1 नवंबर 2026
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इंडी गठबंधन की महारैली पर JDU का तंज: '10 लाख की भीड़ का दावा खोखला, कथनी-करनी में फर्क'

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इंडी गठबंधन की महारैली पर JDU का तंज: '10 लाख की भीड़ का दावा खोखला, कथनी-करनी में फर्क'

सारांश

इंडी गठबंधन की दिल्ली महारैली से पहले जेडीयू ने मोर्चा खोल दिया। 10 लाख भीड़ के दावे को 'खोखला' बताते हुए श्याम रजक ने जमीनी हकीकत का सवाल उठाया, तो मंत्री जायसवाल ने 140 करोड़ की आबादी के आगे 10 लाख को 'सामान्य' करार दिया — यह बयानबाजी भीड़ नहीं, आख्यान की लड़ाई है।

मुख्य बातें

जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने रामलीला मैदान रैली में 10 लाख लोगों के जुटने के दावे को 'खोखला' करार दिया।
जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर देश में 'अराजकता फैलाने' का आरोप लगाया।
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि 140 करोड़ की आबादी में 10 लाख का जुटाव कोई बड़ी उपलब्धि नहीं।
जायसवाल ने विपक्ष को सलाह दी कि वे उतने लोग जुटाएँ जितने उन्हें चुनाव में वोट मिलते हैं।
जायसवाल ने रूस-यूक्रेन युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य तनाव का उल्लेख करते हुए वैश्विक स्तर पर कुछ देशों की 'वर्चस्व की राजनीति' पर भी निशाना साधा।

जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडी गठबंधन की प्रस्तावित महारैली को लेकर तीखा हमला बोला, जिसमें गठबंधन के 10 लाख लोगों के जुटान के दावे को 'खोखला' करार दिया गया। पटना से जेडीयू नेताओं और बिहार सरकार के मंत्रियों ने एक सुर में विपक्ष की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए।

श्याम रजक का दावों पर सवाल

जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने इंडी गठबंधन के 10 लाख लोगों के उपस्थित होने के दावे को सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि वाकई इतनी बड़ी संख्या में लोग रैली में पहुँचने वाले हैं, तो कौन-सा व्यापारी उस इलाके में अपनी दुकान खोलेगा, सामान सजाएगा और बिक्री करेगा? रजक ने विपक्ष के उस तर्क को भी खारिज किया जिसमें दावा किया जा रहा था कि महारैली से स्थानीय व्यापारियों को आर्थिक फायदा होगा।

रजक ने आगे कहा कि रामलीला मैदान और उसके आस-पास के क्षेत्र की भौगोलिक क्षमता का सच्चाई से आकलन किया जाए, तो 10 लाख की उपस्थिति का दावा खुद-ब-खुद खोखला साबित हो जाएगा। उन्होंने कहा, 'दावा करना और उसे ज़मीन पर सिद्ध करना दो बिल्कुल अलग-अलग बातें हैं।'

राजीव रंजन का अराजकता का आरोप

जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और इंडी गठबंधन के सहयोगी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि ये दल देश को अराजकता की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के शांतिप्रिय और लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखने वाले नागरिक ऐसे किसी भी प्रयास को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

रंजन ने जोड़ा कि लोकतंत्र की जड़ों को कमज़ोर करने वाले किसी भी राजनीतिक प्रयास को जनता का समर्थन नहीं मिलेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इंडी गठबंधन रामलीला मैदान की रैली को सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ एक बड़े जन-जागरण के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

मंत्री जायसवाल का तंज — '140 करोड़ में 10 लाख कोई बड़ी बात नहीं'

बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने भी विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश में यदि किसी रैली में 10 लाख लोग भी आते हैं, तो यह कोई अभूतपूर्व उपलब्धि नहीं है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहज़े में सुझाया कि विपक्ष को उतने समर्थक जुटाने का लक्ष्य रखना चाहिए, जितने उसे चुनाव में वोट मिलते हैं।

