जयनगर विधानसभा सीट: एसयूसीआई(सी) से टीएमसी की ओर बढ़ता राजनीतिक सफर

Click to start listening
जयनगर विधानसभा सीट: एसयूसीआई(सी) से टीएमसी की ओर बढ़ता राजनीतिक सफर

सारांश

जयनगर विधानसभा सीट का इतिहास राजनीतिक उतार-चढ़ाव से भरा है। एसयूसीआई(सी) का गढ़ रही यह सीट अब तृणमूल कांग्रेस के नियंत्रण में है। जानिए, यहां की सियासी पृष्ठभूमि और भविष्य की संभावनाएं।

Key Takeaways

  • जयनगर सीट का इतिहास राजनीतिक उतार-चढ़ाव से भरा है।
  • यहां एसयूसीआई(सी) का प्रभाव अब तृणमूल कांग्रेस के हाथ में है।
  • 70.30%25 मतदाता ग्रामीण क्षेत्रों से हैं।
  • जयनगर की अर्थव्यवस्था मिश्रित है।
  • यह क्षेत्र कोलकाता से अच्छे यातायात से जुड़ा हुआ है।

कोलकाता, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई विधानसभा सीटें ऐसी हैं जिनका इतिहास न केवल दिलचस्प है, बल्कि जटिल भी है। दक्षिण 24 परगना जिले की जयनगर सीट इसी श्रेणी में आती है। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और यह राजनीतिक उतार-चढ़ाव और बदलते जनादेश की कहानी बयां करती है। कभी एसयूसीआई(सी) का प्रभावी गढ़ रही यह सीट अब तृणमूल कांग्रेस के नियंत्रण में है, जबकि भाजपा यहां लगातार अपनी चुनौती को मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

जयनगर सीट दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित है और इसका केंद्र जयनगर मजलपुर नगर पालिका क्षेत्र है। आधिकारिक रूप से इसे जयनगर मजीलपुर कहा जाता है, लेकिन निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में इसे जयनगर विधानसभा क्षेत्र के तौर पर दर्ज किया गया है। यह जयनगर लोकसभा क्षेत्र के सात विधानसभा खंडों में से एक है।

इस विधानसभा क्षेत्र की भौगोलिक संरचना भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करती है। इसमें जयनगर मजीलपुर नगरपालिका के अलावा जयनगर-1 ब्लॉक की छह ग्राम पंचायतें और जयनगर-2 ब्लॉक की छह ग्राम पंचायतें शामिल हैं। यही कारण है कि यहां ग्रामीण और शहरी मतदाताओं का मिश्रित चरित्र देखने को मिलता है।

जयनगर सीट का इतिहास कई मोड़ों से भरा हुआ है। इसे 1951 में दो सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र के रूप में स्थापित किया गया था। पहले के वर्षों में यहां वामपंथी राजनीति का काफी दबदबा था और सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) ने 1952 और 1957 के चुनावों में सभी चार सीटों पर जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। इसके बाद, 1962 में इस सीट को दो हिस्सों, जयनगर उत्तर और जयनगर दक्षिण, में विभाजित किया गया। उस चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस ने दोनों सीटें जीतीं। बाद में इन दोनों क्षेत्रों को मिलाकर 1967 में जयनगर के रूप में पुनर्स्थापित किया गया।

1967 से लेकर लंबे समय तक इस सीट पर एसयूसीआई(सी) का प्रभाव बना रहा। पार्टी ने 1967, 1969 और 1972 में लगातार जीत हासिल की। 1972 में कांग्रेस ने फिर से यहां जीत दर्ज की, लेकिन इसके बाद 1977 से लेकर 2011 तक एसयूसीआई(सी) ने लगातार आठ चुनाव जीतकर इस क्षेत्र को अपना गढ़ बना लिया।

कुल मिलाकर, इस सीट पर एसयूसीआई(सी) ने 13 बार जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को दो-दो बार सफलता मिली है।

2011 के चुनावों से पहले जयनगर सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया। उसी चुनाव में एसयूसीआई(सी) के उम्मीदवार तरुण कांति नास्कर ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की श्यामली हल्दर को हराया। लेकिन 2016 का चुनाव इस सीट के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। तृणमूल कांग्रेस ने एसयूसीआई(सी) के मजबूत किले में सेंध लगाते हुए पहली बार जीत हासिल की। पार्टी के उम्मीदवार बिस्वनाथ दास ने कांग्रेस के सुजीत पटवारी को 15,051 वोटों से हराया और एसयूसीआई(सी) तीसरे स्थान पर चली गई।

2021 के विधानसभा चुनाव में बिस्वनाथ दास ने एक बार फिर जीत दर्ज कर तृणमूल का कब्जा बनाए रखा।

जयनगर विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है। यहां करीब 70.30%25 मतदाता गांवों में निवास करते हैं, जबकि लगभग 29.70%25 प्रतिशत जनसंख्या शहरी इलाकों में है। मतदान प्रतिशत भी हमेशा अधिक रहा है। 2011 में यहां 91.80%25 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि 2021 में भी 84.36%25 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

जयनगर मजीलपुर का इतिहास भी कम रोचक नहीं है। कभी यह इलाका सुंदरवन का हिस्सा हुआ करता था। समय के साथ जंगलों को साफ कर खेती और बस्तियां बसाई गईं, जिससे यह इलाका जनसंख्या और व्यापार का केंद्र बन गया। कोलकाता से लगभग 50 किलोमीटर दक्षिण में स्थित यह शहर आज सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का अहम केंद्र है। यहां बनने वाली प्रसिद्ध मिठाई पूरे बंगाल में मशहूर है।

जयनगर की अर्थव्यवस्था मिश्रित है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और मछली पालन प्रमुख आजीविका हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में व्यापार और सेवा क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई लोग रोजाना कोलकाता जाकर काम करते हैं। यातायात की दृष्टि से भी यह इलाका अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

Point of View

जो आगामी चुनावों में दिलचस्प मोड़ ला सकता है।
NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

जयनगर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास क्या है?
जयनगर विधानसभा सीट का इतिहास एसयूसीआई(सी) के मजबूत गढ़ से शुरू होकर अब तृणमूल कांग्रेस के नियंत्रण में आ गया है।
क्या जयनगर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है?
हां, जयनगर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।
जयनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता का अनुपात कैसा है?
यहां 70.30%25 ग्रामीण और 29.70%25 शहरी मतदाता हैं।
2016 में जयनगर सीट पर किसने जीत हासिल की थी?
2016 में तृणमूल कांग्रेस के बिस्वनाथ दास ने जीत हासिल की थी।
जयनगर का इतिहास क्या है?
जयनगर का इतिहास सुंदरवन के हिस्से के रूप में शुरू हुआ और अब यह व्यापार और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है।
Nation Press