खैर, गोरस, इमली, हरमो, वटवृक्ष, जामुन, पीपल और गुलमोहर सहित कई देशी प्रजातियों के बीज शामिल किए गए हैं। सीड बॉल्स तैयार करने में जामनगर महानगरपालिका (JMC) के सहयोग से काली मिट्टी और गोबर की प्राकृतिक खाद का उपयोग किया गया।
सीड बॉल्स कैसे काम करती हैं
बीजों को मिट्टी और गोबर के मिश्रण से लड्डू की आकृति दी जाती है। इन्हें वर्षा से पहले उन क्षेत्रों में रोपा जाएगा जहाँ हरियाली की आवश्यकता है। बारिश होने पर मिट्टी की परत गलती है और बीज अंकुरित होकर कालांतर में वृक्ष का रूप लेते हैं। यह विधि कम लागत में अधिक क्षेत्रफल में वृक्षारोपण संभव बनाती है।
होमगार्ड कमांडेंट की प्रतिक्रिया
जामनगर जिला होमगार्ड कमांडेंट गिरीश सरवैया ने कहा, 'हमारा जामनगर का होमगार्ड परिवार वन विभाग के साथ मिलकर पीएम मोदी के हरियाली क्रांति के विचार में सहभागी होगा। इसी के तहत 12 साल के उपलक्ष्य में हम 12 हजार सीड-बॉल्स बना रहे हैं।' उन्होंने बताया कि सभी सीड बॉल्स वन विभाग को सौंपी जाएंगी जो जरूरत की जगहों पर इनका उपयोग करेगा।
आम जनता और पर्यावरण पर असर
यह पहल ऐसे समय में आई है जब देशभर में बढ़ते तापमान और घटते हरित क्षेत्र को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि सीड बॉल तकनीक को पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में अधिक किफायती और टिकाऊ माना जाता है, क्योंकि इसमें रोपाई के लिए अलग से श्रम और सिंचाई की जरूरत नहीं होती। वर्षा ऋतु में इनके प्रभावी अंकुरण की संभावना अधिक रहती है। आने वाले महीनों में इन सीड बॉल्स के रोपण के बाद इनकी निगरानी वन विभाग द्वारा की जाएगी।