जायसवाल ने यह भी कहा कि पूरा देश समझ चुका है कि कांग्रेस सत्ता पाने के लिए बेचैन है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक मार्ग से चुनाव जीतकर सरकार बनाने वाली पार्टियाँ ही देश की असली आवाज़ होती हैं, और विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह जनसेवा और कार्यों के बल पर लोगों का विश्वास जीते।

वैश्विक राजनीति पर जायसवाल की टिप्पणी

जायसवाल ने इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर भी अपनी राय रखी। उनके अनुसार, दुनिया में कुछ देश और ताकतें हमेशा अपना वर्चस्व बनाए रखने की कोशिश में लगी रहती हैं — यही कारण है कि रूस-यूक्रेन युद्ध, इज़रायल-ईरान तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के इर्द-गिर्द अस्थिरता बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विकसित देश ऐसे राष्ट्रों के बीच संघर्ष पैदा करने की कोशिश करते हैं जो वास्तव में एक-दूसरे से नहीं लड़ना चाहते।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि इंडी गठबंधन की यह महारैली ऐसे समय में आयोजित हो रही है जब विपक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ जन-समर्थन दिखाने की कोशिश में है। जेडीयू, जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है, लगातार इंडी गठबंधन की गतिविधियों पर पैनी नज़र रख रहा है और राजनीतिक पलटवार करता रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, भीड़ के दावों को लेकर यह बयानबाजी उस व्यापक राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है, जिसमें दोनों पक्ष जन-समर्थन का आख्यान स्थापित करने में लगे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दरअसल यह आख्यान पर नियंत्रण की राजनीति है — जो दल पहले 'जन-समर्थन' का ठप्पा लगा ले, वही मीडिया चक्र जीतता है। जेडीयू का यह आक्रामक पलटवार NDA की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें विपक्षी गतिविधियों को उनके शुरू होने से पहले ही प्रश्नांकित कर दिया जाए। गौरतलब है कि रैली की भीड़ को लेकर 'दावा बनाम हकीकत' वाला यह खेल भारतीय राजनीति में नया नहीं है — दोनों पक्ष इसमें अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार संख्याएँ उछालते रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या ये रैलियाँ चुनावी परिणामों पर असर डालती हैं — और उस कसौटी पर दोनों पक्षों का रिकॉर्ड मिला-जुला है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडी गठबंधन की महारैली कहाँ और कब होने वाली है?
इंडी गठबंधन की महारैली दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 2 नवंबर 2026 को आयोजित होने वाली है। गठबंधन ने दावा किया है कि इस रैली में 10 लाख से अधिक लोग शामिल होंगे।
JDU ने 10 लाख भीड़ के दावे को खोखला क्यों बताया?
जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि रामलीला मैदान और उसके आस-पास के क्षेत्र की भौगोलिक क्षमता को देखते हुए 10 लाख की उपस्थिति का दावा यथार्थपरक नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इतनी भीड़ की उम्मीद में कोई व्यापारी अपनी दुकान क्यों खोलेगा।
राजीव रंजन ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन के सहयोगी दल देश को अराजकता की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र की जड़ों को कमज़ोर करने वाले किसी भी प्रयास को जनता का समर्थन नहीं मिलेगा।
मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने क्या कहा?
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश में 10 लाख लोगों का जुटाव कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि विपक्ष को उतने लोग जुटाने का लक्ष्य रखना चाहिए जितने उसे चुनाव में वोट मिलते हैं।
इस बयानबाजी का राजनीतिक संदर्भ क्या है?
जेडीयू NDA का हिस्सा है और इंडी गठबंधन की रैली से पहले उसके दावों को प्रश्नांकित करना NDA की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें विपक्ष के जन-आधार के आख्यान को चुनौती दी जाती है। यह वाकयुद्ध असल में उस राजनीतिक संघर्ष को दर्शाता है जिसमें दोनों पक्ष जनता का समर्थन अपने पक्ष में दिखाने की होड़ में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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