इंडी गठबंधन की महारैली पर JDU का तंज: '10 लाख की भीड़ का दावा खोखला, कथनी-करनी में फर्क'
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडी गठबंधन की प्रस्तावित महारैली को लेकर तीखा हमला बोला, जिसमें गठबंधन के 10 लाख लोगों के जुटान के दावे को 'खोखला' करार दिया गया। पटना से जेडीयू नेताओं और बिहार सरकार के मंत्रियों ने एक सुर में विपक्ष की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए।
श्याम रजक का दावों पर सवाल
जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने इंडी गठबंधन के 10 लाख लोगों के उपस्थित होने के दावे को सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि वाकई इतनी बड़ी संख्या में लोग रैली में पहुँचने वाले हैं, तो कौन-सा व्यापारी उस इलाके में अपनी दुकान खोलेगा, सामान सजाएगा और बिक्री करेगा? रजक ने विपक्ष के उस तर्क को भी खारिज किया जिसमें दावा किया जा रहा था कि महारैली से स्थानीय व्यापारियों को आर्थिक फायदा होगा।
रजक ने आगे कहा कि रामलीला मैदान और उसके आस-पास के क्षेत्र की भौगोलिक क्षमता का सच्चाई से आकलन किया जाए, तो 10 लाख की उपस्थिति का दावा खुद-ब-खुद खोखला साबित हो जाएगा। उन्होंने कहा, 'दावा करना और उसे ज़मीन पर सिद्ध करना दो बिल्कुल अलग-अलग बातें हैं।'
राजीव रंजन का अराजकता का आरोप
जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और इंडी गठबंधन के सहयोगी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि ये दल देश को अराजकता की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के शांतिप्रिय और लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखने वाले नागरिक ऐसे किसी भी प्रयास को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
रंजन ने जोड़ा कि लोकतंत्र की जड़ों को कमज़ोर करने वाले किसी भी राजनीतिक प्रयास को जनता का समर्थन नहीं मिलेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इंडी गठबंधन रामलीला मैदान की रैली को सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ एक बड़े जन-जागरण के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
मंत्री जायसवाल का तंज — '140 करोड़ में 10 लाख कोई बड़ी बात नहीं'
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने भी विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश में यदि किसी रैली में 10 लाख लोग भी आते हैं, तो यह कोई अभूतपूर्व उपलब्धि नहीं है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहज़े में सुझाया कि विपक्ष को उतने समर्थक जुटाने का लक्ष्य रखना चाहिए, जितने उसे चुनाव में वोट मिलते हैं।
जायसवाल ने यह भी कहा कि पूरा देश समझ चुका है कि कांग्रेस सत्ता पाने के लिए बेचैन है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक मार्ग से चुनाव जीतकर सरकार बनाने वाली पार्टियाँ ही देश की असली आवाज़ होती हैं, और विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह जनसेवा और कार्यों के बल पर लोगों का विश्वास जीते।
वैश्विक राजनीति पर जायसवाल की टिप्पणी
जायसवाल ने इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर भी अपनी राय रखी। उनके अनुसार, दुनिया में कुछ देश और ताकतें हमेशा अपना वर्चस्व बनाए रखने की कोशिश में लगी रहती हैं — यही कारण है कि रूस-यूक्रेन युद्ध, इज़रायल-ईरान तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के इर्द-गिर्द अस्थिरता बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विकसित देश ऐसे राष्ट्रों के बीच संघर्ष पैदा करने की कोशिश करते हैं जो वास्तव में एक-दूसरे से नहीं लड़ना चाहते।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि इंडी गठबंधन की यह महारैली ऐसे समय में आयोजित हो रही है जब विपक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ जन-समर्थन दिखाने की कोशिश में है। जेडीयू, जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है, लगातार इंडी गठबंधन की गतिविधियों पर पैनी नज़र रख रहा है और राजनीतिक पलटवार करता रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, भीड़ के दावों को लेकर यह बयानबाजी उस व्यापक राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है, जिसमें दोनों पक्ष जन-समर्थन का आख्यान स्थापित करने में लगे हैं।