कृष्णानगर की 7 विधानसभा सीटों का विश्लेषण: टीएमसी की बढ़त, भाजपा की तैयारी जारी

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कृष्णानगर की 7 विधानसभा सीटों का विश्लेषण: टीएमसी की बढ़त, भाजपा की तैयारी जारी

सारांश

कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र, जो 1967 से राजनीतिक परिवर्तन का गवाह रहा है, में 7 विधानसभा सीटों की स्थिति क्या है? जानिए टीएमसी की बढ़त और भाजपा की चुनौतियों के बारे में।

Key Takeaways

  • कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र में 7 विधानसभा सीटों की स्थिति महत्वपूर्ण है।
  • टीएमसी ने 2021 में अधिकांश सीटों पर जीत हासिल की।
  • भाजपा का वोट बैंक बढ़ रहा है, जो टीएमसी के लिए चुनौती है।
  • कृष्णानगर उत्तर सीट भाजपा के पास है, लेकिन यह खाली है।
  • पलाशीपारा और कालीगंज में टीएमसी का प्रभाव है।

कोलकाता, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र 1967 में स्थापित होने के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं का केंद्र रहा है। यह पश्चिम बंगाल के 42 लोकसभा क्षेत्रों में से एक है। वर्षों से इसने राजनीतिक समीकरणों में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे हैं, जो राज्य के बदलते राजनीतिक परिदृश्य को प्रकट करते हैं। इसी प्रकार, कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 7 विधानसभा सीटों की स्थिति भी रही है, जहां लोग अक्सर बदलाव की ओर अग्रसर होते हैं।

कृष्णानगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की सभी सात विधानसभा सीटें नादिया जिले में स्थित हैं। इन सीटों में तेहट्टा, पलाशीपारा, कालीगंज, नकाशीपारा, छपरा, कृष्णानगर उत्तर और कृष्णानगर दक्षिण शामिल हैं।

2021 के विधानसभा चुनाव में, कृष्णानगर उत्तर को छोड़कर सभी सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। भाजपा के टिकट पर मुकुल रॉय ने कृष्णानगर उत्तर से जीत दर्ज की थी, लेकिन उनके निधन के बाद यह सीट खाली हो गई। तेहट्टा सीट भी खाली है, जहां से 2021 में जीतने वाले टीएमसी के तपास कुमार साहा का भी निधन हो गया। कालीगंज से टीएमसी विधायक नसीरुद्दीन अहमद का निधन होने से यह सीट भी खाली हो गई थी। हालांकि, उपचुनाव में यह सीट फिर से टीएमसी को प्राप्त हुई।

वर्तमान में, पलाशीपारा से टीएमसी के माणिक भट्टाचार्य, कालीगंज से अलीफा अहमद, नकाशीपारा से कल्लोल खान, छपरा से रुकबानुर रहमान और कृष्णानगर दक्षिण से उज्ज्वल बिस्वास विधायक हैं।

तेहट्टा निर्वाचन क्षेत्र 1977 और 2006 के बीच अस्तित्व में नहीं था। 1951 से 1972 के बीच हुए चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने छह बार जीत हासिल की, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) को 1971 में एक बार जीत मिली। 2011 में निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्गठन के बाद माकपा ने फिर से जीत प्राप्त की। 2016 और 2021 में यहां टीएमसी ने अपना दबदबा बनाया। हालाँकि, पिछले कुछ चुनावों में भाजपा का वोटबैंक बढ़ा है, जो सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।

पलाशीपारा में टीएमसी को 2016 में पहली बार जीत मिली थी और उसने 2021 में इसे फिर से दोहराया। 2016 से पहले यहां माकपा ही एकमात्र पार्टी थी, जिसने 1977 के बाद से कोई चुनाव नहीं हारा। वहीं, कालीगंज विधानसभा क्षेत्र ने अक्सर राजनीतिक बदलाव को चुना है। शुरुआत में 6 चुनावों में कांग्रेस को जनता ने जिताया, लेकिन इसके बाद से यहां परिवर्तन का क्रम जारी रहा। 2016 में कांग्रेस ने टीएमसी से यह सीट वापस छीनी थी, लेकिन 2021 में टीएमसी ने अपनी दूसरी जीत हासिल करके कांग्रेस का पत्ता साफ किया। उसके बाद 2025 के उपचुनाव में भी टीएमसी की जीत हुई।

1951 में स्थापित नकाशीपाड़ा में अब तक 17 चुनाव हुए हैं। कांग्रेस, माकपा और टीएमसी ने यहां पांच-पांच बार जीत दर्ज की है। लेकिन 2001 के बाद से परिस्थितियां बदली हैं और यह तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ बन चुका है। लगातार 5 चुनावों में टीएमसी यहां विजयी रही है। हालांकि, भाजपा अभी भी लोकसभा की ताकत को विधानसभा स्तर की सफलता में बदलने की कोशिश कर रही है।

नादिया जिले का छपरा विधानसभा क्षेत्र 1962 में स्थापित हुआ। तब से अब तक यहां 15 चुनाव हो चुके हैं। शुरुआत में (1962 से 1972 तक) जनता ने राजनीतिक दलों को बदला, लेकिन 1977 में माकपा ने यहां अपनी पकड़ इस तरह बनायी कि 1977 से 2006 तक लगातार 7 बार जीत हासिल की। 2011 से 2021 तक टीएमसी ने भी यहां जीत की हैट्रिक लगाई है।

परिसीमन के बाद, कृष्णानगर उत्तर विधानसभा क्षेत्र 2011 में अस्तित्व में आया। अब तक 3 चुनावों में यहां दो राजनीतिक दलों को अवसर मिले। 2011 और 2016 में जहां टीएमसी विजयी रही, वहीं 2021 में भाजपा ने अपना खाता खोला। दूसरी ओर, कृष्णानगर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा बना हुआ है। पिछले तीनों चुनावों में टीएमसी को जीत मिली।

Point of View

यह स्पष्ट है कि टीएमसी का प्रभाव बरकरार है, जबकि भाजपा अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। यह क्षेत्र भविष्य में राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहेगा।
NationPress
14/03/2026

Frequently Asked Questions

कृष्णानगर क्षेत्र में कितनी विधानसभा सीटें हैं?
कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं।
कृष्णानगर में पिछले चुनावों में कौन सी पार्टी ने जीत हासिल की?
2021 के चुनावों में, टीएमसी ने अधिकांश सीटों पर जीत हासिल की।
भाजपा का वोट बैंक कृष्णानगर में कैसे विकसित हो रहा है?
भाजपा का वोट बैंक पिछले कुछ चुनावों में बढ़ा है, जो टीएमसी के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।
कृष्णानगर उत्तर सीट का हाल क्या है?
कृष्णानगर उत्तर सीट भाजपा के पास है, लेकिन मुकुल रॉय के निधन के बाद यह सीट खाली हो गई।
कृष्णानगर क्षेत्र में कौन-कौन सी प्रमुख राजनीतिक पार्टियाँ हैं?
कृष्णानगर क्षेत्र में मुख्य रूप से टीएमसी और भाजपा प्रमुख राजनीतिक पार्टियाँ हैं।
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